अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عَابِدُونَ (आबिदून): इबादत करने वाले
- مَا أَعْبُدُ (मा आ'बुदु): जिसकी मैं इबादत करता हूँ (अल्लाह)
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हिदायत दे रहे हैं कि आप काफ़िरों से कहें: "और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी मैं इबादत करता हूँ।" यानी जिस तरह मैं अकेले अल्लाह की इबादत करता हूँ, बिना किसी साझी के, उसी तरह तुम भी उसकी इबादत नहीं कर सकते। तुम्हारी इबादत शिर्क से मिली हुई है, जबकि मेरी इबादत खालिस तौहीद है। इसलिए दोनों में कभी मेल नहीं हो सकता।
यह आयत उन ख़ास मुशरिकों के बारे में उतरी जिनके बारे में अल्लाह को पहले से मालूम था कि वे कभी ईमान नहीं लाएँगे। अल्लाह ने यह बात उनके भविष्य के बारे में बता दी, ताकि नबी ﷺ और मुसलमानों का दिल उनसे मायूस हो जाए और वे अपनी तब्लीग़ जारी रखें।
इस आयत का पैग़ाम यह है कि ईमान और कुफ्र के बीच कभी समझौता नहीं हो सकता। एक मोमिन की पहचान यह है कि वह सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है, और मुशरिक की पहचान यह है कि वह अल्लाह के साथ दूसरों को भी पूजता है। यह दोनों रास्ते कभी एक नहीं हो सकते।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी इबादत को खालिस अल्लाह के लिए करें। हमारी नमाज़, हमारा रोज़ा, हमारी दुआ — सब कुछ सिर्फ अल्लाह के लिए हो। जब हम अपनी इबादत को इस तरह खालिस कर लेंगे, तो अल्लाह हमें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी देगा। याद रखिए, जो लोग अल्लाह की इबादत में किसी को साझी बनाते हैं, उनकी इबादत कभी क़ुबूल नहीं होती। लेकिन जो लोग खालिस दिल से अल्लाह की तरफ़ रुजू करते हैं, अल्लाह उन्हें अपनी रहमत से नवाज़ता है और उनके गुनाह माफ़ कर देता है। आइए, हम सब अपनी ज़िंदगी को इस तौहीद की रोशनी में ढालें और अल्लाह के प्यारे नबी ﷺ के रास्ते पर चलें।
📜 आयत 3-6 — अल-काफिरून
अनुवाद — अल-काफिरून 5
सूरा अल-काफिरून आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिसकी मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत करने…सूरा आयत 5/6 — अल-काफिरून الكافرون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-काफिरून सुनें, अल-काफिरून अनुवाद, अल-काफिरून mp3, अल-काफिरून pdf. आयत 3–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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