हूद · 109/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
فَلَا تَكُ فِي مِرْيَةٍ مِّمَّا يَعْبُدُ هَٰؤُلَاءِ ۚ مَا يَعْبُدُونَ إِلَّا كَمَا يَعْبُدُ آبَاؤُهُم مِّن قَبْلُ ۚ وَإِنَّا لَمُوَفُّوهُمْ نَصِيبَهُمْ غَيْرَ مَنقُوصٍ ۝١٠٩
Falaa taku fee miryatim mimmmaa ya`budu haaa`ulaaa`; maa ya`budoona illaa kamaa ya`budu aabaaa`uhum min qabl; wa innaa lamuwaf foohum naseebahum ghaira manqoos
📖 हिंदी अर्थ
ये वह बख़्शिस है जो कभी मनक़तआ (खत्म) न होगी तो ये लोग (ख़ुदा के अलावा) जिसकी परसतिश करते हैं तुम उससे शक़ में न पड़ना ये लोग तो बस वैसी इबादत करते हैं जैसी उनसे पहले उनके बाप दादा करते थे और हम ज़रुर (क़यामत के दिन) उनको (अज़ाब का) पूरा पूरा हिस्सा बग़ैर कम किए देगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مِرْيَةٍ: संदेह, भ्रम या शंका।
  • نَصِيبَهُمْ: उनका हिस्सा, यानी उनके लिए निर्धारित दंड या भाग्य।
  • غَيْرَ مَنقُوصٍ: बिना किसी कमी के, पूर्ण रूप से।

व्याख्या:

हे नबी! आप उन चीज़ों के बारे में किसी भी प्रकार के संदेह में न पड़ें जिन्हें ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) पूजते हैं। उनकी यह पूजा न तो किसी तर्क पर आधारित है और न ही किसी प्रमाण पर; बल्कि यह केवल उनके पूर्वजों की अंधी परंपरा की नकल है। वे उन्हीं माबूदों (पूज्यों) की पूजा करते हैं जिनकी उनसे पहले उनके बाप-दादे पूजा करते थे, बिना यह जाने कि यह सत्य है या असत्य। यह एक स्पष्ट भ्रम है, और आपको इसकी सत्यता के बारे में कोई शंका नहीं होनी चाहिए। हमने उनके लिए उनका पूरा हिस्सा (अर्थात उनके कर्मों का पूर्ण परिणाम) निर्धारित कर दिया है, जो उन्हें अवश्य मिलेगा—चाहे वह दुनिया में हो या आख़िरत में—बिना किसी कमी या कटौती के। यह आदेश केवल नबी के लिए नहीं, बल्कि पूरी उम्मत के लिए एक शिक्षा है कि सत्य पर दृढ़ रहें और बातिल (असत्य) के प्रति किसी भी प्रकार के संदेह से बचें।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. सत्य की पहचान तर्क और प्रमाण से होती है, न कि पूर्वजों की नकल से। इसलिए हमें हर मामले में कुरआन और सुन्नत को ही मापदंड बनाना चाहिए।
  2. अंधी परंपरा और पैतृक रीति-रिवाजों का पालन करना, जब वे सत्य के विरुद्ध हों, मानव को पथभ्रष्ट करता है। हमें सत्य को अपनाना चाहिए, भले ही वह हमारे समाज या परिवार की परंपराओं से अलग हो।
  3. अल्लाह का न्याय पूर्ण है—वह किसी के साथ अन्याय नहीं करता और हर कर्म का पूरा फल देता है। यह हमें आश्वस्त करता है कि बुराई का अंत अवश्य होगा और अच्छाई की जीत निश्चित है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य के मार्ग पर चलते समय किसी भी प्रकार के संदेह या झिझक से बचना चाहिए, क्योंकि अल्लाह का वादा सत्य है और उसकी सहायता अवश्य आती है।
🎧 सुनें

📜 आयत 107-111 — हूद

107خَالِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ إِلَّا مَا شَاءَ رَبُّكَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ فَعَّالٌ لِّمَا يُرِيدُ
वह लोग जब तक आसमान और ज़मीन में है हमेशा उसी मे रहेगें मगर जब तुम्हारा परवरदिगार (नजात देना) चाहे बेशक तुम्हारा परवरदिगार जो चाहता है कर ही डालता है
108۞ وَأَمَّا الَّذِينَ سُعِدُوا فَفِي الْجَنَّةِ خَالِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ إِلَّا مَا شَاءَ رَبُّكَ ۖ عَطَاءً غَيْرَ مَجْذُوذٍ
और जो लोग नेक बख्त हैं वह तो बेहश्त में होगें (और) जब तक आसमान व ज़मीन (बाक़ी) है वह हमेशा उसी में रहेगें मगर जब तेरा परवरदिगार चाहे (सज़ा देकर आख़िर में जन्नत में ले जाए
109فَلَا تَكُ فِي مِرْيَةٍ مِّمَّا يَعْبُدُ هَٰؤُلَاءِ ۚ مَا يَعْبُدُونَ إِلَّا كَمَا يَعْبُدُ آبَاؤُهُم مِّن قَبْلُ ۚ وَإِنَّا لَمُوَفُّوهُمْ نَصِيبَهُمْ غَيْرَ مَنقُوصٍ
ये वह बख़्शिस है जो कभी मनक़तआ (खत्म) न होगी तो ये लोग (ख़ुदा के अलावा) जिसकी परसतिश करते हैं तुम उससे शक़ में न पड़ना ये लोग तो बस वैसी इबादत करते हैं जैसी उनसे पहले उनके बाप दादा करते थे और हम ज़रुर (क़यामत के दिन) उनको (अज़ाब का) पूरा पूरा हिस्सा बग़ैर कम किए देगें
110وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَاخْتُلِفَ فِيهِ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ ۚ وَإِنَّهُمْ لَفِي شَكٍّ مِّنْهُ مُرِيبٍ
और हमने मूसा को किताब तौरैत अता की तो उसमें (भी) झगड़े डाले गए और अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हुक्म कोइ पहले ही न हो चुका होता तो उनके दरमियान (कब का) फैसला यक़ीनन हो गया होता और ये लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) भी इस (क़ुरान) की तरफ से बहुत गहरे शक़ में पड़े हैं
111وَإِنَّ كُلًّا لَّمَّا لَيُوَفِّيَنَّهُمْ رَبُّكَ أَعْمَالَهُمْ ۚ إِنَّهُ بِمَا يَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
और इसमें तो शक़ ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उनकी कारस्तानियों का बदला भरपूर देगा (क्योंकि) जो उनकी करतूतें हैं उससे वह खूब वाक़िफ है
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीRevelation
109आयत

अनुवाद — हूद 109

सूरा हूद आयत 109 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये वह बख़्शिस है जो कभी मनक़तआ (खत्म) न होगी…

सूरा आयत 109/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 107–111. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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