Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سُعِدُوا: जिन्हें सुख और भलाई प्राप्त हुई, अर्थात् जो सफल और सौभाग्यशाली हुए।
- خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले, स्थायी रूप से निवास करने वाले।
- مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ: जब तक आकाश और पृथ्वी रहेंगे, अर्थात् हमेशा के लिए।
- إِلَّا مَا شَاءَ رَبُكَ: परन्तु जिसे आपका रब चाहे (इससे मुर्दों के मोमिनों का वह समूह है जो अपने गुनाहों की सज़ा के लिए कुछ समय जहन्नम में रहेगा)।
- عَطَاءً غَيْرَ مَجْذُوذٍ: ऐसा उपहार जो कभी कटने वाला नहीं, अर्थात् निरंतर और अक्षय।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की ख़ुशख़बरी सुना रहा है जो दुनिया में ईमान और नेक अमल के ज़रिए अल्लाह की रहमत के हक़दार बने। ये वे लोग हैं जिनके लिए अल्लाह की तरफ से पहले ही सुख और भलाई लिख दी गई। ऐसे लोग जन्नत में दाखिल होंगे और वहाँ हमेशा हमेशा रहेंगे — जब तक आकाश और ज़मीन क़ायम हैं, यानी हमेशा के लिए।
इस आयत में एक इस्तिस्ना (अपवाद) का ज़िक्र है: "मगर जो आपका रब चाहे" — इसका मतलब यह है कि मोमिनों में से जो गुनाहगार होंगे, वे अपने गुनाहों की सज़ा के लिए कुछ समय जहन्नम में रहेंगे, लेकिन अंततः उन्हें भी अल्लाह की रहमत से जन्नत में दाखिल कर दिया जाएगा। यह अल्लाह की रहमत और उसकी मशीयत का एक पहलू है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि यह नेमत और इनाम ऐसा है जो कभी ख़त्म नहीं होगा, न कटेगा और न घटेगा। यह अल्लाह की तरफ से एक ऐसा अता (उपहार) है जो हमेशा जारी रहेगा — न उसका कोई अंत है और न उसमें कोई कमी आएगी। यह उन लोगों के लिए सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है जो अल्लाह पर ईमान लाए और नेक अमल किए।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह की रहमत की उम्मीद: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत बहुत वसी (व्यापक) है। गुनाहगार मोमिन भी अल्लाह की रहमत से महरूम नहीं रहेंगे — उन्हें सज़ा के बाद जन्नत ज़रूर मिलेगी। इससे हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए।
- ईमान और नेक अमल की अहमियत: जन्नत पाने का रास्ता ईमान और नेक अमल है। जो लोग इस रास्ते पर चलेंगे, उनका अंजाम हमेशा की ख़ुशी और सुकून है।
- जन्नत की हमेशगी: दुनिया की हर चीज़ फ़ानी (नाशवान) है, लेकिन जन्नत की नेमतें हमेशा रहने वाली हैं। यह हमें दुनिया की चीज़ों से बेराग़ब करके आख़िरत की तैयारी की तरफ़ राग़िब करती है।
- अल्लाह की मशीयत का एहतिराम: हमें यह समझना चाहिए कि अल्लाह की मशीयत (इच्छा) सबसे ऊपर है। वह जिसे चाहे जन्नत दे और जिसे चाहे जहन्नम में डाल दे — उसका फ़ैसला ही अंतिम है। इससे हमारे दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ और उसकी रहमत की उम्मीद दोनों पैदा होते हैं।
- अल्लाह का अता कभी ख़त्म नहीं होता: अल्लाह जो देता है, उसमें कमी नहीं आती। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह से हमेशा माँगते रहना चाहिए, क्योंकि उसका ख़ज़ाना कभी ख़ाली नहीं होता।
📜 आयत 106-110 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 108
सूरा हूद आयत 108 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग नेक बख्त हैं वह तो बेहश्त में…सूरा आयत 108/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 106–110. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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