अत-तौबा · 6/129
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तौबा
وَإِنْ أَحَدٌ مِّنَ الْمُشْرِكِينَ اسْتَجَارَكَ فَأَجِرْهُ حَتَّىٰ يَسْمَعَ كَلَامَ اللَّهِ ثُمَّ أَبْلِغْهُ مَأْمَنَهُ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَعْلَمُونَ ۝٦
Wa in ahadum minal mushrikeenas tajaaraka fa ajirhu hattaa yasma`a Kalaamal laahi summa ablighhu maa manah; zaalika bi annahum qawmul laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) अगर मुशरिकीन में से कोई तुमसे पनाह मागें तो उसको पनाह दो यहाँ तक कि वह ख़ुदा का कलाम सुन ले फिर उसे उसकी अमन की जगह वापस पहुँचा दो ये इस वजह से कि ये लोग नादान हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَجَارَكَ: तुमसे पनाह (सुरक्षा) माँगे, अमन का वादा चाहे।
  • فَأَجِرْهُ: उसे पनाह दो, उसे सुरक्षित करो।
  • مَأْمَنَهُ: उसकी सुरक्षित जगह, जहाँ वह निडर होकर रह सके।

तफसीर (व्याख्या):

हे नबी! यदि मुशरिकीन (बहुदेववादियों) में से कोई व्यक्ति, जिनके ख़िलाफ़ युद्ध का आदेश दिया गया है, आकर आपसे पनाह माँगे और सुरक्षा का अनुरोध करे, तो उसे पनाह दें और उसे सुरक्षित रखें, यहाँ तक कि वह अल्लाह का कलाम (क़ुरआन) सुन ले और उसके आदेशों व शिक्षाओं से परिचित हो जाए। फिर उसके बाद यदि वह इस्लाम स्वीकार न करे, तो उसे उसकी सुरक्षित जगह (उसके घर या उसकी क़ौम के पास) पहुँचा दें, ताकि वह वहाँ निडर होकर रहे। यह आदेश इसलिए है कि ये लोग अज्ञानी हैं और इस दीन की सच्चाई को नहीं जानते। क़ुरआन सुनने के बाद उनके ज्ञान का द्वार खुल सकता है और वे हिदायत पा सकते हैं। यदि वे क़ुरआन सुनने के बाद भी इस्लाम न अपनाएँ और आपसे लड़ें, तो उनसे युद्ध किया जा सकता है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस्लाम दीन में दया, सहिष्णुता और न्याय का पाठ सिखाता है। दुश्मन को भी सच्चाई सुनने का अवसर दिया जाता है, चाहे वह युद्ध की स्थिति में ही क्यों न हो।
  2. यह आदेश बताता है कि इस्लाम का उद्देश्य केवल जीतना नहीं, बल्कि लोगों तक अल्लाह का संदेश पहुँचाना है। ज्ञान और समझ को बल मिलता है।
  3. इस्लाम में वचन और अमान (सुरक्षा) का सम्मान अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक बार पनाह देने के बाद उसे तोड़ना मना है, भले ही सामने वाला शत्रु ही क्यों न हो।
  4. यह आयत इस्लाम की रहमत और इंसाफ़ की तस्वीर है, जो दिखाती है कि इस्लाम दूसरों पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि उन्हें सच्चाई समझने का मौका देता है। यही वजह है कि इस्लाम का पैग़ाम दुनिया में तेज़ी से फैला।


📜 आयत 4-8 — सूरा अत-तौबा

4إِلَّا الَّذِينَ عَاهَدتُّم مِّنَ الْمُشْرِكِينَ ثُمَّ لَمْ يَنقُصُوكُمْ شَيْئًا وَلَمْ يُظَاهِرُوا عَلَيْكُمْ أَحَدًا فَأَتِمُّوا إِلَيْهِمْ عَهْدَهُمْ إِلَىٰ مُدَّتِهِمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُتَّقِينَ
मगर (हाँ) जिन मुशरिकों से तुमने एहदो पैमान किया था फिर उन लोगों ने भी कभी कुछ तुमसे (वफ़ा एहद में) कमी नहीं की और न तुम्हारे मुक़ाबले में किसी की मदद की हो तो उनके एहद व पैमान को जितनी मुद्द्त के वास्ते मुक़र्रर किया है पूरा कर दो ख़ुदा परहेज़गारों को यक़ीनन दोस्त रखता है
5فَإِذَا انسَلَخَ الْأَشْهُرُ الْحُرُمُ فَاقْتُلُوا الْمُشْرِكِينَ حَيْثُ وَجَدتُّمُوهُمْ وَخُذُوهُمْ وَاحْصُرُوهُمْ وَاقْعُدُوا لَهُمْ كُلَّ مَرْصَدٍ ۚ فَإِن تَابُوا وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوُا الزَّكَاةَ فَخَلُّوا سَبِيلَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
फिर जब हुरमत के चार महीने गुज़र जाएँ तो मुशरिकों को जहाँ पाओ (बे ताम्मुल) कत्ल करो और उनको गिरफ्तार कर लो और उनको कैद करो और हर घात की जगह में उनकी ताक में बैठो फिर अगर वह लोग (अब भी शिर्क से) बाज़ आऎं और नमाज़ पढ़ने लगें और ज़कात दे तो उनकी राह छोड़ दो (उनसे ताअरूज़ न करो) बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
6وَإِنْ أَحَدٌ مِّنَ الْمُشْرِكِينَ اسْتَجَارَكَ فَأَجِرْهُ حَتَّىٰ يَسْمَعَ كَلَامَ اللَّهِ ثُمَّ أَبْلِغْهُ مَأْمَنَهُ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَعْلَمُونَ
और (ऐ रसूल) अगर मुशरिकीन में से कोई तुमसे पनाह मागें तो उसको पनाह दो यहाँ तक कि वह ख़ुदा का कलाम सुन ले फिर उसे उसकी अमन की जगह वापस पहुँचा दो ये इस वजह से कि ये लोग नादान हैं
7كَيْفَ يَكُونُ لِلْمُشْرِكِينَ عَهْدٌ عِندَ اللَّهِ وَعِندَ رَسُولِهِ إِلَّا الَّذِينَ عَاهَدتُّمْ عِندَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۖ فَمَا اسْتَقَامُوا لَكُمْ فَاسْتَقِيمُوا لَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُتَّقِينَ
(जब) मुशरिकीन ने ख़ुद एहद शिकनी (तोड़ा) की तो उन का कोई एहदो पैमान ख़ुदा के नज़दीक और उसके रसूल के नज़दीक क्योंकर (क़ायम) रह सकता है मगर जिन लोगों से तुमने खानाए काबा के पास मुआहेदा किया था तो वह लोग (अपनी एहदो पैमान) तुमसे क़ायम रखना चाहें तो तुम भी उन से (अपना एहद) क़ायम रखो बेशक ख़ुदा (बद एहदी से) परहेज़ करने वालों को दोस्त रखता है
8كَيْفَ وَإِن يَظْهَرُوا عَلَيْكُمْ لَا يَرْقُبُوا فِيكُمْ إِلًّا وَلَا ذِمَّةً ۚ يُرْضُونَكُم بِأَفْوَاهِهِمْ وَتَأْبَىٰ قُلُوبُهُمْ وَأَكْثَرُهُمْ فَاسِقُونَ
(उनका एहद) क्योंकर (रह सकता है) जब (उनकी ये हालत है) कि अगर तुम पर ग़लबा पा जाएं तो तुम्हारे में न तो रिश्ते नाते ही का लिहाज़ करेगें और न अपने क़ौल व क़रार का ये लोग तुम्हें अपनी ज़बानी (जमा खर्च में) खुश कर देते हैं हालॉकि उनके दिल नहीं मानते और उनमें के बहुतेरे तो बदचलन हैं
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — अत-तौबा 6

सूरा अत-तौबा आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) अगर मुशरिकीन में से कोई तुमसे पनाह…

सूरा आयत 6/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए