अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ख़स्मान (خصمان): दो विरोधी गिरोह या दो झगड़ने वाले पक्ष।
- इख़्तसामू (اختصموا): उन्होंने आपस में झगड़ा किया, विवाद किया।
- क़ुत्ति'अत (قطعت): काटी गईं, तैयार की गईं (यहाँ अर्थ है उनके लिए बनाई गईं)।
- अल-हमीम (الحميم): वह पानी जो अत्यधिक गर्मी की अंतिम हद तक पहुँच चुका हो, खौलता हुआ पानी।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मुक़द्दस क़ुरआन उन दो गिरोहों का ज़िक्र कर रही है जो अपने रब के बारे में आपस में झगड़ते हैं — एक गिरोह ईमान वालों का है और दूसरा कुफ़्र वालों का। हर गिरोह यह दावा करता है कि वही सही है। यह झगड़ा केवल दुनिया की बातों पर नहीं, बल्कि अल्लाह के दीन, उसकी तौहीद, रिसालत और आख़िरत के मामले पर है। यही वह बुनियादी फ़र्क़ है जो इंसान को जन्नत या जहन्नम तक पहुँचाता है।
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके लिए आग के कपड़े काटे गए हैं। यानी उन्हें आग के ऐसे लिबास पहनाए जाएँगे जो उनके पूरे बदन को घेर लेंगे, ठीक जैसे कपड़ा इंसान के बदन को घेरता है। यह आग उनके जिस्म को झुलसा देगी। और उनके सरों के ऊपर से खौलता हुआ पानी डाला जाएगा — वह पानी जो गर्मी की अंतिम हद को पहुँच चुका होगा। यह पानी उनके सरों से लेकर उनके जिस्म में उतरेगा, उनके पेट की आंतों और अंदरूनी हिस्सों को पिघलाएगा, और फिर उनकी खाल को जला देगा। फ़रिश्ते उन्हें लोहे के हथौड़ों से मारेंगे। जब भी वे दर्द और तंगी की शिद्दत से जहन्नम से निकलना चाहेंगे, उन्हें वापस लौटा दिया जाएगा और कहा जाएगा: "चखो जलाने वाली आग का अज़ाब!"
यह अज़ाब उन लोगों के लिए है जिन्होंने अल्लाह के दीन को झुठलाया, उसके रसूलों की नाफ़रमानी की और हक़ के मुक़ाबले में बातिल को अपनाया। यह आयत हमारे लिए एक सख़्त तनबीह है कि हम अपने रब के साथ अपने रिश्ते को कभी कमज़ोर न पड़ने दें। ईमान वालों का अंजाम जन्नत है, और कुफ़्र वालों का अंजाम यह भयानक अज़ाब है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस गिरोह के साथ खड़े हैं। क्या हम उन लोगों में से हैं जो अल्लाह के दीन को अपनाते हैं, उसकी इबादत करते हैं और उसके रसूल ﷺ की पैरवी करते हैं? या हम उन लोगों में से हैं जो अल्लाह के हुक्मों से मुँह मोड़ते हैं? यह आयत हमें दुनिया की चंद रोज़ की ज़िंदगी के लिए आख़िरत की हमेशा की ज़िंदगी को खोने से बचाती है। अल्लाह ने हमें आगाह कर दिया है ताकि हम उसकी रहमत की तरफ लौटें। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की तरफ रुजू करेंगे, तौबा करेंगे और नेक अमल करेंगे, उनके लिए अल्लाह की रहमत और जन्नत के दरवाज़े खुले हैं। आइए हम उन लोगों में से बनें जो अल्लाह के हुक्मों को सुनकर उन पर अमल करते हैं, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से न हों जिनके लिए आग के कपड़े तैयार किए गए हैं।
📜 आयत 17-21 — अल-हज
अनुवाद — अल-हज 19
सूरा अल-हज आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये दोनों (मोमिन व काफिर) दो फरीक़ हैं आपस में…सूरा आयत 19/78 — अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हज सुनें, अल-हज अनुवाद, अल-हज mp3, अल-हज pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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