अस-साफ्फात · 19/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ ۝١٩
Fa innamaa hiya zajra tunw waahidatun fa izaa hum yanzuroon
📖 हिंदी अर्थ
और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • زَجْرَةٌ: एक ही बार की तेज़ आवाज़ या पुकार, जो दूसरी बार सूर (नरसिंगा) में फूँके जाने का संकेत है।
  • يَنظُرُونَ: वे देख रहे होंगे, अर्थात अपनी क़ब्रों से उठकर प्रलय के भयानक दृश्यों को देख रहे होंगे।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत क़यामत के दिन की उस हैरतअंगेज़ हक़ीक़त को बयान करती है जब अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत से सारे इंसानों को दोबारा ज़िंदा करेगा। अल्लाह फ़रमाता है कि यह दोबारा उठना कोई मुश्किल या लंबा काम नहीं, बल्कि सिर्फ एक ही बार पुकार होगी—एक ही झिड़की या सूर की दूसरी फूँक—और उसी लम्हे सारे लोग अपनी क़ब्रों से निकलकर खड़े हो जाएँगे और अपनी आँखों से प्रलय के भयानक मंज़र देखने लगेंगे। वे हैरान और सहमे हुए इधर-उधर देखेंगे कि उनके साथ क्या किया जा रहा है और उनका अंजाम क्या होगा।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त चेतावनी है जो मरने के बाद जी उठने को नामुमकिन समझते हैं। अल्लाह तआला बता रहा है कि उसकी क़ुदरत के आगे यह काम एक पल से भी कम समय में हो जाएगा। जिस तरह एक बार पैदा करना आसान था, उसी तरह दोबारा ज़िंदा करना भी उसके लिए बिल्कुल आसान है। यह वह दिन होगा जब हर इंसान अपने अमलों का सामना करेगा, और जो लोग दुनिया में अल्लाह के हुक्मों से ग़ाफ़िल रहे, वे उस दिन पछताएँगे, लेकिन पछतावा उनके किसी काम न आएगा।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें हमेशा उस दिन की तैयारी में रहना चाहिए। जो लोग नेक अमल करते हैं और अल्लाह की राह में चलते हैं, उनके लिए वह दिन रहमत और खुशी का होगा, और जो गुनाहों में डूबे रहे, उनके लिए वह दिन सख़्त अज़ाब का होगा। अल्लाह तआला ने हमें मोहलत दी है, हमें चाहिए कि इस मोहलत से फ़ायदा उठाएँ, तौबा करें, और अपने रब की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। याद रखें, अल्लाह की पुकार से बचना किसी के बस में नहीं, और उस दिन हर कोई अपने किए का फल पाएगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 17-21 — अस-साफ्फात

17أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ
तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे
18قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَاخِرُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)
19فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ
और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे
20وَقَالُوا يَا وَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ الدِّينِ
और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है
21هَٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ الَّذِي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे
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अनुवाद — अस-साफ्फात 19

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Tuesday, August 18, 2026

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