अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- फ़र्रक़ू दीनहुम: उन्होंने अपने धर्म को टुकड़े-टुकड़े कर दिया, यानी कुछ माना और कुछ छोड़ दिया।
- शिय'अन: अलग-अलग फ़िरक़े और गुट।
- हिज़्ब: गुट या दल।
- फ़रिहून: खुश और मगरूर (अपनी बात पर इतराने वाले)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को साफ़-साफ़ चेतावनी दे रहा है कि वे उन लोगों में शामिल न हों जिन्होंने अपने दीन को तोड़-मरोड़ कर रख दिया। यानी वे लोग जिन्होंने अल्लाह के हुक्मों में से कुछ को माना और कुछ को छोड़ दिया, अपनी इच्छाओं और हवस के पीछे चलते हुए। वे अलग-अलग फ़िरक़ों और गुटों में बंट गए, हर गुट अपने रहनुमाओं और अपनी राय के पीछे चलने लगा। सबसे बड़ी बीमारी यह कि हर गुट अपनी बात को ही सही समझता है और दूसरों को गलत ठहराता है। वे अपनी इस हालत पर खुश और मगरूर हैं, यहाँ तक कि उन्हें यक़ीन है कि सिर्फ़ वही सच्चाई पर हैं और बाक़ी सब गुमराह हैं।
यह आयत उन लोगों की तरफ़ इशारा करती है जिन्होंने अल्लाह के दीन को बदल दिया, जैसे यहूद और नसारा, जिन्होंने अपनी किताबों के कुछ हिस्से पर अमल किया और कुछ को छोड़ दिया, और आपस में फ़िरक़ों में बंट गए। यही हाल उम्मत के उन लोगों का भी हो सकता है जो दीन में नई-नई बिदअतें निकालते हैं और अपनी राय को दीन पर तरजीह देते हैं।
अल्लाह तआला हमें इस आयत के ज़रिए सिखाता है कि दीन में इख़्तिलाफ़ और फ़िरक़ाबंदी सबसे बड़ी आफ़त है। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत को पकड़ें, और जो चीज़ें हमें अलग करती हैं उनसे बचें। हमें अपने दिलों को साफ़ रखना चाहिए और दूसरे मुसलमानों के लिए मुहब्बत रखनी चाहिए। याद रखें, जो लोग दीन में फूट डालते हैं, वे दुनिया में भी खुश नहीं रहते और आख़िरत में भी उनका अंजाम बुरा होगा। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें फ़िरक़ाबंदी से बचाए। आमीन।
📜 आयत 30-34 — अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 32
सूरा अर-रूम आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन्होंने अपने (असली) दीन में तफरेक़ा परवाज़ी की और मुख्तलिफ़…सूरा आयत 32/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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