Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا يَسَّمَّعُونَ – वे सुनने की कोशिश नहीं कर सकते / वे कान नहीं लगा सकते।
- الْمَلَإِ الْأَعْلَى – ऊँची सभा, अर्थात आकाशों में उपस्थित फ़रिश्ते।
- يُقْذَفُونَ – उन्हें फेंका जाता है / मारा जाता है।
- مِن كُلِّ جَانِبٍ – हर तरफ़ से।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें उस महान व्यवस्था से परिचित कराती है जो अल्लाह ने आकाशों में स्थापित की है। शैतान (जिन्नात में से विद्रोही) आकाश की ऊँची सभा तक पहुँचने और वहाँ के फ़रिश्तों की बातें सुनने की कोशिश करते हैं, लेकिन अल्लाह की कुदरत और हिफ़ाज़त उन्हें इससे रोक देती है। वे न तो उस पवित्र सभा तक पहुँच सकते हैं और न ही वहाँ की कोई बात सुन सकते हैं। जैसे ही वे झाँकने या सुनने की कोशिश करते हैं, हर तरफ़ से उन पर आग के उल्कापिंड (शहाब) फेंके जाते हैं, जो उन्हें दूर भगा देते हैं।
यह अल्लाह की उस रहमत और हिकमत का प्रमाण है कि उसने अपने फ़रिश्तों की महफ़िल को हर प्रकार की बुराई और शैतानी हस्तक्षेप से पाक रखा है। यह उस पवित्रता की निशानी है जो अल्लाह के दीन और उसके संदेश (वही) के साथ भी है — कि शैतान उसमें कोई मिलावट नहीं कर सकते। यही कारण है कि क़ुरआन और वही महफ़ूज़ (सुरक्षित) है, और अल्लाह का मार्गदर्शन हमेशा स्पष्ट और शुद्ध रहता है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की हिफ़ाज़त उसके बंदों के लिए भी है — जो उसकी रस्सी को थामे रहते हैं। जिस तरह उसने आकाश को शैतानों से महफ़ूज़ रखा, उसी तरह वह अपने ईमानवाले बंदों को भी शैतानी वसवसों (बुरे ख़यालात) से बचाता है, बशर्ते वे सच्चे दिल से उसकी पनाह चाहें। यह हमारे लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है कि हम अकेले नहीं हैं — अल्लाह की निगरानी और हिमायत हमारे साथ है। जो लोग उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, उन्हें वह हर बुराई से बचाता है और उनके दिलों को सुकून और नूर से भर देता है।
याद रखिए, यह दुनिया इम्तिहान की जगह है, लेकिन अल्लाह ने अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ा। उसने क़ुरआन को महफ़ूज़ रखा, रसूलों को भेजा, और हर ज़माने में हिदायत का रास्ता स्पष्ट किया। हमें चाहिए कि हम उसकी तरफ़ पूरी तरह मुतवज्जह हों, उसकी इबादत करें और उसकी रहमत के तलबगार रहें — क्योंकि वही सबसे बड़ा हिमायती और मददगार है।
📜 आयत 6-10 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 8
सूरा अस-साफ्फात आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि अब शैतान आलमे बाला की तरफ़ कान भी नहीं…सूरा आयत 8/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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