Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آيَةٍ: निशानी, चमत्कार, प्रमाण
- قِبْلَة: वह दिशा जिसकी ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ी जाए
- أَهْوَاء: मनमानी इच्छाएँ, व्यक्तिगत ख्वाहिशें
- الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, जो अपनी जगह से हटकर दूसरी जगह रखें
विस्तृत तफ़सीर:
ऐ नबी! अल्लाह तआला आपको बताता है कि यदि आप अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) के पास हर तरह की निशानी, हर चमत्कार और हर वह प्रमाण ले आएँ जो यह साबित करता हो कि काबा की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ना ही सत्य और अल्लाह की ओर से आदेश है, तो भी वे आपकी क़िबला को नहीं अपनाएँगे। यह उनकी ज़िद, हठधर्मिता और अहंकार के कारण है, न कि प्रमाणों की कमी के कारण। वे सत्य को जानते हुए भी उसे अस्वीकार करते हैं।
और आप भी उनकी क़िबला को कभी नहीं अपनाएँगे, क्योंकि अल्लाह ने आपको सत्य का मार्ग दिखा दिया है और आपको काबा की ओर मोड़ दिया है। यही सच्ची क़िबला है। उनकी क़िबलाएँ तो आपस में भी एक-दूसरे से अलग हैं — यहूदी बैतुल-मुक़द्दस की ओर मुँह करते हैं, ईसाई पूर्व की ओर, और वे स्वयं आपस में एक-दूसरे की क़िबला को नहीं मानते। उनकी आपस में भी कोई एकता नहीं है, फिर वे आपको अपनी ओर कैसे खींच सकते हैं?
फिर अल्लाह तआला एक सख्त चेतावनी देता है — यदि आप उनकी मनमानी इच्छाओं और ख्वाहिशों का पालन करेंगे, उनकी बातों को मानेंगे, उनके झुकावों को अपनाएँगे — उस सत्य ज्ञान के बाद जो आपके पास आ चुका है कि काबा ही सच्ची क़िबला है और इस्लाम ही सच्चा दीन है — तो निश्चित रूप से आप अत्याचारियों में से होंगे। यानी जो सत्य को जानकर उसे छोड़ दे, वह अपने ऊपर अत्याचार करता है।
यह चेतावनी वास्तव में पूरी उम्मत के लिए है। अल्लाह ने अपने नबी को इससे पाक और महफूज़ रखा है, लेकिन यह संदेश हर उस व्यक्ति के लिए है जो सत्य को जानने के बाद भी गलत रास्तों पर चलता है, जो अल्लाह के आदेशों को छोड़कर दूसरों की इच्छाओं को प्राथमिकता देता है।
दीनी पैग़ाम:
यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को पहचानने के बाद उस पर दृढ़ रहना चाहिए। दुनिया की कोई ताकत, कोई दबाव, कोई प्रलोभन हमें सत्य से नहीं हटा सकता। अल्लाह का दीन स्पष्ट है, उसके आदेश स्पष्ट हैं — हमें किसी की खुशामद या डर से अपने ईमान से समझौता नहीं करना चाहिए। जो लोग सत्य को जानकर भी उसे छोड़ते हैं, वे अपनी आत्मा पर अत्याचार करते हैं। अल्लाह हमें सत्य पर स्थिर रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 143-147 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 145
सूरा अल-बकरा आयत 145 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर अहले किताब के सामने दुनिया की सारी दलीले…सूरा आयत 145/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 143–147. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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