फुस्सिलत · 3/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
كِتَابٌ فُصِّلَتْ آيَاتُهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ ۝٣
Kitaabun fussilat Aayaatuhoo Qur-aanan `Arabiyyal liqawminy ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
जिसकी आयतें समझदार लोगें के वास्ते तफ़सील से बयान कर दी गयीं हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فُصِّلَتْ: स्पष्ट किया गया, विस्तार से बयान किया गया।
  • قُرْآنًا عَرَبِيًّا: अरबी भाषा में उतारा गया क़ुरआन।
  • لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ: उन लोगों के लिए जो ज्ञान रखते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह क़ुरआन एक ऐसी किताब है जिसकी आयातों को पूर्ण स्पष्टता के साथ विस्तार से बयान किया गया है। इसकी हर आयत में अहकाम (आदेश), क़िस्से (कहानियाँ), और नसीहतें (शिक्षाएँ) इस तरह समझाई गई हैं कि उनमें कोई अस्पष्टता या उलझन नहीं। इसे अरबी भाषा में उतारा गया, ताकि यह उन लोगों के लिए सरल और सुगम हो जो अरबी भाषा को समझते हैं। यह किताब उन्हीं लोगों के लिए मार्गदर्शन और हिदायत का ज़रिया बनती है जो ज्ञान रखते हैं, क्योंकि वे इसकी आयात पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं और इसके माध्यम से सत्य तक पहुँचते हैं। जो लोग ज्ञान और समझ रखते हैं, वे इस किताब की आयात से लाभ उठाते हैं, क्योंकि यह उन्हें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है और उन्हें सीधे मार्ग पर चलने की तौफ़ीक़ देती है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने अपनी रहमत से यह किताब उतारी है, जो हर युग और हर स्थान के लिए हिदायत का स्रोत है। यह किताब किसी विशेष जाति या समूह के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए रहमत है। अरबी भाषा में उतारा जाना इसलिए था कि पहले संबोधन अरब समाज को किया जाए, लेकिन इसका पैग़ाम सार्वभौमिक है। आज हमें चाहिए कि हम इस किताब को समझें, इस पर अमल करें, और इसे दूसरों तक पहुँचाएँ। यह किताब हमारे लिए नूर (रोशनी) है, जो हमें जीवन के हर मोड़ पर सही रास्ता दिखाती है। जो लोग इसे पढ़ते हैं और इस पर अमल करते हैं, वे दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होते हैं।



📜 आयत 1-5 — सूरा फुस्सिलत

1حم
हा मीम
2تَنزِيلٌ مِّنَ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
(ये किताब) रहमान व रहीम ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुई है ये (वह) किताब अरबी क़ुरान है
3كِتَابٌ فُصِّلَتْ آيَاتُهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
जिसकी आयतें समझदार लोगें के वास्ते तफ़सील से बयान कर दी गयीं हैं
4بَشِيرًا وَنَذِيرًا فَأَعْرَضَ أَكْثَرُهُمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ
ं(नेको कारों को) ख़़ुशख़बरी देने वाली और (बदकारों को) डराने वाली है इस पर भी उनमें से अक्सर ने मुँह फेर लिया और वह सुनते ही नहीं
5وَقَالُوا قُلُوبُنَا فِي أَكِنَّةٍ مِّمَّا تَدْعُونَا إِلَيْهِ وَفِي آذَانِنَا وَقْرٌ وَمِن بَيْنِنَا وَبَيْنِكَ حِجَابٌ فَاعْمَلْ إِنَّنَا عَامِلُونَ
और कहने लगे जिस चीज़ की तरफ तुम हमें बुलाते हो उससे तो हमारे दिल पर्दों में हैं (कि दिल को नहीं लगती) और हमारे कानों में गिर्दानी (बहरापन है) कि कुछ सुनायी नहीं देता और हमारे तुम्हारे दरमियान एक पर्दा (हायल) है तो तुम (अपना) काम करो हम (अपना) काम करते हैं
फुस्सिलतकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 3

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Monday, September 28, 2026

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