अत-तौबा · 5/129
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तौबा
فَإِذَا انسَلَخَ الْأَشْهُرُ الْحُرُمُ فَاقْتُلُوا الْمُشْرِكِينَ حَيْثُ وَجَدتُّمُوهُمْ وَخُذُوهُمْ وَاحْصُرُوهُمْ وَاقْعُدُوا لَهُمْ كُلَّ مَرْصَدٍ ۚ فَإِن تَابُوا وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوُا الزَّكَاةَ فَخَلُّوا سَبِيلَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝٥
Fa izansalakhal Ashhurul Hurumu faqtulul mushrikeena haisu wajattumoohum wa khuzoohum wahsuroohum qaq`udoo lahum kulla marsad; fa-in taaboo wa aqaamus Salaata wa aatawuz Zakaata fakhalloo sabeelahum; innal laaha Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब हुरमत के चार महीने गुज़र जाएँ तो मुशरिकों को जहाँ पाओ (बे ताम्मुल) कत्ल करो और उनको गिरफ्तार कर लो और उनको कैद करो और हर घात की जगह में उनकी ताक में बैठो फिर अगर वह लोग (अब भी शिर्क से) बाज़ आऎं और नमाज़ पढ़ने लगें और ज़कात दे तो उनकी राह छोड़ दो (उनसे ताअरूज़ न करो) बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • انسلخ: समाप्त होना, बीत जाना (जैसे जानवर की खाल उतारी जाती है, उसी प्रकार ये महीने अपनी अवधि पूरी करके निकल जाएं)।
  • الأشهر الحرم: वे चार पवित्र महीने (ज़ुल-क़ादा, ज़ुल-हिज्जा, मुहर्रम, रजब) जिनमें मुशरिकों को सुरक्षा दी गई थी और उन पर हमला करना वर्जित किया गया था।
  • خذوهم: उन्हें पकड़ो, बंदी बनाओ।
  • احصروهم: उन्हें घेर लो, उनके किलों और ठिकानों में उन्हें घेरकर रखो।
  • مرصد: हर रास्ते पर घात लगाने की जगह, निगरानी का स्थान।

तफसीर (व्याख्या):

जब वे चार पवित्र महीने समाप्त हो जाएं, जिनके दौरान मुशरिकों को सुरक्षा और मोहलत दी गई थी, तो उन नक़्ज़-ए-अहद (संधि तोड़ने वाले) मुशरिकों से युद्ध की घोषणा कर दो। उन्हें जहाँ कहीं भी पाओ—चाहे हरम (पवित्र क्षेत्र) में हो या उसके बाहर—क़त्ल करो, उन्हें बंदी बनाओ, उनके किलों और ठिकानों में उन्हें घेर लो, और उनके आने-जाने के हर रास्ते पर घात लगाकर बैठो ताकि वे किसी भी ओर भाग न सकें। यह तब तक है जब तक वे अपनी शरारतों और फ़साद से बाज़ न आएं।

लेकिन यदि वे अपने शिर्क (बहुदेववाद) से तौबा कर लें, इस्लाम में दाखिल हो जाएं, नमाज़ की पाबंदी करें और अपने माल की ज़कात अदा करें—जो उनके ईमान और तौबा की सच्चाई की निशानी है—तो उनका रास्ता छोड़ दो, उन्हें आज़ाद छोड़ दो और उनके साथ युद्ध बंद कर दो। वे अब तुम्हारे इस्लामी भाई बन चुके हैं। निस्संदेह, अल्लाह उन लोगों को क्षमा करने वाला है जो सच्चे दिल से तौबा करते हैं, और वह उन पर बड़ी दया करने वाला है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. इस्लाम में सुरक्षा और अमन का बड़ा सम्मान है, लेकिन जो लोग अहद तोड़ें और फ़साद फैलाएं, उनके खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई जायज़ है—यह अल्लाह का क़ानून है।
  2. तौबा का दरवाज़ा हर किसी के लिए खुला है। चाहे कोई कितना ही बड़ा गुनाहगार हो, सच्ची तौबा और अच्छे आचरण (नमाज़ और ज़कात) से वह माफ़ी का हक़दार बन जाता है।
  3. नमाज़ और ज़कात ईमान की कसौटी हैं—ये दोनों अमल ही इस्लाम के स्तंभ हैं और इन्हीं से इंसान का दिल साफ़ होता है और समाज में भाईचारा पैदा होता है।
  4. अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से कहीं बढ़कर है; वह तौबा करने वालों को गले लगाता है और उन्हें नई ज़िंदगी देता है। यही इस्लाम का पैग़ाम है—सज़ा के बाद भी रहमत और माफ़ी का दामन फैला हुआ है।
  5. यह आयत बताती है कि इस्लाम में सिर्फ़ जबरदस्ती नहीं है, बल्कि हर मोड़ पर इंसान को रहमत और भलाई की तरफ़ बुलाया गया है।


📜 आयत 3-7 — सूरा अत-तौबा

3وَأَذَانٌ مِّنَ اللَّهِ وَرَسُولِهِ إِلَى النَّاسِ يَوْمَ الْحَجِّ الْأَكْبَرِ أَنَّ اللَّهَ بَرِيءٌ مِّنَ الْمُشْرِكِينَ ۙ وَرَسُولُهُ ۚ فَإِن تُبْتُمْ فَهُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۖ وَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّكُمْ غَيْرُ مُعْجِزِي اللَّهِ ۗ وَبَشِّرِ الَّذِينَ كَفَرُوا بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
और ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ से हज अकबर के दिन (तुम) लोगों को मुनादी की जाती है कि ख़ुदा और उसका रसूल मुशरिकों से बेज़ार (और अलग) है तो (मुशरिकों) अगर तुम लोगों ने (अब भी) तौबा की तो तुम्हारे हक़ में यही बेहतर है और अगर तुम लोगों ने (इससे भी) मुंह मोड़ा तो समझ लो कि तुम लोग ख़ुदा को हरगिज़ आजिज़ नहीं कर सकते और जिन लोगों ने कुफ्र इख्तेयार किया उनको दर्दनाक अज़ाब की ख़ुश ख़बरी दे दो
4إِلَّا الَّذِينَ عَاهَدتُّم مِّنَ الْمُشْرِكِينَ ثُمَّ لَمْ يَنقُصُوكُمْ شَيْئًا وَلَمْ يُظَاهِرُوا عَلَيْكُمْ أَحَدًا فَأَتِمُّوا إِلَيْهِمْ عَهْدَهُمْ إِلَىٰ مُدَّتِهِمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُتَّقِينَ
मगर (हाँ) जिन मुशरिकों से तुमने एहदो पैमान किया था फिर उन लोगों ने भी कभी कुछ तुमसे (वफ़ा एहद में) कमी नहीं की और न तुम्हारे मुक़ाबले में किसी की मदद की हो तो उनके एहद व पैमान को जितनी मुद्द्त के वास्ते मुक़र्रर किया है पूरा कर दो ख़ुदा परहेज़गारों को यक़ीनन दोस्त रखता है
5فَإِذَا انسَلَخَ الْأَشْهُرُ الْحُرُمُ فَاقْتُلُوا الْمُشْرِكِينَ حَيْثُ وَجَدتُّمُوهُمْ وَخُذُوهُمْ وَاحْصُرُوهُمْ وَاقْعُدُوا لَهُمْ كُلَّ مَرْصَدٍ ۚ فَإِن تَابُوا وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوُا الزَّكَاةَ فَخَلُّوا سَبِيلَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
फिर जब हुरमत के चार महीने गुज़र जाएँ तो मुशरिकों को जहाँ पाओ (बे ताम्मुल) कत्ल करो और उनको गिरफ्तार कर लो और उनको कैद करो और हर घात की जगह में उनकी ताक में बैठो फिर अगर वह लोग (अब भी शिर्क से) बाज़ आऎं और नमाज़ पढ़ने लगें और ज़कात दे तो उनकी राह छोड़ दो (उनसे ताअरूज़ न करो) बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
6وَإِنْ أَحَدٌ مِّنَ الْمُشْرِكِينَ اسْتَجَارَكَ فَأَجِرْهُ حَتَّىٰ يَسْمَعَ كَلَامَ اللَّهِ ثُمَّ أَبْلِغْهُ مَأْمَنَهُ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَعْلَمُونَ
और (ऐ रसूल) अगर मुशरिकीन में से कोई तुमसे पनाह मागें तो उसको पनाह दो यहाँ तक कि वह ख़ुदा का कलाम सुन ले फिर उसे उसकी अमन की जगह वापस पहुँचा दो ये इस वजह से कि ये लोग नादान हैं
7كَيْفَ يَكُونُ لِلْمُشْرِكِينَ عَهْدٌ عِندَ اللَّهِ وَعِندَ رَسُولِهِ إِلَّا الَّذِينَ عَاهَدتُّمْ عِندَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۖ فَمَا اسْتَقَامُوا لَكُمْ فَاسْتَقِيمُوا لَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُتَّقِينَ
(जब) मुशरिकीन ने ख़ुद एहद शिकनी (तोड़ा) की तो उन का कोई एहदो पैमान ख़ुदा के नज़दीक और उसके रसूल के नज़दीक क्योंकर (क़ायम) रह सकता है मगर जिन लोगों से तुमने खानाए काबा के पास मुआहेदा किया था तो वह लोग (अपनी एहदो पैमान) तुमसे क़ायम रखना चाहें तो तुम भी उन से (अपना एहद) क़ायम रखो बेशक ख़ुदा (बद एहदी से) परहेज़ करने वालों को दोस्त रखता है
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीअवतरण स्थान
5आयत

अनुवाद — अत-तौबा 5

सूरा अत-तौबा आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब हुरमत के चार महीने गुज़र जाएँ तो मुशरिकों…

सूरा आयत 5/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Wednesday, September 30, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए