अल-जासिया · 7/37
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-जासिया
وَيْلٌ لِّكُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍ ۝٧
Wailul likulli affaakin aseem
📖 हिंदी अर्थ
जिस पर ये लोग ईमान लाएंगे हर झूठे गुनाहगार पर अफसोस है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • वैल (وَيْلٌ): विनाश, हलाकी और सख्त अज़ाब।
  • अफ़्फ़ाक (أَفَّاكٍ): बहुत झूठ बोलने वाला, झूठ का आदी।
  • असीम (أَثِيمٍ): बहुत गुनाह करने वाला, पापों में डूबा हुआ।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने उन लोगों के लिए सख्त चेतावनी और विनाश की घोषणा की है जो झूठ बोलने में माहिर हैं और लगातार गुनाहों में डूबे रहते हैं। यहाँ "वैल" का अर्थ है सख्त अज़ाब और बर्बादी, जो ऐसे लोगों के लिए तैयार है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं, सच्चाई को छिपाते हैं और अपनी ज़ुबान से झूठ फैलाते हैं। यह चेतावनी उन लोगों के लिए है जो न सिर्फ़ खुद झूठ बोलते हैं बल्कि दूसरों को भी गुमराह करते हैं।

यह आयत उस व्यक्ति के बारे में भी आई है जो नबी करीम ﷺ के खिलाफ़ झूठ फैलाता था और लोगों को सच्चाई से दूर करने की कोशिश करता था। यह हर उस इंसान के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो झूठ को अपनी आदत बना लेता है और गुनाहों में लिप्त रहता है। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह की तरफ़ से सिर्फ़ विनाश और दंड है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि झूठ और गुनाह इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देते हैं। एक मुसलमान को चाहिए कि वह हमेशा सच बोले, क्योंकि सच्चाई इंसान को नेकी की तरफ़ ले जाती है और नेकी जन्नत की तरफ़। अल्लाह तआला सच्चे और नेक लोगों से मुहब्बत करता है और उन्हें इस दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी। इसलिए हमें झूठ और गुनाहों से बचना चाहिए और अपनी ज़ुबान को सच्चाई और अच्छी बातों के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। याद रखें, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत वसीअ है। जो लोग तौबा कर लें, अल्लाह उन्हें माफ़ कर देता है और उनके गुनाहों को नेकियों से बदल देता है।



📜 आयत 5-9 — सूरा अल-जासिया

5وَاخْتِلَافِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَمَا أَنزَلَ اللَّهُ مِنَ السَّمَاءِ مِن رِّزْقٍ فَأَحْيَا بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا وَتَصْرِيفِ الرِّيَاحِ آيَاتٌ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और रात दिन के आने जाने में और ख़ुदा ने आसमान से जो (ज़रिया) रिज़क (पानी) नाज़िल फरमाया फिर उससे ज़मीन को उसके मर जाने के बाद ज़िन्दा किया (उसमें) और हवाओं फेर बदल में अक्लमन्द लोगों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
6تِلْكَ آيَاتُ اللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّ ۖ فَبِأَيِّ حَدِيثٍ بَعْدَ اللَّهِ وَآيَاتِهِ يُؤْمِنُونَ
ये ख़ुदा की आयतें हैं जिनको हम ठीक (ठीक) तुम्हारे सामने पढ़ते हैं तो ख़ुदा और उसकी आयतों के बाद कौन सी बात होगी
7وَيْلٌ لِّكُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍ
जिस पर ये लोग ईमान लाएंगे हर झूठे गुनाहगार पर अफसोस है
8يَسْمَعُ آيَاتِ اللَّهِ تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ثُمَّ يُصِرُّ مُسْتَكْبِرًا كَأَن لَّمْ يَسْمَعْهَا ۖ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
कि ख़ुदा की आयतें उसके सामने पढ़ी जाती हैं और वह सुनता भी है फिर ग़ुरूर से (कुफ़्र पर) अड़ा रहता है गोया उसने उन आयतों को सुना ही नहीं तो (ऐ रसूल) तुम उसे दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो
9وَإِذَا عَلِمَ مِنْ آيَاتِنَا شَيْئًا اتَّخَذَهَا هُزُوًا ۚ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और जब हमारी आयतों में से किसी आयत पर वाक़िफ़ हो जाता है तो उसकी हँसी उड़ाता है ऐसे ही लोगों के वास्ते ज़लील करने वाला अज़ाब है
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अल-जासिया 7

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Monday, September 28, 2026

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