अस-साफ्फात · 9/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
دُحُورًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ وَاصِبٌ ۝٩
Duhooranw wa lahum `azaabunw waasib
📖 हिंदी अर्थ
और उनके लिए पाएदार अज़ाब है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • دُحُورًا (दुहूरन): खदेड़ना, दूर भगाना, अपमानित करके निकालना।
  • وَاصِبٌ (वासिब): स्थायी, निरंतर, कभी समाप्त न होने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान दृश्य का वर्णन करती है जब शैतान (दुष्ट आत्माएँ) आकाश के ऊपरी लोक (मलाइक के क्षेत्र) तक पहुँचने का प्रयास करते हैं, ताकि वहाँ की बातें सुन सकें। अल्लाह तआला ने उन्हें हर तरफ से जलती हुई उल्काओं (शहाब) के माध्यम से खदेड़ दिया जाता है — यह उनके लिए अपमान और दूर भगाने का साधन है। वे कभी भी उस पवित्र क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकते, न ही वहाँ की गुप्त बातें सुन सकते हैं।

यह केवल इस दुनिया की सज़ा नहीं है, बल्कि आख़िरत (परलोक) में उनके लिए एक ऐसा दर्दनाक अज़ाब (यातना) है जो कभी समाप्त नहीं होगा — निरंतर, स्थायी और हमेशा रहने वाला। यह अज़ाब उनके अहंकार, उनकी सरकशी और अल्लाह के आदेशों की अवहेलना का परिणाम है।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की हिफ़ाज़त (रक्षा) करता है और अपने दीन (धर्म) की रक्षा स्वयं करता है। जिस तरह शैतान को आकाश की ओर बढ़ने से रोका गया, उसी तरह अल्लाह अपने नेक बंदों को शैतान के वसवसों (बुरे विचारों) से बचाता है। यह हमारे लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि जो व्यक्ति अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़ लेता है, अल्लाह उसे हर बुराई से महफ़ूज़ (सुरक्षित) रखता है।

इस आयत में एक चेतावनी भी है — जो लोग अल्लाह के दीन का मज़ाक उड़ाते हैं या उसके रास्ते से रोकते हैं, उनका अंजाम शैतान के समान होगा: इस दुनिया में अपमान और आख़िरत में स्थायी यातना। लेकिन जो लोग अल्लाह की ओर रुजू करते हैं, उनके लिए उसकी रहमत और जन्नत की खुशखबरी है। अल्लाह हमें शैतान के मक्र (चाल) से बचाए और सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 7-11 — सूरा अस-साफ्फात

7وَحِفْظًا مِّن كُلِّ شَيْطَانٍ مَّارِدٍ
और (तारों को) हर सरकश शैतान से हिफ़ाज़त के वास्ते (भी पैदा किया)
8لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى الْمَلَإِ الْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍ
कि अब शैतान आलमे बाला की तरफ़ कान भी नहीं लगा सकते और (जहाँ सुन गुन लेना चाहा तो) हर तरफ़ से खदेड़ने के लिए शहाब फेके जाते हैं
9دُحُورًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ وَاصِبٌ
और उनके लिए पाएदार अज़ाब है
10إِلَّا مَنْ خَطِفَ الْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ ثَاقِبٌ
मगर जो (शैतान शाज़ व नादिर फरिश्तों की) कोई बात उचक ले भागता है तो आग का दहकता हुआ तीर उसका पीछा करता है
11فَاسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَا ۚ إِنَّا خَلَقْنَاهُم مِّن طِينٍ لَّازِبٍ
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
9आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 9

सूरा अस-साफ्फात आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनके लिए पाएदार अज़ाब है

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Wednesday, September 30, 2026

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