अल-आदियात · 3/11
अनुवाद उच्चारण — अल-आदियात
فَالْمُغِيرَاتِ صُبْحًا ۝٣
Fal mugheeraati subha
📖 हिंदी अर्थ
फिर पत्थर पर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालते हैं फिर सुबह को छापा मारते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَالْمُغِيرَاتِ: वे घोड़े जो दुश्मन पर धावा बोलते हैं (हमला करते हैं)।
  • صُبْحًا: सुबह के समय।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इन आयात में सुबह के समय दुश्मनों पर धावा बोलने वाले घोड़ों की क़सम खाई है। ये वे घोड़े हैं जो अपने सवारों को लेकर सुबह के वक़्त दुश्मन की फ़ौज पर अचानक हमला करते हैं, जब दुश्मन ग़ाफ़िल (बेखबर) होते हैं और नींद से उठे होते हैं। यह वक़्त इसलिए चुना जाता है क्योंकि सुबह के समय दुश्मन पर हमला करना सबसे प्रभावी होता है — दुश्मन न तो पूरी तरह जागा होता है और न ही अपना बचाव तैयार कर पाता है।

यह क़सम दिखाती है कि अल्लाह तआला ने इन घोड़ों को जो ताक़त, तेज़ी और वफ़ादारी दी है, वह उसकी क़ुदरत की निशानी है। जिस तरह ये घोड़े अपने सवार को दुश्मन के सामने ले जाकर फ़तह दिलाते हैं, उसी तरह अल्लाह की राह में जिहाद करने वाले मोमिन भी अपने अमल से दुश्मनों पर ग़ालिब आते हैं।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हमें अपने दीन की हिफ़ाज़त के लिए हर वक़्त तैयार रहना चाहिए, चाहे वह सुबह हो या शाम। अल्लाह की राह में कुर्बानी देने वालों को अल्लाह प्यार करता है और उन्हें इज़्ज़त देता है। यह भी याद रखें कि अल्लाह ने इन घोड़ों की क़सम इसलिए खाई कि हम उसकी नेमतों पर ग़ौर करें और उसका शुक्र अदा करें। जो लोग अल्लाह की राह में अपनी जान और माल खर्च करते हैं, उनके लिए अल्लाह के यहाँ बड़ा अज्र (इनाम) है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की राह में जिहाद और सच्चाई के साथ डटे रहना कितना पसंदीदा अमल है। जिस तरह ये घोड़े सुबह के अंधेरे में भी अपने सवार को मंज़िल तक पहुँचाते हैं, उसी तरह हमें भी हर मुश्किल हालात में अल्लाह की इबादत और उसकी राह में कोशिश जारी रखनी चाहिए। अल्लाह हमें अपनी राह में साबित क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — अल-आदियात

1وَالْعَادِيَاتِ ضَبْحًا
(ग़ाज़ियों के) सरपट दौड़ने वाले घोड़ो की क़सम
2فَالْمُورِيَاتِ قَدْحًا
जो नथनों से फ़रराटे लेते हैं
3فَالْمُغِيرَاتِ صُبْحًا
फिर पत्थर पर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालते हैं फिर सुबह को छापा मारते हैं
4فَأَثَرْنَ بِهِ نَقْعًا
(तो दौड़ धूप से) बुलन्द कर देते हैं
5فَوَسَطْنَ بِهِ جَمْعًا
फिर उस वक्त (दुश्मन के) दिल में घुस जाते हैं
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अनुवाद — अल-आदियात 3

सूरा अल-आदियात आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर पत्थर पर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालते हैं फिर सुबह…

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Tuesday, August 18, 2026

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