हूद · 108/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
۞ وَأَمَّا الَّذِينَ سُعِدُوا فَفِي الْجَنَّةِ خَالِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ إِلَّا مَا شَاءَ رَبُّكَ ۖ عَطَاءً غَيْرَ مَجْذُوذٍ ۝١٠٨
Wa ammal lazeena su`idoo fafil Jannati khaalideena feehaa maa daamatis samaawaatu wal ardu illaa maa shaaa`a Rabbuk; ataaa`an ghaira majzooz
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग नेक बख्त हैं वह तो बेहश्त में होगें (और) जब तक आसमान व ज़मीन (बाक़ी) है वह हमेशा उसी में रहेगें मगर जब तेरा परवरदिगार चाहे (सज़ा देकर आख़िर में जन्नत में ले जाए
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُعِدُوا: जिन्हें सुख और भलाई प्राप्त हुई, अर्थात् जो सफल और सौभाग्यशाली हुए।
  • خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले, स्थायी रूप से निवास करने वाले।
  • مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ: जब तक आकाश और पृथ्वी रहेंगे, अर्थात् हमेशा के लिए।
  • إِلَّا مَا شَاءَ رَبُكَ: परन्तु जिसे आपका रब चाहे (इससे मुर्दों के मोमिनों का वह समूह है जो अपने गुनाहों की सज़ा के लिए कुछ समय जहन्नम में रहेगा)।
  • عَطَاءً غَيْرَ مَجْذُوذٍ: ऐसा उपहार जो कभी कटने वाला नहीं, अर्थात् निरंतर और अक्षय।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की ख़ुशख़बरी सुना रहा है जो दुनिया में ईमान और नेक अमल के ज़रिए अल्लाह की रहमत के हक़दार बने। ये वे लोग हैं जिनके लिए अल्लाह की तरफ से पहले ही सुख और भलाई लिख दी गई। ऐसे लोग जन्नत में दाखिल होंगे और वहाँ हमेशा हमेशा रहेंगे — जब तक आकाश और ज़मीन क़ायम हैं, यानी हमेशा के लिए।

इस आयत में एक इस्तिस्ना (अपवाद) का ज़िक्र है: "मगर जो आपका रब चाहे" — इसका मतलब यह है कि मोमिनों में से जो गुनाहगार होंगे, वे अपने गुनाहों की सज़ा के लिए कुछ समय जहन्नम में रहेंगे, लेकिन अंततः उन्हें भी अल्लाह की रहमत से जन्नत में दाखिल कर दिया जाएगा। यह अल्लाह की रहमत और उसकी मशीयत का एक पहलू है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि यह नेमत और इनाम ऐसा है जो कभी ख़त्म नहीं होगा, न कटेगा और न घटेगा। यह अल्लाह की तरफ से एक ऐसा अता (उपहार) है जो हमेशा जारी रहेगा — न उसका कोई अंत है और न उसमें कोई कमी आएगी। यह उन लोगों के लिए सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है जो अल्लाह पर ईमान लाए और नेक अमल किए।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की रहमत की उम्मीद: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत बहुत वसी (व्यापक) है। गुनाहगार मोमिन भी अल्लाह की रहमत से महरूम नहीं रहेंगे — उन्हें सज़ा के बाद जन्नत ज़रूर मिलेगी। इससे हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए।
  2. ईमान और नेक अमल की अहमियत: जन्नत पाने का रास्ता ईमान और नेक अमल है। जो लोग इस रास्ते पर चलेंगे, उनका अंजाम हमेशा की ख़ुशी और सुकून है।
  3. जन्नत की हमेशगी: दुनिया की हर चीज़ फ़ानी (नाशवान) है, लेकिन जन्नत की नेमतें हमेशा रहने वाली हैं। यह हमें दुनिया की चीज़ों से बेराग़ब करके आख़िरत की तैयारी की तरफ़ राग़िब करती है।
  4. अल्लाह की मशीयत का एहतिराम: हमें यह समझना चाहिए कि अल्लाह की मशीयत (इच्छा) सबसे ऊपर है। वह जिसे चाहे जन्नत दे और जिसे चाहे जहन्नम में डाल दे — उसका फ़ैसला ही अंतिम है। इससे हमारे दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ और उसकी रहमत की उम्मीद दोनों पैदा होते हैं।
  5. अल्लाह का अता कभी ख़त्म नहीं होता: अल्लाह जो देता है, उसमें कमी नहीं आती। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह से हमेशा माँगते रहना चाहिए, क्योंकि उसका ख़ज़ाना कभी ख़ाली नहीं होता।
🎧 सुनें

📜 आयत 106-110 — हूद

106فَأَمَّا الَّذِينَ شَقُوا فَفِي النَّارِ لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌ وَشَهِيقٌ
तो जो लोग बदबख्त है वह दोज़ख़ में होगें और उसी में उनकी हाए वाए और चीख़ पुकार होगी
107خَالِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ إِلَّا مَا شَاءَ رَبُّكَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ فَعَّالٌ لِّمَا يُرِيدُ
वह लोग जब तक आसमान और ज़मीन में है हमेशा उसी मे रहेगें मगर जब तुम्हारा परवरदिगार (नजात देना) चाहे बेशक तुम्हारा परवरदिगार जो चाहता है कर ही डालता है
108۞ وَأَمَّا الَّذِينَ سُعِدُوا فَفِي الْجَنَّةِ خَالِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ إِلَّا مَا شَاءَ رَبُّكَ ۖ عَطَاءً غَيْرَ مَجْذُوذٍ
और जो लोग नेक बख्त हैं वह तो बेहश्त में होगें (और) जब तक आसमान व ज़मीन (बाक़ी) है वह हमेशा उसी में रहेगें मगर जब तेरा परवरदिगार चाहे (सज़ा देकर आख़िर में जन्नत में ले जाए
109فَلَا تَكُ فِي مِرْيَةٍ مِّمَّا يَعْبُدُ هَٰؤُلَاءِ ۚ مَا يَعْبُدُونَ إِلَّا كَمَا يَعْبُدُ آبَاؤُهُم مِّن قَبْلُ ۚ وَإِنَّا لَمُوَفُّوهُمْ نَصِيبَهُمْ غَيْرَ مَنقُوصٍ
ये वह बख़्शिस है जो कभी मनक़तआ (खत्म) न होगी तो ये लोग (ख़ुदा के अलावा) जिसकी परसतिश करते हैं तुम उससे शक़ में न पड़ना ये लोग तो बस वैसी इबादत करते हैं जैसी उनसे पहले उनके बाप दादा करते थे और हम ज़रुर (क़यामत के दिन) उनको (अज़ाब का) पूरा पूरा हिस्सा बग़ैर कम किए देगें
110وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَاخْتُلِفَ فِيهِ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ ۚ وَإِنَّهُمْ لَفِي شَكٍّ مِّنْهُ مُرِيبٍ
और हमने मूसा को किताब तौरैत अता की तो उसमें (भी) झगड़े डाले गए और अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हुक्म कोइ पहले ही न हो चुका होता तो उनके दरमियान (कब का) फैसला यक़ीनन हो गया होता और ये लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) भी इस (क़ुरान) की तरफ से बहुत गहरे शक़ में पड़े हैं
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अनुवाद — हूद 108

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Tuesday, August 18, 2026

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