सूरा अल-क़लम
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सूरा अल-क़लम pdf — डाउनलोड (हिन्दी)
सूरा अल-क़लम pdf हिन्दी — डाउनलोड सूरा अल-क़लम अनुवाद. अल-क़लम (मक्की) 52 आयत.
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सूरा अल-क़लम

ﮉﮊﮋﮌﮍﮎ
नून क़लम की और उस चीज़ की जो लिखती हैं (उसकी) क़सम है
ﮏﮐﮑﮒﮓﮔ
कि तुम अपने परवरदिगार के फ़ज़ल (व करम) से दीवाने नहीं हो
ﮕﮖﮗﮘﮙﮚ
और तुम्हारे वास्ते यक़ीनन वह अज्र है जो कभी ख़त्म ही न होगा
ﮛﮜﮝﮞﮟ
और बेशक तुम्हारे एख़लाक़ बड़े आला दर्जे के हैं
ﮠﮡﮢ
तो अनक़रीब ही तुम भी देखोगे और ये कुफ्फ़ार भी देख लेंगे
ﮣﮤﮥ
कि तुममें दीवाना कौन है
ﮦﮧﮨﮩﮪﮫﮬﮭﮮﮯﮰﮱ
बेशक तुम्हारा परवरदिगार इनसे ख़ूब वाक़िफ़ है जो उसकी राह से भटके हुए हैं और वही हिदायत याफ्ता लोगों को भी ख़ूब जानता है
ﯓﯔﯕﯖ
तो तुम झुठलाने वालों का कहना न मानना
ﯗﯘﯙﯚﯛ
वह लोग ये चाहते हैं कि अगर तुम नरमी एख्तेयार करो तो वह भी नरम हो जाएँ
ﯜﯝﯞﯟﯠﯡ
और तुम (कहीं) ऐसे के कहने में न आना जो बहुत क़समें खाता ज़लील औक़ात ऐबजू
ﯢﯣﯤﯥ
जो आला दर्जे का चुग़लख़ोर माल का बहुत बख़ील
ﯦﯧﯨﯩﯪ
हद से बढ़ने वाला गुनेहगार तुन्द मिजाज़
ﯫﯬﯭﯮﯯ
और उसके अलावा बदज़ात (हरमज़ादा) भी है
ﯰﯱﯲﯳﯴﯵ
चूँकि माल बहुत से बेटे रखता है
ﯶﯷﯸﯹﯺﯻﯼﯽ
जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो बोल उठता है कि ये तो अगलों के अफ़साने हैं
ﯾﯿﰀﰁ
हम अनक़रीब इसकी नाक पर दाग़ लगाएँगे
ﭑﭒﭓﭔﭕﭖﭗﭘﭙﭚﭛ
जिस तरह हमने एक बाग़ वालों का इम्तेहान लिया था उसी तरह उनका इम्तेहान लिया जब उन्होने क़समें खा खाकर कहा कि सुबह होते हम उसका मेवा ज़रूर तोड़ डालेंगे
ﭜﭝﭞ
और इन्शाअल्लाह न कहा
ﭟﭠﭡﭢﭣﭤﭥﭦ
तो ये लोग पड़े सो ही रहे थे कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (रातों रात) एक बला चक्कर लगा गयी
ﭧﭨﭩ
तो वह (सारा बाग़ जलकर) ऐसा हो गया जैसे बहुत काली रात
ﭪﭫﭬ
फिर ये लोग नूर के तड़के लगे बाहम गुल मचाने
ﭭﭮﭯﭰﭱﭲﭳﭴ
कि अगर तुमको फल तोड़ना है तो अपने बाग़ में सवेरे से चलो
ﭵﭶﭷﭸ
ग़रज़ वह लोग चले और आपस में चुपके चुपके कहते जाते थे
ﭹﭺﭻﭼﭽﭾﭿ
कि आज यहाँ तुम्हारे पास कोई फ़क़ीर न आने पाए
ﮀﮁﮂﮃﮄ
तो वह लोग रोक थाम के एहतमाम के साथ फल तोड़ने की ठाने हुए सवेरे ही जा पहुँचे
ﮅﮆﮇﮈﮉﮊ
फिर जब उसे (जला हुआ सियाह) देखा तो कहने लगे हम लोग भटक गए
ﮋﮌﮍﮎ
(ये हमारा बाग़ नहीं फिर ये सोचकर बोले) बात ये है कि हम लोग बड़े बदनसीब हैं
ﮏﮐﮑﮒﮓﮔﮕﮖ
जो उनमें से मुनसिफ़ मिजाज़ था कहने लगा क्यों मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम लोग (ख़ुदा की) तसबीह क्यों नहीं करते
ﮗﮘﮙﮚﮛﮜﮝ
वह बोले हमारा परवरदिगार पाक है बेशक हमीं ही कुसूरवार हैं
ﮞﮟﮠﮡﮢﮣ
फिर लगे एक दूसरे के मुँह दर मुँह मलामत करने
ﮤﮥﮦﮧﮨﮩ
(आख़िर) सबने इक़रार किया कि हाए अफसोस बेशक हम ही ख़ुद सरकश थे
ﮪﮫﮬﮭﮮﮯﮰﮱﯓﯔﯕ
उम्मीद है कि हमारा परवरदिगार हमें इससे बेहतर बाग़ इनायत फ़रमाए हम अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करते हैं
ﯖﯗﯘﯙﯚﯛﯜﯝﯞﯟﯠ
(देखो) यूँ अज़ाब होता है और आख़ेरत का अज़ाब तो इससे कहीं बढ़ कर है अगर ये लोग समझते हों
ﯡﯢﯣﯤﯥﯦﯧ
बेशक परहेज़गार लोग अपने परवरदिगार के यहाँ ऐशो आराम के बाग़ों में होंगे
ﯨﯩﯪﯫ
तो क्या हम फरमाबरदारों को नाफ़रमानो के बराबर कर देंगे
ﯬﯭﯮﯯﯰ
(हरगिज़ नहीं) तुम्हें क्या हो गया है तुम तुम कैसा हुक्म लगाते हो
ﯱﯲﯳﯴﯵﯶ
या तुम्हारे पास कोई ईमानी किताब है जिसमें तुम पढ़ लेते हो
ﯷﯸﯹﯺﯻﯼ
कि जो चीज़ पसन्द करोगे तुम को वहाँ ज़रूर मिलेगी
ﯽﯾﯿﰀﰁﰂﰃﰄﰅﰆﰇﰈﰉ
या तुमने हमसे क़समें ले रखी हैं जो रोज़े क़यामत तक चली जाएगी कि जो कुछ तुम हुक्म दोगे वही तुम्हारे लिए ज़रूर हाज़िर होगा
ﰊﰋﰌﰍﰎ
उनसे पूछो तो कि उनमें इसका कौन ज़िम्मेदार है
ﰏﰐﰑﰒﰓﰔﰕﰖﰗ
या (इस बाब में) उनके और लोग भी शरीक हैं तो अगर ये लोग सच्चे हैं तो अपने शरीकों को सामने लाएँ
ﰘﰙﰚﰛﰜﰝﰞﰟﰠﰡ
जिस दिन पिंडली खोल दी जाए और (काफ़िर) लोग सजदे के लिए बुलाए जाएँगे तो (सजदा) न कर सकेंगे
ﭑﭒﭓﭔﭕﭖﭗﭘﭙﭚﭛﭜﭝ
उनकी ऑंखें झुकी हुई होंगी रूसवाई उन पर छाई होगी और (दुनिया में) ये लोग सजदे के लिए बुलाए जाते और हटटे कटटे तन्दरूस्त थे
ﭞﭟﭠﭡﭢﭣﭤﭥﭦﭧﭨﭩ
तो मुझे उस कलाम के झुठलाने वाले से समझ लेने दो हम उनको आहिस्ता आहिस्ता इस तरह पकड़ लेंगे कि उनको ख़बर भी न होगी
ﭪﭫﭬﭭﭮﭯﭰ
और मैं उनको मोहलत दिये जाता हूँ बेशक मेरी तदबीर मज़बूत है
ﭱﭲﭳﭴﭵﭶﭷﭸ
(ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत का) कुछ सिला माँगते हो कि उन पर तावान का बोझ पड़ रहा है
ﭹﭺﭻﭼﭽﭾ
या उनके इस ग़ैब (की ख़बर) है कि ये लोग लिख लिया करते हैं
ﭿﮀﮁﮂﮃﮄﮅﮆﮇﮈﮉﮊ
तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तेज़ार में सब्र करो और मछली (का निवाला होने) वाले (यूनुस) के ऐसे न हो जाओ कि जब वह ग़ुस्से में भरे हुए थे और अपने परवरदिगार को पुकारा
ﮋﮌﮍﮎﮏﮐﮑﮒﮓﮔﮕ
अगर तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी उनकी यावरी न करती तो चटियल मैदान में डाल दिए जाते और उनका बुरा हाल होता
ﮖﮗﮘﮙﮚﮛ
तो उनके परवरदिगार ने उनको बरगुज़ीदा करके नेकोकारों से बना दिया
ﮜﮝﮞﮟﮠﮡﮢﮣﮤﮥﮦﮧﮨ
और कुफ्फ़ार जब क़ुरान को सुनते हैं तो मालूम होता है कि ये लोग तुम्हें घूर घूर कर (राह रास्त से) ज़रूर फिसला देंगे
ﮩﮪﮫﮬﮭﮮ
और कहते हैं कि ये तो सिड़ी हैं और ये (क़ुरान) तो सारे जहाँन की नसीहत है
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए







