अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَلَمْ تَرَ: क्या तुमने नहीं देखा / क्या तुम्हें मालूम नहीं?
- يَسْجُدُ لَهُ: उसके लिए सजदा करता है, उसके आगे झुकता है
- الدَّوَابُّ: चलने-फिरने वाले जानवर
- حَقَّ عَلَيْهِ الْعَذَابُ: उस पर अज़ाब (यातना) वाजिब हो गया
- يُهِنِ: अपमानित करे, ज़लील करे
- مُكْرِمٍ: इज़्ज़त देने वाला, सम्मानित करने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! क्या तुमने नहीं देखा और क्या तुम्हें यह मालूम नहीं कि अल्लाह ही की बारगाह में सजदा करते हैं वे सब जो आसमानों में हैं — यानी फ़रिश्ते — और वे सब जो ज़मीन में हैं — यानी इंसान और जिन्नात में से मोमिनीन। सूरज, चाँद और सितारे भी उसी के आगे सजदे में हैं, पहाड़ भी उसी के सामने झुके हुए हैं, दरख़्त भी उसी की ताबेदारी में हैं, और ज़मीन पर चलने-फिरने वाले तमाम जानवर भी उसी के हुक्म के ताबे हैं। ये सब अपनी फ़ितरत के तौर पर अल्लाह के सामने सजदा करते हैं — यानी उसके हुक्म के आगे पूरी तरह बंदा हैं, उसकी तस्ख़ीर (अधीनता) में हैं।
और इंसानों में से बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपनी मर्ज़ी और इख़्तियार से, पूरी मुहब्बत और इताअत के साथ अल्लाह को सजदा करते हैं — ये मोमिनीन हैं। लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन पर अज़ाब वाजिब हो चुका है, क्योंकि उन्होंने अल्लाह के आगे सजदा करने से इनकार किया और उसकी इबादत से मुँह मोड़ा। ये काफ़िर और मुनकिर हैं।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: जिसे अल्लाह ज़लील कर दे — यानी अपनी बारगाह से दूर कर दे और उसकी क़िस्मत में रुसवाई लिख दे — तो उसे कोई इज़्ज़त देने वाला नहीं। कोई ताक़त, कोई सरदार, कोई हुकूमत उसे अल्लाह की ज़िल्लत से नहीं बचा सकती। क्योंकि इज़्ज़त और ज़िल्लत सब कुछ अल्लाह के हाथ में है। अल्लाह जो चाहता है वही करता है — वह जिसे चाहे इज़्ज़त दे, जिसे चाहे ज़िल्लत में डाल दे। उसके फ़ैसले के आगे किसी को कोई अख़्तियार नहीं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस कायनात की हर चीज़ — सूरज, चाँद, सितारे, पहाड़, दरख़्त, जानवर — सब अल्लाह की ताबेदारी में हैं और उसी के आगे सजदे में हैं। यानी पूरी कायनात एक मुसलमान है, अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाए हुए है। सिर्फ़ इंसान को यह शरफ़ दिया गया है कि वह अपनी मर्ज़ी से, अपनी अक़्ल से, अपनी मुहब्बत से अल्लाह को सजदा करे। यह कितनी बड़ी नेमत है! जब पूरी कायनात ख़ामोशी से अल्लाह की इबादत कर रही है, तो हम इंसानों को भी चाहिए कि हम अपने रब के आगे झुकें, उसकी इबादत करें और उसके हुक्मों पर अमल करें। यही हमारी इज़्ज़त और कामयाबी का रास्ता है। जो अल्लाह के आगे झुक जाए, अल्लाह उसे सर बुलंद करता है; और जो अल्लाह से मुँह मोड़े, उसे दुनिया और आख़िरत में रुसवाई के सिवा कुछ नहीं मिलता।
📜 आयत 16-20 — अल-हज
अनुवाद — अल-हज 18
सूरा अल-हज आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तुमने इसको भी नहीं देखा कि जो लोग आसमानों…सूरा आयत 18/78 — अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हज सुनें, अल-हज अनुवाद, अल-हज mp3, अल-हज pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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