अर-रूम · 32/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रूम
مِنَ الَّذِينَ فَرَّقُوا دِينَهُمْ وَكَانُوا شِيَعًا ۖ كُلُّ حِزْبٍ بِمَا لَدَيْهِمْ فَرِحُونَ ۝٣٢
Minal lazeena farraqoo deenahum wa kaanoo shiya`an kullu hizbim bimaa ladaihim farihoon
📖 हिंदी अर्थ
जिन्होंने अपने (असली) दीन में तफरेक़ा परवाज़ी की और मुख्तलिफ़ फिरके क़े बन गए जो (दीन) जिस फिरके क़े पास है उसी में निहाल है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • फ़र्रक़ू दीनहुम: उन्होंने अपने धर्म को टुकड़े-टुकड़े कर दिया, यानी कुछ माना और कुछ छोड़ दिया।
  • शिय'अन: अलग-अलग फ़िरक़े और गुट।
  • हिज़्ब: गुट या दल।
  • फ़रिहून: खुश और मगरूर (अपनी बात पर इतराने वाले)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को साफ़-साफ़ चेतावनी दे रहा है कि वे उन लोगों में शामिल न हों जिन्होंने अपने दीन को तोड़-मरोड़ कर रख दिया। यानी वे लोग जिन्होंने अल्लाह के हुक्मों में से कुछ को माना और कुछ को छोड़ दिया, अपनी इच्छाओं और हवस के पीछे चलते हुए। वे अलग-अलग फ़िरक़ों और गुटों में बंट गए, हर गुट अपने रहनुमाओं और अपनी राय के पीछे चलने लगा। सबसे बड़ी बीमारी यह कि हर गुट अपनी बात को ही सही समझता है और दूसरों को गलत ठहराता है। वे अपनी इस हालत पर खुश और मगरूर हैं, यहाँ तक कि उन्हें यक़ीन है कि सिर्फ़ वही सच्चाई पर हैं और बाक़ी सब गुमराह हैं।

यह आयत उन लोगों की तरफ़ इशारा करती है जिन्होंने अल्लाह के दीन को बदल दिया, जैसे यहूद और नसारा, जिन्होंने अपनी किताबों के कुछ हिस्से पर अमल किया और कुछ को छोड़ दिया, और आपस में फ़िरक़ों में बंट गए। यही हाल उम्मत के उन लोगों का भी हो सकता है जो दीन में नई-नई बिदअतें निकालते हैं और अपनी राय को दीन पर तरजीह देते हैं।

अल्लाह तआला हमें इस आयत के ज़रिए सिखाता है कि दीन में इख़्तिलाफ़ और फ़िरक़ाबंदी सबसे बड़ी आफ़त है। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत को पकड़ें, और जो चीज़ें हमें अलग करती हैं उनसे बचें। हमें अपने दिलों को साफ़ रखना चाहिए और दूसरे मुसलमानों के लिए मुहब्बत रखनी चाहिए। याद रखें, जो लोग दीन में फूट डालते हैं, वे दुनिया में भी खुश नहीं रहते और आख़िरत में भी उनका अंजाम बुरा होगा। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें फ़िरक़ाबंदी से बचाए। आमीन।



📜 आयत 30-34 — सूरा अर-रूम

30فَأَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفًا ۚ فِطْرَتَ اللَّهِ الَّتِي فَطَرَ النَّاسَ عَلَيْهَا ۚ لَا تَبْدِيلَ لِخَلْقِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ الدِّينُ الْقَيِّمُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम बातिल से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ किए रहो यही ख़ुदा की बनावट है जिस पर उसने लोगों को पैदा किया है ख़ुदा की (दुरुस्त की हुई) बनावट में तग़य्युर तबद्दुल (उलट फेर) नहीं हो सकता यही मज़बूत और (बिल्कुल सीधा) दीन है मगर बहुत से लोग नहीं जानते हैं
31۞ مُنِيبِينَ إِلَيْهِ وَاتَّقُوهُ وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُشْرِكِينَ
उसी की तरफ रुजू होकर (ख़ुदा की इबादत करो) और उसी से डरते रहो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और मुशरेकीन से न हो जाना
32مِنَ الَّذِينَ فَرَّقُوا دِينَهُمْ وَكَانُوا شِيَعًا ۖ كُلُّ حِزْبٍ بِمَا لَدَيْهِمْ فَرِحُونَ
जिन्होंने अपने (असली) दीन में तफरेक़ा परवाज़ी की और मुख्तलिफ़ फिरके क़े बन गए जो (दीन) जिस फिरके क़े पास है उसी में निहाल है
33وَإِذَا مَسَّ النَّاسَ ضُرٌّ دَعَوْا رَبَّهُم مُّنِيبِينَ إِلَيْهِ ثُمَّ إِذَا أَذَاقَهُم مِّنْهُ رَحْمَةً إِذَا فَرِيقٌ مِّنْهُم بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُونَ
और जब लोगों को कोई मुसीबत छू भी गयी तो उसी की तरफ रुजू होकर अपने परवरदिगार को पुकारने लगते हैं फिर जब वह अपनी रहमत की लज्ज़त चखा देता है तो उन्हीं में से कुछ लोग अपने परवरदिगार के साथ शिर्क करने लगते हैं
34لِيَكْفُرُوا بِمَا آتَيْنَاهُمْ ۚ فَتَمَتَّعُوا فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
ताकि जो (नेअमत) हमने उन्हें दी है उसकी नाशुक्री करें ख़ैर (दुनिया में चन्दरोज़ चैन कर लो) फिर तो बहुत जल्द (अपने किए का मज़ा) तुम्हे मालूम ही होगा
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
32आयत

अनुवाद — अर-रूम 32

सूरा अर-रूम आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन्होंने अपने (असली) दीन में तफरेक़ा परवाज़ी की और मुख्तलिफ़…

सूरा आयत 32/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए