अल-हज · 17/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَالَّذِينَ هَادُوا وَالصَّابِئِينَ وَالنَّصَارَىٰ وَالْمَجُوسَ وَالَّذِينَ أَشْرَكُوا إِنَّ اللَّهَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ ۝١٧
Innal lazeena aamanoo wallazeena haadoo was saabi`eena wan nasaaraa wal Majoosa wallazeena ashrakooo innal laaha yafsilu bainahum yawmal qiyaamah; innal laaha `alaa kulli shai`in shaheed
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया (मुसलमान) और यहूदी और लामज़हब लोग और ईसाई और मजूसी (आतिशपरस्त) और मुशरेकीन (कुफ्फ़ार) यक़ीनन खुदा उन लोगों के दरमियान क़यामत के दिन (ठीक ठीक) फ़ैसला कर देगा इसमें शक नहीं कि खुदा हर चीज़ को देख रहा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • हादू (هَادُوا): यहूदी, जो मूसा (अलैहिस्सलाम) की उम्मत थे।
  • साबिईन (الصَّابِئِينَ): वे लोग जो अपनी मूल प्रकृति पर बने रहे, न उनका कोई निश्चित धर्म था और न ही वे किसी पैगंबर की स्पष्ट शिक्षा के अनुयायी थे।
  • मजूस (الْمَجُوسِ): आग, सूर्य और चंद्रमा की पूजा करने वाले लोग।
  • अशरकू (أَشْرَكُوا): मूर्तियों और अन्य चीज़ों को अल्लाह का साझीदार बनाने वाले बहुदेववादी।
  • यफ़सिलु (يَفْصِلُ): न्याय करना, फैसला सुनाना, अलग करना।
  • शहीद (شَهِيد): हर चीज़ पर गवाह, जो सब कुछ देखता और जानता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि जो लोग ईमान लाए (यानी मुसलमान), और यहूदी, साबिईन, नसारा (ईसाई), मजूस (आग की पूजा करने वाले), और मुशरिकीन (मूर्ति पूजक) — इन सभी के बारे में अल्लाह क़ियामत के दिन फ़ैसला करेगा। वह दिन है जब सारे झूठ और सच का पर्दाफ़ाश होगा, और हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।

यह आयत बताती है कि अल्लाह ने इंसानों को अलग-अलग राहें दिखाईं, लेकिन सच्ची राह सिर्फ़ एक है — वह राह जो अल्लाह के आख़िरी रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) लेकर आए। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए, उनके लिए जन्नत है। और जिन्होंने अल्लाह के साथ किसी और की पूजा की, चाहे वह आग हो, मूर्ति हो, सूर्य हो या कोई और चीज़ — उनका ठिकाना जहन्नुम है।

अल्लाह ने यह भी फ़रमाया कि वह हर चीज़ पर शहीद (गवाह) है। यानी उसकी नज़र से कोई भी अच्छा या बुरा काम छिपा नहीं है। हर इंसान के दिल की नीयत, उसके अमल, उसकी बोली — सब कुछ अल्लाह के इल्म में है। वह क़ियामत के दिन हर एक को उसके किए के मुताबिक़ बदला देगा — नेकी का बदला नेकी से, और बुराई का बदला बुराई से।

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस राह पर चल रहे हैं। क्या हम उन लोगों में से हैं जिन्होंने अल्लाह की इबादत को खालिस कर लिया, या हम भी किसी न किसी रूप में शिर्क में मुब्तला हैं? आज का इंसान मूर्तियों की पूजा नहीं करता, लेकिन अपनी नफ़्स, अपनी दौलत, अपनी शोहरत, अपने ओहदे को ही सब कुछ मान लेता है — यह भी एक तरह का शिर्क है। अल्लाह हमें सच्चे ईमान की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में शामिल करे जिन्हें क़ियामत के दिन जन्नत की खुशखबरी मिलेगी। आमीन।



📜 आयत 15-19 — अल-हज

15مَن كَانَ يَظُنُّ أَن لَّن يَنصُرَهُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ فَلْيَمْدُدْ بِسَبَبٍ إِلَى السَّمَاءِ ثُمَّ لْيَقْطَعْ فَلْيَنظُرْ هَلْ يُذْهِبَنَّ كَيْدُهُ مَا يَغِيظُ
जो शख्स (गुस्से में) ये बदगुमानी करता है कि दुनिया और आख़ेरत में खुदा उसकी हरग़िज मदद न करेगा तो उसे चाहिए कि आसमान तक रस्सी ताने (और अपने गले में फाँसी डाल दे) फिर उसे काट दे (ताकि घुट कर मर जाए) फिर देखिए कि जो चीज़ उसे गुस्से में ला रही थी उसे उसकी तद्बीर दूर दफ़ा कर देती है
16وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَاهُ آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ وَأَنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَن يُرِيدُ
(या नहीं) और हमने इस कुरान को यूँ ही वाजेए व रौशन निशानियाँ (बनाकर) नाज़िल किया और बेशक खुदा जिसकी चाहता है हिदायत करता है
17إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَالَّذِينَ هَادُوا وَالصَّابِئِينَ وَالنَّصَارَىٰ وَالْمَجُوسَ وَالَّذِينَ أَشْرَكُوا إِنَّ اللَّهَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया (मुसलमान) और यहूदी और लामज़हब लोग और ईसाई और मजूसी (आतिशपरस्त) और मुशरेकीन (कुफ्फ़ार) यक़ीनन खुदा उन लोगों के दरमियान क़यामत के दिन (ठीक ठीक) फ़ैसला कर देगा इसमें शक नहीं कि खुदा हर चीज़ को देख रहा है
18أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَسْجُدُ لَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُ وَالنُّجُومُ وَالْجِبَالُ وَالشَّجَرُ وَالدَّوَابُّ وَكَثِيرٌ مِّنَ النَّاسِ ۖ وَكَثِيرٌ حَقَّ عَلَيْهِ الْعَذَابُ ۗ وَمَن يُهِنِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن مُّكْرِمٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يَشَاءُ ۩
क्या तुमने इसको भी नहीं देखा कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं और आफताब और माहताब और सितारे और पहाड़ और दरख्त और चारपाए (ग़रज़ कुल मख़लूक़ात) और आदमियों में से बहुत से लोग सब खुदा ही को सजदा करते हैं और बहुतेरे ऐसे भी हैं जिन पर नाफ़रमानी की वजह से अज़ाब का (का आना) लाज़िम हो चुका है और जिसको खुदा ज़लील करे फिर उसका कोई इज्ज़त देने वाला नहीं कुछ शक नहीं कि खुदा जो चाहता है करता है (18) सजदा
19۞ هَٰذَانِ خَصْمَانِ اخْتَصَمُوا فِي رَبِّهِمْ ۖ فَالَّذِينَ كَفَرُوا قُطِّعَتْ لَهُمْ ثِيَابٌ مِّن نَّارٍ يُصَبُّ مِن فَوْقِ رُءُوسِهِمُ الْحَمِيمُ
ये दोनों (मोमिन व काफिर) दो फरीक़ हैं आपस में अपने परवरदिगार के बारे में लड़ते हैं ग़रज़ जो लोग काफ़िर हो बैठे उनके लिए तो आग के कपड़े केता किए गए हैं (वह उन्हें पहनाए जाएँगें और) उनके सरों पर खौलता हुआ पानी उँडेला जाएगा
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अनुवाद — अल-हज 17

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Tuesday, August 18, 2026

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