अल-जासिया · 8/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
يَسْمَعُ آيَاتِ اللَّهِ تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ثُمَّ يُصِرُّ مُسْتَكْبِرًا كَأَن لَّمْ يَسْمَعْهَا ۖ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ ۝٨
Yasma`u Aayaatil laahi tutlaa `alaihi summa yusirru mustakbiran ka-al lam yasma`haa fabashshirhu bi`azaabin aleem
📖 हिंदी अर्थ
कि ख़ुदा की आयतें उसके सामने पढ़ी जाती हैं और वह सुनता भी है फिर ग़ुरूर से (कुफ़्र पर) अड़ा रहता है गोया उसने उन आयतों को सुना ही नहीं तो (ऐ रसूल) तुम उसे दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آيَاتِ اللَّهِ: अल्लाह की आयतें (क़ुरआन की आयतें)
  • يُصِرُّ: अड़ जाता है, हठ करता है (अपने कुफ़्र और गुनाह पर)
  • مُسْتَكْبِرًا: घमंड करते हुए, अहंकार के साथ
  • كَأَن لَّمْ يَسْمَعْهَا: जैसे उसने उन्हें सुना ही न हो
  • فَبَشِّرْهُ: तो उसे ख़ुशख़बरी दो (व्यंग्य के रूप में, यानी उसे डराओ)
  • عَذَابٍ أَلِيمٍ: दर्दनाक (बहुत तकलीफ़ देने वाला) अज़ाब

तफ़सीर:

यह आयत उस बदक़िस्मत इंसान की स्थिति बयान करती है जो अल्लाह की आयतों को सुनता है, लेकिन उसके दिल पर उनका कोई असर नहीं होता। वह अल्लाह की किताब की आयतें पढ़ी जाने पर सुनता है, फिर भी अपने कुफ़्र और गुनाहों पर अड़ा रहता है। वह अहंकार और घमंड के साथ सच्चाई को क़बूल करने से इनकार करता है, ऐसा लगता है जैसे उसने उन आयतों को सुना ही नहीं। उसका यह रवैया दिखाता है कि उसका दिल मुहरबंद हो चुका है और वह हिदायत से महरूम है।

अल्लाह तआला इस आयत में फ़रमाता है कि ऐ नबी! ऐसे इंसान को उस अज़ाब की ख़ुशख़बरी (यानी डरावनी सूचना) दे दो जो बेहद दर्दनाक और तकलीफ़देह होगा। यहाँ "ख़ुशख़बरी" शब्द व्यंग्य (तहक़ीर) के रूप में इस्तेमाल हुआ है, क्योंकि असल में यह उसके लिए बुरी ख़बर है — जहन्नम की आग का अज़ाब, जो क़यामत के दिन उसे मिलेगा।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ सिखाती है: अल्लाह की आयतों को सुनना और उन पर अमल न करना, उन्हें सुनकर भी घमंड से मुँह मोड़ लेना, बहुत बड़ा गुनाह है। जो इंसान क़ुरआन सुनता है और फिर भी अपनी ज़िद और अहंकार पर अड़ा रहता है, वह अपने आपको अल्लाह के ग़ज़ब का हक़दार बना लेता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि जब भी क़ुरआन की आयतें सुनें, तो उन्हें दिल से सुनें, उन पर ग़ौर करें और उन पर अमल करने की कोशिश करें। अल्लाह की आयतें हमारे लिए रहमत और हिदायत हैं। जो इन्हें सुनकर भी अहंकार करता है, वह सिर्फ़ अपना नुक़सान करता है। अल्लाह तआला हम सबको क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसके पैग़ाम को अपनी ज़िंदगी में उतारने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 6-10 — अल-जासिया

6تِلْكَ آيَاتُ اللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّ ۖ فَبِأَيِّ حَدِيثٍ بَعْدَ اللَّهِ وَآيَاتِهِ يُؤْمِنُونَ
ये ख़ुदा की आयतें हैं जिनको हम ठीक (ठीक) तुम्हारे सामने पढ़ते हैं तो ख़ुदा और उसकी आयतों के बाद कौन सी बात होगी
7وَيْلٌ لِّكُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍ
जिस पर ये लोग ईमान लाएंगे हर झूठे गुनाहगार पर अफसोस है
8يَسْمَعُ آيَاتِ اللَّهِ تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ثُمَّ يُصِرُّ مُسْتَكْبِرًا كَأَن لَّمْ يَسْمَعْهَا ۖ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
कि ख़ुदा की आयतें उसके सामने पढ़ी जाती हैं और वह सुनता भी है फिर ग़ुरूर से (कुफ़्र पर) अड़ा रहता है गोया उसने उन आयतों को सुना ही नहीं तो (ऐ रसूल) तुम उसे दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो
9وَإِذَا عَلِمَ مِنْ آيَاتِنَا شَيْئًا اتَّخَذَهَا هُزُوًا ۚ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और जब हमारी आयतों में से किसी आयत पर वाक़िफ़ हो जाता है तो उसकी हँसी उड़ाता है ऐसे ही लोगों के वास्ते ज़लील करने वाला अज़ाब है
10مِّن وَرَائِهِمْ جَهَنَّمُ ۖ وَلَا يُغْنِي عَنْهُم مَّا كَسَبُوا شَيْئًا وَلَا مَا اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ أَوْلِيَاءَ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
जहन्नुम तो उनके पीछे ही (पीछे) है और जो कुछ वह आमाल करते रहे न तो वही उनके कुछ काम आएँगे और न जिनको उन्होंने ख़ुदा को छोड़कर (अपने) सरपरस्त बनाए थे और उनके लिए बड़ा (सख्त) अज़ाब है
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीRevelation
8आयत

अनुवाद — अल-जासिया 8

सूरा अल-जासिया आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि ख़ुदा की आयतें उसके सामने पढ़ी जाती हैं और…

सूरा आयत 8/37 — अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जासिया सुनें, अल-जासिया अनुवाद, अल-जासिया mp3, अल-जासिया pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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