फुस्सिलत · 2/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
تَنزِيلٌ مِّنَ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ ۝٢
Tanzeelum Minar-Rahmaanir-Raheem
📖 हिंदी अर्थ
(ये किताब) रहमान व रहीम ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुई है ये (वह) किताब अरबी क़ुरान है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • तन्ज़ील (تَنزِيلٌ): उतारा हुआ, भेजा हुआ। यहाँ अर्थ है कि यह कुरआन अल्लाह की ओर से उतारा गया है।
  • रहमान (الرَّحْمَٰنِ): अल्लाह का वह नाम जो उसकी असीम और सर्वव्यापी दया को दर्शाता है, जो सभी प्राणियों पर है।
  • रहीम (الرَّحِيمِ): अल्लाह का वह नाम जो उसकी विशेष और स्थायी दया को दर्शाता है, जो मोमिनों पर होती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह पवित्र कुरआन कोई मानव-रचित ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह उस अल्लाह की ओर से उतारा गया है जो रहमान और रहीम है। यानी वह परम दयालु है जिसकी रहमत का दामन सारी सृष्टि को ढाँपे हुए है, और वही अत्यंत कृपाशील है जो अपने बंदों पर विशेष दया करता है।

यह कुरआन उसी रहमान-ओ-रहीम की ओर से नाज़िल हुआ है, जिसने अपने प्यारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर इसे उतारा। यह किताब अपने साथ रहमत का पैगाम लेकर आई है — जो इसे पढ़े, समझे और उस पर अमल करे, उसके लिए यह दुनिया और आख़िरत की कामयाबी का ज़रिया है।

अल्लाह के ये दो नाम — रहमान और रहीम — हमें बताते हैं कि यह किताब किसी ग़ज़ब या अज़ाब की किताब नहीं, बल्कि रहमत और मेहरबानी की किताब है। यह इंसानों को अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर लाने वाली, उन्हें ज़िंदगी का सही रास्ता दिखाने वाली और उन्हें अल्लाह की रहमत के करीब लाने वाली किताब है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जिस किताब का नाज़िल करने वाला रहमान और रहीम हो, उसे हमें कितने प्यार और एहतिराम के साथ पढ़ना चाहिए। यह किताब हमारे लिए रहमत है, हिदायत है और रोशनी है। जो इसे थाम ले, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। अल्लाह की रहमत का यह खज़ाना हमारे सामने है — हमें चाहिए कि इसे खोलें, पढ़ें, समझें और अपनी ज़िंदगी को इसके अनुसार ढालें, ताकि हम भी उस रहमत के हक़दार बन सकें जो रहमान-ओ-रहीम ने अपने बंदों के लिए तैयार की है।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-4 — फुस्सिलत

1حم
हा मीम
2تَنزِيلٌ مِّنَ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
(ये किताब) रहमान व रहीम ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुई है ये (वह) किताब अरबी क़ुरान है
3كِتَابٌ فُصِّلَتْ آيَاتُهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
जिसकी आयतें समझदार लोगें के वास्ते तफ़सील से बयान कर दी गयीं हैं
4بَشِيرًا وَنَذِيرًا فَأَعْرَضَ أَكْثَرُهُمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ
ं(नेको कारों को) ख़़ुशख़बरी देने वाली और (बदकारों को) डराने वाली है इस पर भी उनमें से अक्सर ने मुँह फेर लिया और वह सुनते ही नहीं
फुस्सिलतकुरान सूची
54आयत
मक्कीRevelation
2आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 2

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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