हूद · 107/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
خَالِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ إِلَّا مَا شَاءَ رَبُّكَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ فَعَّالٌ لِّمَا يُرِيدُ ۝١٠٧
Khaalideena feehaa maa daamatis samaawaatu wal ardu illaa maa shaaa`a Rabbuk; inna Rabbaka fa` `aalul limaa yureed
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग जब तक आसमान और ज़मीन में है हमेशा उसी मे रहेगें मगर जब तुम्हारा परवरदिगार (नजात देना) चाहे बेशक तुम्हारा परवरदिगार जो चाहता है कर ही डालता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَالِدِينَ فِيهَا: उसमें (आग में) हमेशा रहने वाले।
  • مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ: जब तक आकाश और धरती रहें (अर्थात सदैव)।
  • إِلَّا مَا شَاءَ رَبُكَ: परन्तु जो आपका रब चाहे (उसकी मर्ज़ी के अनुसार)।
  • فَعَّالٌ لِمَا يُرِيدُ: जो कुछ चाहता है, करता है (उसके आगे कोई रुकावट नहीं)।

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत उन लोगों के भाग्य का वर्णन कर रही है जिन्होंने दुनिया में कुफ्र और बुरे कर्मों का रास्ता अपनाया। उनके लिए आग (जहन्नम) ही उनका ठिकाना है। वे उसमें हमेशा रहेंगे, जब तक आकाश और धरती रहेंगे। यानी उनका अज़ाब कभी खत्म नहीं होगा और न ही उनकी मौत आएगी।

इस आयत में "إِلَّا مَا شَاءَ رَبُكَ" (परन्तु जो आपका रब चाहे) का ज़िक्र एक महत्वपूर्ण बात समझाता है। इसका मतलब यह है कि जो लोग एकेश्वरवाद (तौहीद) पर ईमान रखते थे, लेकिन उन्होंने कुछ बड़े गुनाह किए, वे हमेशा आग में नहीं रहेंगे। अल्लाह की मर्ज़ी से उन्हें कुछ समय बाद आग से निकाल लिया जाएगा। जहन्नम में हमेशा रहना केवल उन काफिरों के लिए है जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया और उसके साथ शिर्क किया।

आयत के अंत में कहा गया: "إِنَّ رَبَّكَ فَعَّالٌ لِّمَا يُرِيدُ" (निस्संदेह आपका रब जो चाहता है, करता है)। यह अल्लाह की पूर्ण शक्ति और उसकी इच्छा को बयान करता है। अल्लाह जो चाहता है, बिना किसी की राय या आपत्ति के करता है। उसके फैसले के आगे कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। वह जिसे चाहे माफ कर दे और जिसे चाहे अज़ाब में डाल दे, और उसका हर काम हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित है।


फायदे और शिक्षाएँ:

  1. अल्लाह की मर्ज़ी का सम्मान: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की इच्छा के आगे किसी को कोई अधिकार नहीं। वह जो चाहता है, करता है, और उसके फैसले में कोई दखल नहीं दे सकता। यह हमारे अंदर अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव पैदा करता है।
  2. गुनाहगार मोमिनों के लिए उम्मीद: यह आयत उन मुसलमानों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है जिन्होंने गुनाह किए हैं। उन्हें यह उम्मीद दिलाई गई है कि अल्लाह की रहमत से वे हमेशा आग में नहीं रहेंगे। यह उन्हें निराशा से बचाता है और तौबा की तरफ ले जाता है।
  3. कुफ्र और शिर्क का खतरा: यह आयत साफ करती है कि कुफ्र और शिर्क ही वह चीज़ें हैं जो इंसान को हमेशा के लिए जहन्नम में डाल देती हैं। इसलिए हमें इन बड़ी बुराइयों से बचना चाहिए और अपने ईमान की हिफाज़त करनी चाहिए।
  4. अल्लाह की शक्ति का एहसास: "فَعَّالٌ لِمَا يُرِيدُ" हमें याद दिलाता है कि अल्लाह की ताकत असीमित है। उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं। यह हमारे दिल में अल्लाह की अज़मत का एहसास पैदा करता है और हमें उसकी इबादत में सच्चाई लाने की तरफ प्रेरित करता है।
  5. आख़िरत की हकीकत: यह आयत हमें आख़िरत के दिन की याद दिलाती है और बताती है कि हमारे कर्मों का अंजाम ज़रूर मिलेगा। यह हमें दुनिया की ज़िंदगी में सही रास्ते पर चलने की तरफ रहनुमाई करती है।


📜 आयत 105-109 — हूद

105يَوْمَ يَأْتِ لَا تَكَلَّمُ نَفْسٌ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ فَمِنْهُمْ شَقِيٌّ وَسَعِيدٌ
जिस दिन वह आ पहुँचेगा तो बग़ैर हुक्मे ख़ुदा कोई शख़्श बात भी तो नहीं कर सकेगा फिर कुछ लोग उनमे से बदबख्त होगें और कुछ लोग नेक बख्त
106فَأَمَّا الَّذِينَ شَقُوا فَفِي النَّارِ لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌ وَشَهِيقٌ
तो जो लोग बदबख्त है वह दोज़ख़ में होगें और उसी में उनकी हाए वाए और चीख़ पुकार होगी
107خَالِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ إِلَّا مَا شَاءَ رَبُّكَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ فَعَّالٌ لِّمَا يُرِيدُ
वह लोग जब तक आसमान और ज़मीन में है हमेशा उसी मे रहेगें मगर जब तुम्हारा परवरदिगार (नजात देना) चाहे बेशक तुम्हारा परवरदिगार जो चाहता है कर ही डालता है
108۞ وَأَمَّا الَّذِينَ سُعِدُوا فَفِي الْجَنَّةِ خَالِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ إِلَّا مَا شَاءَ رَبُّكَ ۖ عَطَاءً غَيْرَ مَجْذُوذٍ
और जो लोग नेक बख्त हैं वह तो बेहश्त में होगें (और) जब तक आसमान व ज़मीन (बाक़ी) है वह हमेशा उसी में रहेगें मगर जब तेरा परवरदिगार चाहे (सज़ा देकर आख़िर में जन्नत में ले जाए
109فَلَا تَكُ فِي مِرْيَةٍ مِّمَّا يَعْبُدُ هَٰؤُلَاءِ ۚ مَا يَعْبُدُونَ إِلَّا كَمَا يَعْبُدُ آبَاؤُهُم مِّن قَبْلُ ۚ وَإِنَّا لَمُوَفُّوهُمْ نَصِيبَهُمْ غَيْرَ مَنقُوصٍ
ये वह बख़्शिस है जो कभी मनक़तआ (खत्म) न होगी तो ये लोग (ख़ुदा के अलावा) जिसकी परसतिश करते हैं तुम उससे शक़ में न पड़ना ये लोग तो बस वैसी इबादत करते हैं जैसी उनसे पहले उनके बाप दादा करते थे और हम ज़रुर (क़यामत के दिन) उनको (अज़ाब का) पूरा पूरा हिस्सा बग़ैर कम किए देगें
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Tuesday, August 18, 2026

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