अस-साफ्फात · 18/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَاخِرُونَ ۝١٨
Qul na`am wa antum daakhiroon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • دَاخِرُونَ (दाखिरून): छोटे, अपमानित और विनम्र होकर। यानी ऐसी हालत में कि उन्हें पूरी तरह वश में कर लिया गया हो और वे किसी भी प्रकार की कोई प्रतिकार करने की शक्ति न रखते हों।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जब ये मुन्किर (इन्कार करने वाले) लोग क़ियामत के दिन उठाए जाने को असंभव और दूर की बात कहते हैं, और तुमसे पूछते हैं कि क्या हम सचमुच दोबारा जीवित किए जाएँगे, तो तुम उन्हें साफ़ और दृढ़ शब्दों में जवाब दो: "हाँ!" बेशक तुम दोबारा उठाए जाओगे, और सिर्फ़ तुम ही नहीं, बल्कि तुम्हारे शुरुआती बाप-दादा भी, जो मिट्टी और बिखरी हुई हड्डियों में मिल चुके हैं, सबको ज़िंदा करके उठाया जाएगा। लेकिन यह उठना किसी इज़्ज़त और बड़ाई के साथ नहीं होगा, बल्कि तुम सब अपमानित, दबे हुए और पूरी तरह वश में किए हुए हालत में उठाए जाओगे। कोई तुममें से बच निकलने की ताक़त नहीं रखेगा, न कोई सिफ़ारिश करने वाला तुम्हारी मदद कर सकेगा। यह उस दिन की सच्ची ख़बर है, जिसे झुठलाने वाले लोग उस वक़्त अपनी आँखों से देख लेंगे, जब हर इन्सान अपने किए का सामना करेगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कुछ भी असंभव नहीं है। जिसने इस कायनात को पहली बार पैदा किया, वही इसे दोबारा ज़िंदा करने पर पूरी तरह क़ादिर है। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी को समझदारी से गुज़ारें, क्योंकि एक दिन हमें अपने रब के सामने हाज़िर होना है। जो लोग आज अल्लाह के सामने सर झुकाते हैं और उसकी इबादत करते हैं, उनके लिए उस दिन इज़्ज़त और ख़ुशी है, और जो लोग उसके हुक्म से सरकशी करते हैं, उनके लिए उस दिन रुसवाई और ज़िल्लत है। आओ हम सब अपने रब की तरफ़ लौटें, उसकी रहमत के साये में आएँ, और उस दिन की शर्मिंदगी से बचने की कोशिश करें।

🎧 सुनें

📜 आयत 16-20 — अस-साफ्फात

16أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
भला जब हम मर जाएँगे और ख़ाक और हड्डियाँ रह जाएँगे
17أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ
तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे
18قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَاخِرُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)
19فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ
और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे
20وَقَالُوا يَا وَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ الدِّينِ
और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है
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अनुवाद — अस-साफ्फात 18

सूरा अस-साफ्फात आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)

सूरा आयत 18/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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