Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَالتَّالِيَاتِ ذِكْرًا: अर्थात वे (फ़रिश्ते) जो ज़िक्र (अल्लाह की याद और उसकी वही) को पढ़ते हैं।
तफ़सीर:
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला ने अपने फ़रिश्तों की क़सम खाई है, जो उसके ज़िक्र और कलाम (वही) को पढ़ते हैं। ये वे फ़रिश्ते हैं जो अल्लाह के हुक्म से उसका कलाम लोगों तक पहुँचाते हैं, और वे लगातार अल्लाह की तस्बीह और तहलील में मशगूल रहते हैं।
अल्लाह तआला ने इस आयत में फ़रिश्तों की तीन ख़ूबियों का ज़िक्र किया है: (1) वे सफ़ों में खड़े होकर इबादत करते हैं, (2) वे बादलों को हाँकते हैं और उन्हें अल्लाह के हुक्म से चलाते हैं, (3) और वे अल्लाह का ज़िक्र और उसकी वही पढ़ते हैं। ये सब उनके रुत्बे और अज़मत को बयान करता है।
इस क़सम का मक़सद ये है कि अल्लाह तआला ये बात साबित करना चाहता है कि तुम्हारा माबूद (जिसकी तुम इबादत करते हो) अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। इसलिए तुम सिर्फ़ उसी की इबादत करो और उसी के आगे सर झुकाओ।
यहाँ एक ज़रूरी नसीहत ये है कि अल्लाह तआला ने अपने मख़लूक़ (फ़रिश्तों) की क़सम खाई है, क्योंकि वह जो चाहे उसकी क़सम खा सकता है। लेकिन इंसानों के लिए ये जाइज़ नहीं कि वे अल्लाह के सिवा किसी और की क़सम खाएँ। किसी ग़ैर-अल्लाह की क़सम खाना शिर्क है, और ये बहुत बड़ा गुनाह है।
इस आयत से हमें ये सबक़ मिलता है कि अल्लाह के फ़रिश्ते उसके कलाम को पढ़ते हैं, तो हमें भी चाहिए कि हम क़ुरआन को पढ़ें, उसे समझें और उस पर अमल करें। फ़रिश्तों का ज़िक्र करना और उनकी तरह अल्लाह की इबादत में मशगूल रहना हमारे ईमान की निशानी है। अल्लाह तआला हमें अपने ज़िक्र और अपने कलाम को पढ़ने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 1-5 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 3
सूरा अस-साफ्फात आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर कुरान पढ़ने वालों की क़सम हैसूरा आयत 3/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


