Iz yureekahumul laahu fee manaamika qaleela; wa law araakahum kaseeral lafashiltum wa latanaaza`tum fil amri wa laakinnal laaha sallam; innahoo `aleemum bizaatis sudoor
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ये वह वक्त था) जब ख़ुदा ने तुम्हें ख्वाब में कुफ्फ़ार को कम करके दिखलाया था और अगर उनको तुम्हें ज्यादा करते दिखलाता तुम यक़ीनन हिम्मत हार देते और लड़ाई के बारे में झगड़ने लगते मगर ख़ुदा ने इसे (बदनामी) से बचाया इसमें तो शक़ ही नहीं कि वह दिली ख्यालात से वाक़िफ़ है
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
اس وقت خدا نے تمہیں خواب میں کافروں کو تھوڑی تعداد میں دکھایا۔ اور اگر بہت کر کے دکھاتا تو تم لوگ جی چھوڑ دیتے اور (جو) کام (درپیش تھا اس) میں جھگڑنے لگتے لیکن خدا نے (تمہیں اس سے) بچا لیا۔ بےشک وہ سینوں کی باتوں تک سے واقف ہے
तनाज़'अतुम (تنازعتم): आपस में मतभेद और झगड़ा करते।
सल्लम (سلّم): बचा लिया, सुरक्षित रखा।
ज़ातिस सुदूर (ذات الصدور): दिलों के भेद, वह सब जो सीनों में छिपा है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! उस समय को याद करो जब अल्लाह ने तुम्हें स्वप्न में दुश्मनों की संख्या बहुत कम दिखाई थी। यह अल्लाह की ओर से एक बड़ी कृपा थी, क्योंकि जब तुमने मुसलमानों को बताया कि दुश्मन की फ़ौज कम है, तो उनके दिल मज़बूत हुए और वे युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हो गए। उनके सीने में जोश और हिम्मत पैदा हो गई।
लेकिन अगर अल्लाह तुम्हें स्वप्न में दुश्मनों की भारी तादाद दिखा देता, तो तुम्हारे साथी डर जाते, उनके हौसले पस्त हो जाते, और वे आपस में इस बात पर झगड़ने लगते कि लड़ना चाहिए या नहीं। यही वजह है कि अल्लाह ने अपनी रहमत से तुम्हें दुश्मन कम दिखाए, ताकि तुम्हारे दिल जुटे रहें और तुम एकजुट होकर दुश्मन का मुक़ाबला कर सको। अल्लाह ने तुम्हें इस फिटने से बचा लिया।
बेशक अल्लाह उन सब बातों को जानता है जो दिलों में छिपी होती हैं — चाहे वह बहादुरी हो या कायरता, सब्र हो या बेचैनी। वह हर दिल के हाल से पूरी तरह वाक़िफ़ है और अपनी हिकमत से वही करता है जो उसके बंदों के लिए बेहतर होता है।
फ़ायदे (सबक):
अल्लाह अपने नबी और मोमिनों पर ऐसे अनगिनत एहसान करता है जिनका अंदाज़ा हमें हमेशा नहीं होता। उसकी निगरानी और मदद हर कदम पर हमारे साथ होती है।
दुश्मन की ताक़त का अंदाज़ा लगाने में अल्लाह की मदद माँगनी चाहिए, क्योंकि सही जानकारी ही सही फ़ैसले की बुनियाद है।
अल्लाह अपने बंदों की कमज़ोरियों को जानता है और उन्हीं के मुताबिक अपनी तदबीर करता है — यह उसकी रहमत और हिकमत की निशानी है।
मुसलमानों को चाहिए कि वे आपसी इत्तिफ़ाक़ और एकता को क़ायम रखें, क्योंकि फूट और झगड़ा ही असली कमज़ोरी है।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखें और उसके फ़ैसलों पर राज़ी रहें — वही जानता है कि कब क्या करना हमारे लिए बेहतर है।
(ये वह वक्त था) जब ख़ुदा ने तुम्हें ख्वाब में कुफ्फ़ार को कम करके दिखलाया था और अगर उनको तुम्हें ज्यादा करते दिखलाता तुम यक़ीनन हिम्मत हार देते और लड़ाई के बारे में झगड़ने लगते मगर ख़ुदा ने इसे (बदनामी) से बचाया इसमें तो शक़ ही नहीं कि वह दिली ख्यालात से वाक़िफ़ है
और जान लो कि जो कुछ तुम (माल लड़कर) लूटो तो उनमें का पॉचवॉ हिस्सा मख़सूस ख़ुदा और रसूल और (रसूल के) क़राबतदारों और यतीमों और मिस्कीनों और परदेसियों का है अगर तुम ख़ुदा पर और उस (ग़ैबी इमदाद) पर ईमान ला चुके हो जो हमने ख़ास बन्दे (मोहम्मद) पर फ़ैसले के दिन (जंग बदर में) नाज़िल की थी जिस दिन (मुसलमानों और काफिरों की) दो जमाअतें बाहम गुथ गयी थी और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
(ये वह वक्त था) जब तुम (मैदाने जंग में मदीने के) क़रीब नाके पर थे और वह कुफ्फ़ार बईद (दूर के) के नाके पर और (काफ़िले के) सवार तुम से नशेब में थे और अगर तुम एक दूसरे से (वक्त क़ी तक़रीर का) वायदा कर लेते हो तो और वक्त पर गड़बड़ कर देते मगर (ख़ुदा ने अचानक तुम लोगों को इकट्ठा कर दिया ताकि जो बात यदनी (होनी) थी वह पूरी कर दिखाए ताकि जो शख़्स हलाक (गुमराह) हो वह (हक़ की) हुज्जत तमाम होने के बाद हलाक हो और जो ज़िन्दा रहे वह हिदायत की हुज्जत तमाम होने के बाद ज़िन्दा रहे और ख़ुदा यक़ीनी सुनने वाला ख़बरदार है
(ये वह वक्त था) जब ख़ुदा ने तुम्हें ख्वाब में कुफ्फ़ार को कम करके दिखलाया था और अगर उनको तुम्हें ज्यादा करते दिखलाता तुम यक़ीनन हिम्मत हार देते और लड़ाई के बारे में झगड़ने लगते मगर ख़ुदा ने इसे (बदनामी) से बचाया इसमें तो शक़ ही नहीं कि वह दिली ख्यालात से वाक़िफ़ है
(ये वह वक्त था) जब तुम लोगों ने मुठभेड़ की तो ख़ुदा ने तुम्हारी ऑखों में कुफ्फ़ार को बहुत कम करके दिखलाया और उनकी ऑखों में तुमको थोड़ा कर दिया ताकि ख़ुदा को जो कुछ करना मंज़ूर था वह पूरा हो जाए और कुल बातों का दारोमदार तो ख़ुदा ही पर है
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