Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَيَّامًا مَّعْدُودَاتٍ: गिनी हुईं (निश्चित संख्या वाली) दिन।
- يُطِيقُونَهُ: जो इसे (रोज़ा) सहन कर सकते हैं, यानी जिन पर रोज़ा रखना संभव है लेकिन बहुत कठिन है।
- فِدْيَةٌ: मुआवज़ा, बदला।
- تَطَوَّعَ خَيْرًا: नेकी में अतिरिक्त बढ़ोतरी की (जैसे एक से ज़्यादा मिस्कीन को खाना खिलाना)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने शुरुआत में रोज़े को सिर्फ़ गिनी हुईं यानी कुछ ही दिनों के लिए फ़र्ज़ किया, जो बाद में पूरे रमज़ान के महीने के लिए मुक़र्रर कर दिया गया। यह आसानी और रहमत वाला हुक्म है। अगर कोई शख्स बीमार हो और उसे रोज़ा रखने में सख्त मुश्किल हो, या फिर वह सफर (यात्रा) पर हो, तो उसे इजाज़त है कि वह रोज़ा न रखे, लेकिन उसे चाहिए कि बाद में उन छूटे हुए दिनों की गिनती के बराबर दूसरे दिनों में रोज़े रखकर क़ज़ा कर ले। यह अल्लाह की तरफ से आसानी है, ताकि बंदे पर मुश्किल न पड़े।
इसके अलावा, जो लोग रोज़ा रखने की ताकत तो रखते हैं, लेकिन उन्हें सख्त मशक्कत और तकलीफ होती है — जैसे बहुत बूढ़े लोग या ऐसे बीमार जिनके ठीक होने की उम्मीद न हो — वे रोज़ा छोड़ सकते हैं, लेकिन हर रोज़े के बदले एक मिस्कीन (गरीब) को खाना खिलाएं। यह फ़िद्या है। अगर कोई शख्स नेकी की ख्वाहिश से एक से ज़्यादा मिस्कीन को खाना खिलाए या ज़रूरत से ज़्यादा दे, तो यह उसके लिए बेहतर है और अल्लाह के यहाँ उसे ज़्यादा अज्र मिलेगा।
लेकिन अल्लाह तआला साफ़ फ़रमाता है कि अगर तुम समझो तो रोज़ा रखना ही तुम्हारे लिए फ़िद्या देने से बेहतर है। इसलिए कि रोज़े में बड़ी बरकत, रूहानी तरक़्क़ी, गुनाहों से पाकी और अल्लाह की रज़ा हासिल करने का ज़रिया है। रोज़ा सिर्फ़ भूखा रहना नहीं, बल्कि यह तक़्वा और परहेज़गारी की तालीम है, जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।
याद रखिए, यह हुक्म शुरुआती दौर में था कि लोगों को इख़्तियार दिया गया था — चाहें रोज़ा रखें या फ़िद्या दें। लेकिन बाद में अल्लाह ने इसे मंसूख़ (रद्द) करके रोज़े को हर बालिग़ और ताक़तवर मुसलमान पर फ़र्ज़ कर दिया, जैसा कि अगली आयत में बयान होगा। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने अपने बंदों पर आसानी की और उन्हें तरक़्क़ी की राह दिखाई।
📜 आयत 182-186 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 184
सूरा अल-बकरा आयत 184 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (वह भी हमेशा नहीं बल्कि) गिनती के चन्द रोज़ इस…सूरा आयत 184/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 182–186. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


