अल-आदियात · 4/11
अनुवाद उच्चारण — अल-आदियात
فَأَثَرْنَ بِهِ نَقْعًا ۝٤
Fa atharna bihee naq`a
📖 हिंदी अर्थ
(तो दौड़ धूप से) बुलन्द कर देते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَثَرْنَ (फ़ा-असरना): उठाया, हिलाया, प्रकट किया
  • بِهِ (बिही): उसके द्वारा, यानी उस स्थान पर अपनी दौड़ के द्वारा
  • نَقْعًا (नक़'अन): गर्द, धूल, उड़ता हुआ गुबार

विस्तृत व्याख्या:

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला घोड़ों के उस दृश्य का वर्णन कर रहे हैं जब वे जिहाद के लिए दौड़ते हैं। ये घोड़े अपनी तेज़ रफ्तार से दौड़ते हुए धूल उड़ाते हैं, और उस धूल से पूरा वातावरण भर जाता है। यह उस समय का दृश्य है जब मुजाहिदीन अल्लाह के रास्ते में दुश्मन पर हमला करने के लिए आगे बढ़ते हैं, और उनके घोड़ों की टापों से ज़मीन से गर्द उठती है।

यह आयत हमें उन बहादुर और निडर मुसलमानों की याद दिलाती है जो अल्लाह की राह में अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन का सामना करते हैं। जब घोड़े इतनी तेज़ी से दौड़ते हैं कि उनके खुरों से पत्थर टकराकर आग की चिंगारियाँ निकलती हैं, और पीछे धूल का गुबार छोड़ जाते हैं, तो यह उनके जुनून, हिम्मत और अल्लाह के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह के रास्ते में कोशिश और मेहनत कितनी महत्वपूर्ण है। जिस तरह घोड़े अपनी पूरी ताकत से दौड़ते हैं और धूल उड़ाते हैं, उसी तरह हमें भी अपने जीवन के हर क्षेत्र में पूरी लगन और मेहनत से काम करना चाहिए। चाहे वह इबादत हो, तालीम हासिल करना हो, या समाज की सेवा करना हो — हमें बिना आलस्य के आगे बढ़ते रहना चाहिए।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की राह में की गई छोटी से छोटी कोशिश भी अल्लाह के यहाँ क़ीमती है। जिस तरह घोड़ों की दौड़ से उठने वाली धूल भी अल्लाह की नज़र में महत्वपूर्ण है, उसी तरह हमारे अच्छे कर्म, चाहे वे कितने ही छोटे क्यों न हों, अल्लाह के यहाँ अमूल्य हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! आइए हम अपने जीवन को इस तरह बनाएं कि हमारे कर्म भी उन घोड़ों की तरह हों — तेज़, निडर और अल्लाह की राह में समर्पित। हम अपने जीवन के हर पल को अल्लाह की इबादत और उसकी राह में खर्च करें, ताकि हम भी उन मुबारक लोगों में शामिल हो सकें जिनके बारे में अल्लाह ने इस सूरह में गवाही दी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 2-6 — अल-आदियात

2فَالْمُورِيَاتِ قَدْحًا
जो नथनों से फ़रराटे लेते हैं
3فَالْمُغِيرَاتِ صُبْحًا
फिर पत्थर पर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालते हैं फिर सुबह को छापा मारते हैं
4فَأَثَرْنَ بِهِ نَقْعًا
(तो दौड़ धूप से) बुलन्द कर देते हैं
5فَوَسَطْنَ بِهِ جَمْعًا
फिर उस वक्त (दुश्मन के) दिल में घुस जाते हैं
6إِنَّ الْإِنسَانَ لِرَبِّهِ لَكَنُودٌ
(ग़रज़ क़सम है) कि बेशक इन्सान अपने परवरदिगार का नाशुक्रा है
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अनुवाद — अल-आदियात 4

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सूरा आयत 4/11 — अल-आदियात العاديات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आदियात सुनें, अल-आदियात अनुवाद, अल-आदियात mp3, अल-आदियात pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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