अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- हनीफ़न (حَنِيفًا): सभी झूठे धर्मों से हटकर एक सच्चे धर्म (इस्लाम) की ओर झुकने वाला।
- फ़ित्रत (فِطْرَتَ): वह मूल प्रकृति जिस पर अल्लाह ने इंसानों को पैदा किया है।
- क़य्यिम (الْقَيِّم): सीधा, स्थिर और अडिग धर्म जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं।
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप अपने चेहरे को पूरी तरह इस दीन (इस्लाम) की ओर मोड़ लें, और उस पर स्थिर रहें। यानी अपने आपको, अपनी नीयत को और अपने पूरे अस्तित्व को अल्लाह के उस दीन के लिए समर्पित कर दें, जो उसने आपके लिए चुना है। "हनीफ़न" का मतलब है कि आप हर झूठे और बिगाड़े हुए धर्म से मुँह मोड़कर सिर्फ अल्लाह के सच्चे दीन की तरफ झुक जाएँ। यही वह फ़ित्रत है जिस पर अल्लाह ने सभी इंसानों को पैदा किया है। हर इंसान पैदाइशी तौर पर इसी फ़ित्रत (तौहीद और अल्लाह की इबादत) पर होता है, लेकिन बाद में उसके माता-पिता और समाज उसे दूसरे रास्तों पर ले जाते हैं।
अल्लाह की बनाई हुई इस फ़ित्रत में कोई बदलाव नहीं हो सकता। यह अल्लाह की रचना है, और अल्लाह की रचना कभी बदलती नहीं। जिस तरह अल्लाह ने इंसान को दो आँखें, दो कान और एक दिल देकर पैदा किया है, उसी तरह उसने उसके दिल में अपनी पहचान और अपनी इबादत की फ़ित्रत भी डाल दी है। यही सीधा और स्थिर दीन है — यानी इस्लाम — जो इंसान को अल्लाह की रज़ा और जन्नत तक पहुँचाता है। इस दीन में कोई कमी नहीं, कोई टेढ़ापन नहीं, और न ही इसमें कोई बदलाव आ सकता है।
लेकिन अफ़सोस! अधिकतर लोग इस हक़ीक़त को नहीं जानते। वे अपनी अक्ल और अपनी ख्वाहिशों के पीछे चलते हैं, और उस सच्चे दीन से दूर हो जाते हैं जो उनकी अपनी फ़ित्रत में मौजूद है। अगर वे ज़रा सा भी ग़ौर करें, अपने दिल की आवाज़ सुनें, तो समझ जाएँ कि सच्चा रास्ता सिर्फ़ एक ही है — अल्लाह का रास्ता।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम कोई नया या अजनबी धर्म नहीं है, बल्कि यह हर इंसान की अपनी फ़ित्रत का धर्म है। जिस तरह एक बच्चा बिना किसी सिखाए अपनी माँ का दूध पीना जानता है, उसी तरह हर इंसान के दिल में अल्लाह की पहचान और उसकी इबादत की चाहत पहले से मौजूद है। इस्लाम क़बूल करना दरअसल अपनी असली फ़ित्रत की तरफ लौटना है। यही वह रास्ता है जो इंसान को सुकून, सच्ची खुशी और अल्लाह की रज़ा तक पहुँचाता है। आइए, हम अपने दिल की आवाज़ सुनें और उस सच्चे दीन को अपनाएँ जो हमारी अपनी फ़ित्रत में बसा है।
📜 आयत 28-32 — अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 30
सूरा अर-रूम आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (ऐ रसूल) तुम बातिल से कतरा के अपना रुख़…सूरा आयत 30/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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