अल-हज · 18/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَسْجُدُ لَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُ وَالنُّجُومُ وَالْجِبَالُ وَالشَّجَرُ وَالدَّوَابُّ وَكَثِيرٌ مِّنَ النَّاسِ ۖ وَكَثِيرٌ حَقَّ عَلَيْهِ الْعَذَابُ ۗ وَمَن يُهِنِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن مُّكْرِمٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يَشَاءُ ۩ ۝١٨
Alam tara annal laaha yasjudu lahoo man fis samaawaati wa man fil ardi wash shamsu walqamaru wan nu joomu wal jibaalu wash shajaru wad dawaaabbu wa kaseerum minan naasi wa kaseerun haqqa `alaihil `azaab; wa mai yuhinil laahu famaa lahoo mim mukrim; innallaaha yaf`alu maa yashaaa
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुमने इसको भी नहीं देखा कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं और आफताब और माहताब और सितारे और पहाड़ और दरख्त और चारपाए (ग़रज़ कुल मख़लूक़ात) और आदमियों में से बहुत से लोग सब खुदा ही को सजदा करते हैं और बहुतेरे ऐसे भी हैं जिन पर नाफ़रमानी की वजह से अज़ाब का (का आना) लाज़िम हो चुका है और जिसको खुदा ज़लील करे फिर उसका कोई इज्ज़त देने वाला नहीं कुछ शक नहीं कि खुदा जो चाहता है करता है (18) सजदा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَلَمْ تَرَ: क्या तुमने नहीं देखा / क्या तुम्हें मालूम नहीं?
  • يَسْجُدُ لَهُ: उसके लिए सजदा करता है, उसके आगे झुकता है
  • الدَّوَابُّ: चलने-फिरने वाले जानवर
  • حَقَّ عَلَيْهِ الْعَذَابُ: उस पर अज़ाब (यातना) वाजिब हो गया
  • يُهِنِ: अपमानित करे, ज़लील करे
  • مُكْرِمٍ: इज़्ज़त देने वाला, सम्मानित करने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या तुमने नहीं देखा और क्या तुम्हें यह मालूम नहीं कि अल्लाह ही की बारगाह में सजदा करते हैं वे सब जो आसमानों में हैं — यानी फ़रिश्ते — और वे सब जो ज़मीन में हैं — यानी इंसान और जिन्नात में से मोमिनीन। सूरज, चाँद और सितारे भी उसी के आगे सजदे में हैं, पहाड़ भी उसी के सामने झुके हुए हैं, दरख़्त भी उसी की ताबेदारी में हैं, और ज़मीन पर चलने-फिरने वाले तमाम जानवर भी उसी के हुक्म के ताबे हैं। ये सब अपनी फ़ितरत के तौर पर अल्लाह के सामने सजदा करते हैं — यानी उसके हुक्म के आगे पूरी तरह बंदा हैं, उसकी तस्ख़ीर (अधीनता) में हैं।

और इंसानों में से बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपनी मर्ज़ी और इख़्तियार से, पूरी मुहब्बत और इताअत के साथ अल्लाह को सजदा करते हैं — ये मोमिनीन हैं। लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन पर अज़ाब वाजिब हो चुका है, क्योंकि उन्होंने अल्लाह के आगे सजदा करने से इनकार किया और उसकी इबादत से मुँह मोड़ा। ये काफ़िर और मुनकिर हैं।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: जिसे अल्लाह ज़लील कर दे — यानी अपनी बारगाह से दूर कर दे और उसकी क़िस्मत में रुसवाई लिख दे — तो उसे कोई इज़्ज़त देने वाला नहीं। कोई ताक़त, कोई सरदार, कोई हुकूमत उसे अल्लाह की ज़िल्लत से नहीं बचा सकती। क्योंकि इज़्ज़त और ज़िल्लत सब कुछ अल्लाह के हाथ में है। अल्लाह जो चाहता है वही करता है — वह जिसे चाहे इज़्ज़त दे, जिसे चाहे ज़िल्लत में डाल दे। उसके फ़ैसले के आगे किसी को कोई अख़्तियार नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस कायनात की हर चीज़ — सूरज, चाँद, सितारे, पहाड़, दरख़्त, जानवर — सब अल्लाह की ताबेदारी में हैं और उसी के आगे सजदे में हैं। यानी पूरी कायनात एक मुसलमान है, अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाए हुए है। सिर्फ़ इंसान को यह शरफ़ दिया गया है कि वह अपनी मर्ज़ी से, अपनी अक़्ल से, अपनी मुहब्बत से अल्लाह को सजदा करे। यह कितनी बड़ी नेमत है! जब पूरी कायनात ख़ामोशी से अल्लाह की इबादत कर रही है, तो हम इंसानों को भी चाहिए कि हम अपने रब के आगे झुकें, उसकी इबादत करें और उसके हुक्मों पर अमल करें। यही हमारी इज़्ज़त और कामयाबी का रास्ता है। जो अल्लाह के आगे झुक जाए, अल्लाह उसे सर बुलंद करता है; और जो अल्लाह से मुँह मोड़े, उसे दुनिया और आख़िरत में रुसवाई के सिवा कुछ नहीं मिलता।



📜 आयत 16-20 — अल-हज

16وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَاهُ آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ وَأَنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَن يُرِيدُ
(या नहीं) और हमने इस कुरान को यूँ ही वाजेए व रौशन निशानियाँ (बनाकर) नाज़िल किया और बेशक खुदा जिसकी चाहता है हिदायत करता है
17إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَالَّذِينَ هَادُوا وَالصَّابِئِينَ وَالنَّصَارَىٰ وَالْمَجُوسَ وَالَّذِينَ أَشْرَكُوا إِنَّ اللَّهَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया (मुसलमान) और यहूदी और लामज़हब लोग और ईसाई और मजूसी (आतिशपरस्त) और मुशरेकीन (कुफ्फ़ार) यक़ीनन खुदा उन लोगों के दरमियान क़यामत के दिन (ठीक ठीक) फ़ैसला कर देगा इसमें शक नहीं कि खुदा हर चीज़ को देख रहा है
18أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَسْجُدُ لَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُ وَالنُّجُومُ وَالْجِبَالُ وَالشَّجَرُ وَالدَّوَابُّ وَكَثِيرٌ مِّنَ النَّاسِ ۖ وَكَثِيرٌ حَقَّ عَلَيْهِ الْعَذَابُ ۗ وَمَن يُهِنِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن مُّكْرِمٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يَشَاءُ ۩
क्या तुमने इसको भी नहीं देखा कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं और आफताब और माहताब और सितारे और पहाड़ और दरख्त और चारपाए (ग़रज़ कुल मख़लूक़ात) और आदमियों में से बहुत से लोग सब खुदा ही को सजदा करते हैं और बहुतेरे ऐसे भी हैं जिन पर नाफ़रमानी की वजह से अज़ाब का (का आना) लाज़िम हो चुका है और जिसको खुदा ज़लील करे फिर उसका कोई इज्ज़त देने वाला नहीं कुछ शक नहीं कि खुदा जो चाहता है करता है (18) सजदा
19۞ هَٰذَانِ خَصْمَانِ اخْتَصَمُوا فِي رَبِّهِمْ ۖ فَالَّذِينَ كَفَرُوا قُطِّعَتْ لَهُمْ ثِيَابٌ مِّن نَّارٍ يُصَبُّ مِن فَوْقِ رُءُوسِهِمُ الْحَمِيمُ
ये दोनों (मोमिन व काफिर) दो फरीक़ हैं आपस में अपने परवरदिगार के बारे में लड़ते हैं ग़रज़ जो लोग काफ़िर हो बैठे उनके लिए तो आग के कपड़े केता किए गए हैं (वह उन्हें पहनाए जाएँगें और) उनके सरों पर खौलता हुआ पानी उँडेला जाएगा
20يُصْهَرُ بِهِ مَا فِي بُطُونِهِمْ وَالْجُلُودُ
जिस (की गर्मी) से जो कुछ उनके पेट में है (ऑंतें वग़ैरह) और खालें सब गल जाएँगी
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अनुवाद — अल-हज 18

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Tuesday, August 18, 2026

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