अल-बकरा · 259/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
أَوْ كَالَّذِي مَرَّ عَلَىٰ قَرْيَةٍ وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا قَالَ أَنَّىٰ يُحْيِي هَٰذِهِ اللَّهُ بَعْدَ مَوْتِهَا ۖ فَأَمَاتَهُ اللَّهُ مِائَةَ عَامٍ ثُمَّ بَعَثَهُ ۖ قَالَ كَمْ لَبِثْتَ ۖ قَالَ لَبِثْتُ يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ ۖ قَالَ بَل لَّبِثْتَ مِائَةَ عَامٍ فَانظُرْ إِلَىٰ طَعَامِكَ وَشَرَابِكَ لَمْ يَتَسَنَّهْ ۖ وَانظُرْ إِلَىٰ حِمَارِكَ وَلِنَجْعَلَكَ آيَةً لِّلنَّاسِ ۖ وَانظُرْ إِلَى الْعِظَامِ كَيْفَ نُنشِزُهَا ثُمَّ نَكْسُوهَا لَحْمًا ۚ فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُ قَالَ أَعْلَمُ أَنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۝٢٥٩
Aw kallazee marra `alaa qaryatinw wa hiya khaawiyatun `alaa `urooshihaa qaala annaa yuhyee haazihil laahu ba`da mawtihaa fa amaatahul laahu mi`ata `aamin suumma ba`asahoo qaala kam labista qaala labistu yawman aw ba`da yawmin qaala bal labista mi`ata `aamin fanzur ilaa ta`aamika wa sharaabika lam yatasannah wanzur ilaa himaarika wa linaj`alaka Aayatal linnaasi wanzur ilal`izaami kaifa nunshizuhaa summa naksoohaa lahmaa; falammaa tabiyana lahoo qaala a`lamu annal laaha `alaakulli shai`in Qadeer
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल तुमने) मसलन उस (बन्दे के हाल पर भी नज़र की जो एक गॉव पर से होकर गुज़रा और वो ऐसा उजड़ा था कि अपनी छतों पर से ढह के गिर पड़ा था ये देखकर वह बन्दा (कहने लगा) अल्लाह अब इस गॉव को ऐसी वीरानी के बाद क्योंकर आबाद करेगा इस पर ख़ुदा ने उसको (मार डाला) सौ बरस तक मुर्दा रखा फिर उसको जिला उठाया (तब) पूछा तुम कितनी देर पड़े रहे अर्ज क़ी एक दिन पड़ा रहा एक दिन से भी कम फ़रमाया नहीं तुम (इसी हालत में) सौ बरस पड़े रहे अब ज़रा अपने खाने पीने (की चीज़ों) को देखो कि बुसा तक नहीं और ज़रा अपने गधे (सवारी) को तो देखो कि उसकी हड्डियाँ ढेर पड़ी हैं और सब इस वास्ते किया है ताकि लोगों के लिये तुम्हें क़ुदरत का नमूना बनाये और अच्छा अब (इस गधे की) हड्डियों की तरफ़ नज़र करो कि हम क्योंकर जोड़ जाड़ कर ढाँचा बनाते हैं फिर उनपर गोश्त चढ़ाते हैं पस जब ये उनपर ज़ाहिर हुआ तो बेसाख्ता बोल उठे कि (अब) मैं ये यक़ीने कामिल जानता हूं कि ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ (मुख्य शब्दों के अर्थ):

  • ख़ावियतुन: गिरी हुई, बर्बाद, खंडहर बनी हुई।
  • अला उरूशिहा: अपनी छतों पर गिरी हुई, यानी छतें गिर गईं और दीवारें उनके ऊपर आ गिरीं।
  • अन्ना: कैसे, किस तरह।
  • फ़अमातहु: तो अल्लाह ने उसे मार दिया (मौत दे दी)।
  • बा'असहु: उसे उठाया, ज़िंदा किया।
  • लबिस्त: तुम ठहरे, तुमने समय बिताया।
  • लम यतसन्नह: उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया, वह ज्यों का त्यों बना रहा।
  • नुन्शिज़ुहा: हम उन्हें उठाते हैं, जोड़ते हैं, एकत्र करते हैं।
  • नक्सूहा: हम उसे पहनाते हैं, ढकते हैं।
  • तबय्यन: स्पष्ट हो गया, प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे गया।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस व्यक्ति की अद्भुत कहानी बयान करती है जो एक बर्बाद और वीरान बस्ती से गुज़रा। वह बस्ती इस कदर तबाह हो चुकी थी कि उसकी छतें गिर गई थीं और दीवारें उन्हीं के ऊपर ढह गई थीं। यह देखकर उस व्यक्ति ने हैरानी और अचंभे से कहा: "यह अल्लाह इस बस्ती को मौत के बाद कैसे ज़िंदा करेगा?" उसका यह कहना शक की वजह से नहीं था, बल्कि अल्लाह की कुदरत के इस अजीबो-ग़रीब नज़ारे को देखकर उसके मन में यह सवाल उठा था।

तो अल्लाह ने उसे सौ साल के लिए मौत दे दी। फिर उसे ज़िंदा करके उससे पूछा: "तुम कितनी देर ठहरे?" उसने कहा: "मैं एक दिन या उसका कुछ हिस्सा ही ठहरा हूँ।" अल्लाह ने फ़रमाया: "नहीं, बल्कि तुम सौ साल ठहरे। अब अपने खाने और पीने की चीज़ों को देखो, वे बिल्कुल ताज़ा हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं आया। और अपने गधे को देखो (कैसे मरा पड़ा है, उसकी हड्डियाँ बिखरी हुई हैं)। हमने ऐसा इसलिए किया ताकि तुम्हें लोगों के लिए एक निशानी बना दें। अब उन हड्डियों को देखो कि हम किस तरह उन्हें उठाकर जोड़ते हैं, फिर उन्हें गोश्त पहनाते हैं।"

जब उस व्यक्ति ने यह सब कुछ अपनी आँखों से देख लिया, तो उस पर सच्चाई साफ़ हो गई और उसने पुकारकर कहा: "मैं जान गया कि अल्लाह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखता है।"

इस कहानी में अल्लाह तआला हमें यह सिखाना चाहते हैं कि मौत के बाद दोबारा ज़िंदा होना उनके लिए बिल्कुल आसान है। जिस तरह उस व्यक्ति का खाना और पानी सौ साल तक ताज़ा रहा और उसका गधा उसकी आँखों के सामने ज़िंदा हो गया, उसी तरह अल्लाह क़यामत के दिन सबको ज़िंदा करेगा। यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह की कुदरत के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है। जो इंसान इस पर ईमान रखता है, उसका दिल अल्लाह की रहमत और कुदरत पर पूरा भरोसा करता है। यह कहानी हमें बताती है कि अल्लाह की ताक़त का कोई अंत नहीं, और उसके वादे सच्चे हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 257-261 — अल-बकरा

257اللَّهُ وَلِيُّ الَّذِينَ آمَنُوا يُخْرِجُهُم مِّنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا أَوْلِيَاؤُهُمُ الطَّاغُوتُ يُخْرِجُونَهُم مِّنَ النُّورِ إِلَى الظُّلُمَاتِ ۗ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
ख़ुदा उन लोगों का सरपरस्त है जो ईमान ला चुके कि उन्हें (गुमराही की) तारीक़ियों से निकाल कर (हिदायत की) रौशनी में लाता है और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनके सरपरस्त शैतान हैं कि उनको (ईमान की) रौशनी से निकाल कर (कुफ़्र की) तारीकियों में डाल देते हैं यही लोग तो जहन्नुमी हैं (और) यही उसमें हमेशा रहेंगे
258أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِي حَاجَّ إِبْرَاهِيمَ فِي رَبِّهِ أَنْ آتَاهُ اللَّهُ الْمُلْكَ إِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ رَبِّيَ الَّذِي يُحْيِي وَيُمِيتُ قَالَ أَنَا أُحْيِي وَأُمِيتُ ۖ قَالَ إِبْرَاهِيمُ فَإِنَّ اللَّهَ يَأْتِي بِالشَّمْسِ مِنَ الْمَشْرِقِ فَأْتِ بِهَا مِنَ الْمَغْرِبِ فَبُهِتَ الَّذِي كَفَرَ ۗ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
(ऐ रसूल) क्या तुम ने उस शख्स (के हाल) पर नज़र नहीं की जो सिर्फ़ इस बिरते पर कि ख़ुदा ने उसे सल्तनत दी थी इब्राहीम से उनके परवरदिगार के बारे में उलझ पड़ा कि जब इब्राहीम ने (उससे) कहा कि मेरा परवरदिगार तो वह है जो (लोगों को) जिलाता और मारता है तो वो भी (शेख़ी में) आकर कहने लगा मैं भी जिलाता और मारता हूं (तुम्हारे ख़ुदा ही में कौन सा कमाल है) इब्राहीम ने कहा (अच्छा) खुदा तो आफ़ताब को पूरब से निकालता है भला तुम उसको पश्चिम से निकालो इस पर वह काफ़िर हक्का बक्का हो कर रह गया (मगर ईमान न लाया) और ख़ुदा ज़ालिमों को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुंचाया करता
259أَوْ كَالَّذِي مَرَّ عَلَىٰ قَرْيَةٍ وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا قَالَ أَنَّىٰ يُحْيِي هَٰذِهِ اللَّهُ بَعْدَ مَوْتِهَا ۖ فَأَمَاتَهُ اللَّهُ مِائَةَ عَامٍ ثُمَّ بَعَثَهُ ۖ قَالَ كَمْ لَبِثْتَ ۖ قَالَ لَبِثْتُ يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ ۖ قَالَ بَل لَّبِثْتَ مِائَةَ عَامٍ فَانظُرْ إِلَىٰ طَعَامِكَ وَشَرَابِكَ لَمْ يَتَسَنَّهْ ۖ وَانظُرْ إِلَىٰ حِمَارِكَ وَلِنَجْعَلَكَ آيَةً لِّلنَّاسِ ۖ وَانظُرْ إِلَى الْعِظَامِ كَيْفَ نُنشِزُهَا ثُمَّ نَكْسُوهَا لَحْمًا ۚ فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُ قَالَ أَعْلَمُ أَنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(ऐ रसूल तुमने) मसलन उस (बन्दे के हाल पर भी नज़र की जो एक गॉव पर से होकर गुज़रा और वो ऐसा उजड़ा था कि अपनी छतों पर से ढह के गिर पड़ा था ये देखकर वह बन्दा (कहने लगा) अल्लाह अब इस गॉव को ऐसी वीरानी के बाद क्योंकर आबाद करेगा इस पर ख़ुदा ने उसको (मार डाला) सौ बरस तक मुर्दा रखा फिर उसको जिला उठाया (तब) पूछा तुम कितनी देर पड़े रहे अर्ज क़ी एक दिन पड़ा रहा एक दिन से भी कम फ़रमाया नहीं तुम (इसी हालत में) सौ बरस पड़े रहे अब ज़रा अपने खाने पीने (की चीज़ों) को देखो कि बुसा तक नहीं और ज़रा अपने गधे (सवारी) को तो देखो कि उसकी हड्डियाँ ढेर पड़ी हैं और सब इस वास्ते किया है ताकि लोगों के लिये तुम्हें क़ुदरत का नमूना बनाये और अच्छा अब (इस गधे की) हड्डियों की तरफ़ नज़र करो कि हम क्योंकर जोड़ जाड़ कर ढाँचा बनाते हैं फिर उनपर गोश्त चढ़ाते हैं पस जब ये उनपर ज़ाहिर हुआ तो बेसाख्ता बोल उठे कि (अब) मैं ये यक़ीने कामिल जानता हूं कि ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
260وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ رَبِّ أَرِنِي كَيْفَ تُحْيِي الْمَوْتَىٰ ۖ قَالَ أَوَلَمْ تُؤْمِن ۖ قَالَ بَلَىٰ وَلَٰكِن لِّيَطْمَئِنَّ قَلْبِي ۖ قَالَ فَخُذْ أَرْبَعَةً مِّنَ الطَّيْرِ فَصُرْهُنَّ إِلَيْكَ ثُمَّ اجْعَلْ عَلَىٰ كُلِّ جَبَلٍ مِّنْهُنَّ جُزْءًا ثُمَّ ادْعُهُنَّ يَأْتِينَكَ سَعْيًا ۚ وَاعْلَمْ أَنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और (ऐ रसूल) वह वाकेया भी याद करो जब इबराहीम ने (खुदा से) दरख्वास्त की कि ऐ मेरे परवरदिगार तू मुझे भी तो दिखा दे कि तू मुर्दों को क्योंकर ज़िन्दा करता है ख़ुदा ने फ़रमाया क्या तुम्हें (इसका) यक़ीन नहीं इबराहीम ने अर्ज़ की (क्यों नहीं) यक़ीन तो है मगर ऑंख से देखना इसलिए चाहता हूं कि मेरे दिल को पूरा इत्मिनान हो जाए फ़रमाया (अगर ये चाहते हो) तो चार परिन्दे लो और उनको अपने पास मॅगवा लो और टुकड़े टुकड़े कर डालो फिर हर पहाड़ पर उनका एक एक टुकड़ा रख दो उसके बाद उनको बुलाओ (फिर देखो तो क्यों कर वह सब के सब तुम्हारे पास दौड़े हुए आते हैं और समझ रखो कि ख़ुदा बेशक ग़ालिब और हिकमत वाला है
261مَّثَلُ الَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ أَنبَتَتْ سَبْعَ سَنَابِلَ فِي كُلِّ سُنبُلَةٍ مِّائَةُ حَبَّةٍ ۗ وَاللَّهُ يُضَاعِفُ لِمَن يَشَاءُ ۗ وَاللَّهُ وَاسِعٌ عَلِيمٌ
जो लोग अपने माल खुदा की राह में खर्च करते हैं उनके (खर्च) की मिसाल उस दाने की सी मिसाल है जिसकी सात बालियॉ निकलें (और) हर बाली में सौ (सौ) दाने हों और ख़ुदा जिसके लिये चाहता है दूना कर देता है और खुदा बड़ी गुन्जाइश वाला (हर चीज़ से) वाक़िफ़ है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
259आयत

अनुवाद — अल-बकरा 259

सूरा अल-बकरा आयत 259 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल तुमने) मसलन उस (बन्दे के हाल पर भी…

सूरा आयत 259/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 257–261. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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