Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مُنِيبِينَ: अल्लाह की ओर रुजू करने वाले, तौबा करके उसकी ओर लौटने वाले।
- وَاتَّقُوهُ: उससे डरो, उसके आदेशों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो।
- أَقِيمُوا الصَّلَاةَ: नमाज़ को पूरे अदब, शर्तों और रुक्नों के साथ क़ायम करो।
- الْمُشْرِكِينَ: वे लोग जो अल्लाह के साथ किसी और को पूजते या उसकी इबादत में किसी को साझी बनाते हैं।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला अपने बंदों को नसीहत करता है कि वे उसकी ओर मुनीब हों, यानी पूरी तरह रुजू करें, अपने गुनाहों से तौबा करें और अपने आमाल को सिर्फ उसी के लिए खालिस करें। यह रुजू दिल की गहराई से होना चाहिए, सिर्फ ज़ुबान से नहीं। फिर उन्हें तक़वा (अल्लाह का डर) अपनाने का हुक्म दिया गया है, जिसका मतलब है कि उसके हुक्मों को पूरा किया जाए और उसकी मनाही से बचा जाए। तक़वा ही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से रोकती है और उसे अल्लाह के करीब लाती है।
इसके बाद अल्लाह ने नमाज़ क़ायम करने का हुक्म दिया, क्योंकि नमाज़ दीन का स्तंभ है और यही वह अमल है जो इंसान को बुराई और बेशर्मी से रोकती है। नमाज़ को सिर्फ पढ़ना ही नहीं, बल्कि उसे पूरी शर्तों, रुक्नों और खुशू-खुज़ू के साथ क़ायम करना है, ताकि उसका असर इंसान की ज़िंदगी पर पड़े।
फिर अल्लाह तआला ने साफ़ फरमाया: "और मुशरिकों में मत होना।" यानी शिर्क से बचो, क्योंकि शिर्क फितरत के खिलाफ है। हर इंसान फितरत पर पैदा होता है, लेकिन शिर्क उस फितरत को बिगाड़ देता है। मुशरिक वे लोग हैं जो अल्लाह के साथ दूसरों को उसकी इबादत में शामिल करते हैं, चाहे वह बुत हों, सितारे हों, या कोई और मख़लूक। यह हुक्म सिर्फ उस वक़्त के लिए नहीं, बल्कि हर ज़माने के लिए है — हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपने अक़ीदे को शिर्क से पाक रखे और सिर्फ अल्लाह ही की इबादत करे।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची कामयाबी तीन चीज़ों में है: अल्लाह की ओर रुजू करना, उसका डर रखना, और नमाज़ को क़ायम करना। और इन तीनों के साथ शिर्क से दूरी ज़रूरी है, क्योंकि शिर्क ही वह इकलौता गुनाह है जिसे अल्लाह माफ़ नहीं करता। अल्लाह हम सबको इन हिदायातों पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 29-33 — सूरा अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 31
सूरा अर-रूम आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसी की तरफ रुजू होकर (ख़ुदा की इबादत करो) और…सूरा आयत 31/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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