फुस्सिलत · 4/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
بَشِيرًا وَنَذِيرًا فَأَعْرَضَ أَكْثَرُهُمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ ۝٤
Basheeranw wa nazeeran fa-a`rada aksaruhum fahum laa yasma`oon
📖 हिंदी अर्थ
ं(नेको कारों को) ख़़ुशख़बरी देने वाली और (बदकारों को) डराने वाली है इस पर भी उनमें से अक्सर ने मुँह फेर लिया और वह सुनते ही नहीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَشِيرًا: शुभ सूचना देने वाला (खुशखबरी सुनाने वाला)
  • نَذِيرًا: डराने वाला (चेतावनी देने वाला)
  • فَأَعْرَضَ: तो उसने मुँह मोड़ लिया (उससे विमुख हो गए)
  • لَا يَسْمَعُونَ: वे सुनते नहीं हैं (स्वीकार करने वाला कान नहीं लगाते)

विस्तृत तफ़सीर:

यह आयत उस महान कुरआन की विशेषता बयान कर रही है जिसे अल्लाह तआला ने अपने पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ पर उतारा। यह कुरआन दोहरे उद्देश्य के साथ आया है — एक ओर यह बशीर है, यानी उन लोगों के लिए खुशखबरी लेकर आया है जो ईमान लाते हैं, अच्छे कर्म करते हैं और इसकी शिक्षाओं पर अमल करते हैं। उनके लिए इस दुनिया में भी सुकून और सफलता है, और आख़िरत में भी अल्लाह ने उनके लिए जन्नत के ऐसे इनाम तैयार किए हैं जिनका कोई अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। दूसरी ओर यह नज़ीर है, यानी उन लोगों के लिए चेतावनी और डरावनी सूचना है जो इससे मुँह मोड़ते हैं, कुफ़्र और नाफ़रमानी पर डटे रहते हैं — उनके लिए दुनिया में भी अल्लाह की पकड़ है और आख़िरत में भी दर्दनाक अज़ाब तैयार है।

लेकिन अफ़सोस की बात है कि इस स्पष्ट और सच्ची किताब के बावजूद, अधिकांश लोगों ने इससे मुँह मोड़ लिया। उन्होंने न तो इसे ध्यान से सुना, न इस पर ग़ौर किया, और न ही इसे क़बूल करने की कोशिश की। वे ऐसे हैं जैसे बहरे हों — उनके कान हैं, लेकिन वे सुनते नहीं; उनके दिल हैं, लेकिन वे समझते नहीं। उनका सुनना सिर्फ़ ज़ाहिरी है, असली सुनना तो वह है जो दिल की गहराई तक उतर जाए और इंसान को सच्चाई की तरफ़ मोड़ दे। यही वह सुनना है जो इंसान के लिए निजात का ज़रिया बनता है।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी सीख है — हमें कुरआन को सिर्फ़ पढ़ना ही नहीं चाहिए, बल्कि उसे ध्यान से सुनना, उस पर ग़ौर करना और उसकी हिदायत को अपनी ज़िंदगी में अपनाना चाहिए। कुरआन हमारे लिए रहनुमा है, हमारी हर मुश्किल का हल है, और हमारे लिए दुनिया और आख़िरत की कामयाबी की कुंजी है। जो इसे क़बूल करेगा, वह कभी नाकाम नहीं हो सकता। अल्लाह तआला हम सबको कुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसकी बरकतों से लाभ उठाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 2-6 — सूरा फुस्सिलत

2تَنزِيلٌ مِّنَ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
(ये किताब) रहमान व रहीम ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुई है ये (वह) किताब अरबी क़ुरान है
3كِتَابٌ فُصِّلَتْ آيَاتُهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
जिसकी आयतें समझदार लोगें के वास्ते तफ़सील से बयान कर दी गयीं हैं
4بَشِيرًا وَنَذِيرًا فَأَعْرَضَ أَكْثَرُهُمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ
ं(नेको कारों को) ख़़ुशख़बरी देने वाली और (बदकारों को) डराने वाली है इस पर भी उनमें से अक्सर ने मुँह फेर लिया और वह सुनते ही नहीं
5وَقَالُوا قُلُوبُنَا فِي أَكِنَّةٍ مِّمَّا تَدْعُونَا إِلَيْهِ وَفِي آذَانِنَا وَقْرٌ وَمِن بَيْنِنَا وَبَيْنِكَ حِجَابٌ فَاعْمَلْ إِنَّنَا عَامِلُونَ
और कहने लगे जिस चीज़ की तरफ तुम हमें बुलाते हो उससे तो हमारे दिल पर्दों में हैं (कि दिल को नहीं लगती) और हमारे कानों में गिर्दानी (बहरापन है) कि कुछ सुनायी नहीं देता और हमारे तुम्हारे दरमियान एक पर्दा (हायल) है तो तुम (अपना) काम करो हम (अपना) काम करते हैं
6قُلْ إِنَّمَا أَنَا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰ إِلَيَّ أَنَّمَا إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ فَاسْتَقِيمُوا إِلَيْهِ وَاسْتَغْفِرُوهُ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْمُشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) कह दो कि मैं भी बस तुम्हारा ही सा आदमी हूँ (मगर फ़र्क ये है कि) मुझ पर 'वही' आती है कि तुम्हारा माबूद बस (वही) यकता ख़ुदा है तो सीधे उसकी तरफ मुतावज्जे रहो और उसी से बख़शिश की दुआ माँगो, और मुशरेकों पर अफसोस है
फुस्सिलतकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 4

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Monday, September 28, 2026

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