अर-रूम · 31/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
۞ مُنِيبِينَ إِلَيْهِ وَاتَّقُوهُ وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُشْرِكِينَ ۝٣١
Muneebeena ilaihi wattaqoohu wa aqeemus Salaata wa laa takoonoo minal mushrikeen
📖 हिंदी अर्थ
उसी की तरफ रुजू होकर (ख़ुदा की इबादत करो) और उसी से डरते रहो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और मुशरेकीन से न हो जाना

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مُنِيبِينَ: अल्लाह की ओर रुजू करने वाले, तौबा करके उसकी ओर लौटने वाले।
  • وَاتَّقُوهُ: उससे डरो, उसके आदेशों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो।
  • أَقِيمُوا الصَّلَاةَ: नमाज़ को पूरे अदब, शर्तों और रुक्नों के साथ क़ायम करो।
  • الْمُشْرِكِينَ: वे लोग जो अल्लाह के साथ किसी और को पूजते या उसकी इबादत में किसी को साझी बनाते हैं।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने बंदों को नसीहत करता है कि वे उसकी ओर मुनीब हों, यानी पूरी तरह रुजू करें, अपने गुनाहों से तौबा करें और अपने आमाल को सिर्फ उसी के लिए खालिस करें। यह रुजू दिल की गहराई से होना चाहिए, सिर्फ ज़ुबान से नहीं। फिर उन्हें तक़वा (अल्लाह का डर) अपनाने का हुक्म दिया गया है, जिसका मतलब है कि उसके हुक्मों को पूरा किया जाए और उसकी मनाही से बचा जाए। तक़वा ही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से रोकती है और उसे अल्लाह के करीब लाती है।

इसके बाद अल्लाह ने नमाज़ क़ायम करने का हुक्म दिया, क्योंकि नमाज़ दीन का स्तंभ है और यही वह अमल है जो इंसान को बुराई और बेशर्मी से रोकती है। नमाज़ को सिर्फ पढ़ना ही नहीं, बल्कि उसे पूरी शर्तों, रुक्नों और खुशू-खुज़ू के साथ क़ायम करना है, ताकि उसका असर इंसान की ज़िंदगी पर पड़े।

फिर अल्लाह तआला ने साफ़ फरमाया: "और मुशरिकों में मत होना।" यानी शिर्क से बचो, क्योंकि शिर्क फितरत के खिलाफ है। हर इंसान फितरत पर पैदा होता है, लेकिन शिर्क उस फितरत को बिगाड़ देता है। मुशरिक वे लोग हैं जो अल्लाह के साथ दूसरों को उसकी इबादत में शामिल करते हैं, चाहे वह बुत हों, सितारे हों, या कोई और मख़लूक। यह हुक्म सिर्फ उस वक़्त के लिए नहीं, बल्कि हर ज़माने के लिए है — हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपने अक़ीदे को शिर्क से पाक रखे और सिर्फ अल्लाह ही की इबादत करे।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची कामयाबी तीन चीज़ों में है: अल्लाह की ओर रुजू करना, उसका डर रखना, और नमाज़ को क़ायम करना। और इन तीनों के साथ शिर्क से दूरी ज़रूरी है, क्योंकि शिर्क ही वह इकलौता गुनाह है जिसे अल्लाह माफ़ नहीं करता। अल्लाह हम सबको इन हिदायातों पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 29-33 — अर-रूम

29بَلِ اتَّبَعَ الَّذِينَ ظَلَمُوا أَهْوَاءَهُم بِغَيْرِ عِلْمٍ ۖ فَمَن يَهْدِي مَنْ أَضَلَّ اللَّهُ ۖ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
मगर सरकशों ने तो बगैर समझे बूझे अपनी नफसियानी ख्वाहिशों की पैरवी कर ली (और ख़ुदा का शरीक ठहरा दिया) ग़रज़ ख़ुदा जिसे गुमराही में छोड़ दे (फिर) उसे कौन राहे रास्त पर ला सकता है और उनका कोई मददगार (भी) नहीं
30فَأَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفًا ۚ فِطْرَتَ اللَّهِ الَّتِي فَطَرَ النَّاسَ عَلَيْهَا ۚ لَا تَبْدِيلَ لِخَلْقِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ الدِّينُ الْقَيِّمُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम बातिल से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ किए रहो यही ख़ुदा की बनावट है जिस पर उसने लोगों को पैदा किया है ख़ुदा की (दुरुस्त की हुई) बनावट में तग़य्युर तबद्दुल (उलट फेर) नहीं हो सकता यही मज़बूत और (बिल्कुल सीधा) दीन है मगर बहुत से लोग नहीं जानते हैं
31۞ مُنِيبِينَ إِلَيْهِ وَاتَّقُوهُ وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُشْرِكِينَ
उसी की तरफ रुजू होकर (ख़ुदा की इबादत करो) और उसी से डरते रहो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और मुशरेकीन से न हो जाना
32مِنَ الَّذِينَ فَرَّقُوا دِينَهُمْ وَكَانُوا شِيَعًا ۖ كُلُّ حِزْبٍ بِمَا لَدَيْهِمْ فَرِحُونَ
जिन्होंने अपने (असली) दीन में तफरेक़ा परवाज़ी की और मुख्तलिफ़ फिरके क़े बन गए जो (दीन) जिस फिरके क़े पास है उसी में निहाल है
33وَإِذَا مَسَّ النَّاسَ ضُرٌّ دَعَوْا رَبَّهُم مُّنِيبِينَ إِلَيْهِ ثُمَّ إِذَا أَذَاقَهُم مِّنْهُ رَحْمَةً إِذَا فَرِيقٌ مِّنْهُم بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُونَ
और जब लोगों को कोई मुसीबत छू भी गयी तो उसी की तरफ रुजू होकर अपने परवरदिगार को पुकारने लगते हैं फिर जब वह अपनी रहमत की लज्ज़त चखा देता है तो उन्हीं में से कुछ लोग अपने परवरदिगार के साथ शिर्क करने लगते हैं
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीRevelation
31आयत

अनुवाद — अर-रूम 31

सूरा अर-रूम आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसी की तरफ रुजू होकर (ख़ुदा की इबादत करो) और…

सूरा आयत 31/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए