अल-अनफाल · 42/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
إِذْ أَنتُم بِالْعُدْوَةِ الدُّنْيَا وَهُم بِالْعُدْوَةِ الْقُصْوَىٰ وَالرَّكْبُ أَسْفَلَ مِنكُمْ ۚ وَلَوْ تَوَاعَدتُّمْ لَاخْتَلَفْتُمْ فِي الْمِيعَادِ ۙ وَلَٰكِن لِّيَقْضِيَ اللَّهُ أَمْرًا كَانَ مَفْعُولًا لِّيَهْلِكَ مَنْ هَلَكَ عَن بَيِّنَةٍ وَيَحْيَىٰ مَنْ حَيَّ عَن بَيِّنَةٍ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَسَمِيعٌ عَلِيمٌ ۝٤٢
Iz antum bil`udwatid dunyaa wa hum bil`udwatil quswaa warrakbu asfala minkum; wa law tawaa`attum lakhtalaftum fil mee`aadi wa laakil liyaqdiyal laahu amran kaana maf`oolal liyahlika man halaka `am baiyinatinw wa yahyaa man haiya `am baiyinah; wa innal laaha la Samee`un `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
(ये वह वक्त था) जब तुम (मैदाने जंग में मदीने के) क़रीब नाके पर थे और वह कुफ्फ़ार बईद (दूर के) के नाके पर और (काफ़िले के) सवार तुम से नशेब में थे और अगर तुम एक दूसरे से (वक्त क़ी तक़रीर का) वायदा कर लेते हो तो और वक्त पर गड़बड़ कर देते मगर (ख़ुदा ने अचानक तुम लोगों को इकट्ठा कर दिया ताकि जो बात यदनी (होनी) थी वह पूरी कर दिखाए ताकि जो शख़्स हलाक (गुमराह) हो वह (हक़ की) हुज्जत तमाम होने के बाद हलाक हो और जो ज़िन्दा रहे वह हिदायत की हुज्जत तमाम होने के बाद ज़िन्दा रहे और ख़ुदा यक़ीनी सुनने वाला ख़बरदार है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْعُدْوَةِ الدُّنْيَا: घाटी का वह किनारा जो मदीना की ओर निकटतम था।
  • الْعُدْوَةِ الْقُصْوَى: घाटी का वह दूर वाला किनारा जो मक्का की ओर था।
  • الرَّكْب: क़ाफ़िला (यहाँ अबू सुफ़यान और उसके साथियों का क़ाफ़िला, जो व्यापारिक सामान लेकर जा रहा था)।
  • الْمِيعَاد: नियत समय या वादे का समय।
  • بَيِّنَة: स्पष्ट प्रमाण, खुला हुआ तर्क या हुज्जत।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने बद्र के मैदान में मुसलमानों की उस अजीबोग़रीब स्थिति को याद दिलाया, जब आप लोग घाटी के उस किनारे पर थे जो मदीना के करीब था, और कुफ़्फ़ार का लश्कर घाटी के दूसरे किनारे पर था जो मक्का की तरफ़ था। व्यापारिक क़ाफ़िला (अबू सुफ़यान का) तुमसे नीचे समुद्र तट की ओर था। यदि तुम आपस में पहले से कोई वादा या समय तय करके मिलते, तो निश्चित रूप से तुम लोग अपने वादे के समय में मतभेद करते और एक-दूसरे से न मिल पाते। लेकिन अल्लाह ने तुम्हें बिना किसी पूर्व नियोजन के बद्र में एकत्र कर दिया, ताकि वह अपना वह फ़ैसला पूरा करे जो उसने पहले ही लिख दिया था — यानी अपने वफ़ादार बंदों की मदद करना, दीन को ग़ालिब बनाना और कुफ़्फ़ार को ज़लील करना, उन्हें क़त्ल और क़ैद का मज़ा चखाना। यह सब इसलिए हुआ ताकि जो हलाक हो (यानी कुफ़्र पर मरे) वह स्पष्ट प्रमाण और हुज्जत के बाद मरे, और जो ज़िंदा रहे (यानी ईमान पर क़ायम रहे) वह भी स्पष्ट प्रमाण और हुज्जत के साथ जिए। बद्र का यह नज़ारा — मुसलमानों की कम संख्या और कम साज़ो-सामान के बावजूद उनकी जीत — एक खुला हुआ प्रमाण था कि यह अल्लाह ही की तरफ़ से है। अल्लाह सब कुछ सुनने वाला और हर नीयत को जानने वाला है; उससे कोई बात छिपी नहीं है, और वह हर किसी को उसके कर्मों का बदला देगा।


फ़ायदे:

  1. अल्लाह की क़ुदरत और उसके फ़ैसले की अजीबोग़रीब तदबीर पर भरोसा करना चाहिए। इंसान की तदबीरें कभी-कभी नाकाम हो जाती हैं, लेकिन अल्लाह का इरादा हर हाल में पूरा होकर रहता है।
  2. मुसलमानों को चाहिए कि वे अपनी कम संख्या और कम साज़ो-सामान से घबराएँ नहीं, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि जीत अल्लाह की तरफ़ से होती है।
  3. बद्र की जंग एक ऐतिहासिक सबक़ है कि सच्चाई और ईमान की ताक़त बाहरी साधनों से बड़ी होती है। यह हर ज़माने के मुसलमानों के लिए हौसला और हिम्मत का स्रोत है।
  4. अल्लाह की सुनने और जानने की सिफ़ात हमें यह सिखाती हैं कि हमारी हर बात और हर नीयत उसके सामने है, इसलिए हमें अपने अंदर और बाहर दोनों को सही रखना चाहिए।
  5. यह आयत बताती है कि अल्लाह अपने बंदों पर हुज्जत क़ायम करने के बाद ही उन्हें सज़ा या इनाम देता है, ताकि किसी को शिकायत की गुंजाइश न रहे। यह अल्लाह की रहमत और अद्ल की निशानी है।
🎧 सुनें

📜 आयत 40-44 — अल-अनफाल

40وَإِن تَوَلَّوْا فَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ مَوْلَاكُمْ ۚ نِعْمَ الْمَوْلَىٰ وَنِعْمَ النَّصِيرُ
और अगर सरताबी करें तो (मुसलमानों) समझ लो कि ख़ुदा यक़ीनी तुम्हारा मालिक है और वह क्या अच्छा मालिक है और क्या अच्छा मददगार है
41۞ وَاعْلَمُوا أَنَّمَا غَنِمْتُم مِّن شَيْءٍ فَأَنَّ لِلَّهِ خُمُسَهُ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينِ وَابْنِ السَّبِيلِ إِن كُنتُمْ آمَنتُم بِاللَّهِ وَمَا أَنزَلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا يَوْمَ الْفُرْقَانِ يَوْمَ الْتَقَى الْجَمْعَانِ ۗ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और जान लो कि जो कुछ तुम (माल लड़कर) लूटो तो उनमें का पॉचवॉ हिस्सा मख़सूस ख़ुदा और रसूल और (रसूल के) क़राबतदारों और यतीमों और मिस्कीनों और परदेसियों का है अगर तुम ख़ुदा पर और उस (ग़ैबी इमदाद) पर ईमान ला चुके हो जो हमने ख़ास बन्दे (मोहम्मद) पर फ़ैसले के दिन (जंग बदर में) नाज़िल की थी जिस दिन (मुसलमानों और काफिरों की) दो जमाअतें बाहम गुथ गयी थी और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
42إِذْ أَنتُم بِالْعُدْوَةِ الدُّنْيَا وَهُم بِالْعُدْوَةِ الْقُصْوَىٰ وَالرَّكْبُ أَسْفَلَ مِنكُمْ ۚ وَلَوْ تَوَاعَدتُّمْ لَاخْتَلَفْتُمْ فِي الْمِيعَادِ ۙ وَلَٰكِن لِّيَقْضِيَ اللَّهُ أَمْرًا كَانَ مَفْعُولًا لِّيَهْلِكَ مَنْ هَلَكَ عَن بَيِّنَةٍ وَيَحْيَىٰ مَنْ حَيَّ عَن بَيِّنَةٍ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَسَمِيعٌ عَلِيمٌ
(ये वह वक्त था) जब तुम (मैदाने जंग में मदीने के) क़रीब नाके पर थे और वह कुफ्फ़ार बईद (दूर के) के नाके पर और (काफ़िले के) सवार तुम से नशेब में थे और अगर तुम एक दूसरे से (वक्त क़ी तक़रीर का) वायदा कर लेते हो तो और वक्त पर गड़बड़ कर देते मगर (ख़ुदा ने अचानक तुम लोगों को इकट्ठा कर दिया ताकि जो बात यदनी (होनी) थी वह पूरी कर दिखाए ताकि जो शख़्स हलाक (गुमराह) हो वह (हक़ की) हुज्जत तमाम होने के बाद हलाक हो और जो ज़िन्दा रहे वह हिदायत की हुज्जत तमाम होने के बाद ज़िन्दा रहे और ख़ुदा यक़ीनी सुनने वाला ख़बरदार है
43إِذْ يُرِيكَهُمُ اللَّهُ فِي مَنَامِكَ قَلِيلًا ۖ وَلَوْ أَرَاكَهُمْ كَثِيرًا لَّفَشِلْتُمْ وَلَتَنَازَعْتُمْ فِي الْأَمْرِ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ سَلَّمَ ۗ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
(ये वह वक्त था) जब ख़ुदा ने तुम्हें ख्वाब में कुफ्फ़ार को कम करके दिखलाया था और अगर उनको तुम्हें ज्यादा करते दिखलाता तुम यक़ीनन हिम्मत हार देते और लड़ाई के बारे में झगड़ने लगते मगर ख़ुदा ने इसे (बदनामी) से बचाया इसमें तो शक़ ही नहीं कि वह दिली ख्यालात से वाक़िफ़ है
44وَإِذْ يُرِيكُمُوهُمْ إِذِ الْتَقَيْتُمْ فِي أَعْيُنِكُمْ قَلِيلًا وَيُقَلِّلُكُمْ فِي أَعْيُنِهِمْ لِيَقْضِيَ اللَّهُ أَمْرًا كَانَ مَفْعُولًا ۗ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
(ये वह वक्त था) जब तुम लोगों ने मुठभेड़ की तो ख़ुदा ने तुम्हारी ऑखों में कुफ्फ़ार को बहुत कम करके दिखलाया और उनकी ऑखों में तुमको थोड़ा कर दिया ताकि ख़ुदा को जो कुछ करना मंज़ूर था वह पूरा हो जाए और कुल बातों का दारोमदार तो ख़ुदा ही पर है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
42आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 42

सूरा अल-अनफाल आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये वह वक्त था) जब तुम (मैदाने जंग में मदीने…

सूरा आयत 42/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए