Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- कुतिबा (كُتِبَ): फ़र्ज़ किया गया, अनिवार्य किया गया।
- अस-सियाम (الصِّيَام): रोज़ा रखना, यानी सुबह सादिक़ से सूर्यास्त तक खाने-पीने और अन्य रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों से बचना।
- अल्लज़ीना मिन क़ब्लिकुम (الَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ): वे उम्मतें जो तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं, यानी पिछले नबियों और उनकी उम्मतों के लोग।
- तत्तक़ून (تَتَّقُونَ): तक़वा अपनाना, यानी अल्लाह के अज़ाब से बचने के लिए उसकी नाफ़रमानी से परहेज़ करना और उसकी इताअत करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान लाने वालों! जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल को दिल से माना और उसके हुक्मों पर अमल करने का अहद किया! अल्लाह ने तुम पर रोज़ा फ़र्ज़ किया है, जैसे उसने तुमसे पहले गुज़री हुई उम्मतों पर फ़र्ज़ किया था। यह कोई नया हुक्म नहीं है, बल्कि यह उसी राह का हिस्सा है जिस पर अल्लाह ने अपने सारे नबियों की उम्मतों को चलाया है। हज़रत आदम से लेकर हमारे नबी मुहम्मद ﷺ तक, रोज़ा हर शरीअत में इबादत का एक अहम हिस्सा रहा है। यह बात ईमानवालों के लिए तसल्ली और हौसले की है कि हम अकेले नहीं हैं, बल्कि अल्लाह की राह पर चलने वालों की एक लंबी क़तार का हिस्सा हैं।
यह फ़र्ज़ इसलिए किया गया ताकि तुम तक़वा हासिल करो। तक़वा यानी अल्लाह की नाराज़गी और अज़ाब से बचने के लिए अपने आपको गुनाहों से रोकना और नेक कामों को अपनाना। रोज़ा तक़वा का सबसे बड़ा ज़रिया है, क्योंकि इससे इंसान की नफ्सानी ख्वाहिशात पर लगाम लगती है। जब इंसान भूखा-प्यासा रहता है तो उसे अपने रब की नज़दीकी का एहसास होता है, उसकी नेअमतों की क़द्र होती है, और वह गुनाहों से दूर रहने की ताक़त पाता है। रोज़ा सिर्फ़ पेट का नहीं, बल्कि आँख, कान, ज़ुबान और दिल का भी रोज़ा है — यानी हर उस चीज़ से बचना जो अल्लाह को नापसंद है।
यह भी याद रखो कि रोज़ा तुम्हारे लिए बोझ नहीं, बल्कि रहमत है। यह तुम्हें पाकीज़गी की तरफ़ ले जाता है, तुम्हारे दिल को नूर से भर देता है, और तुम्हें उस मुक़ाम पर पहुँचाता है जहाँ अल्लाह की मोहब्बत और उसकी रज़ा हासिल होती है। जो शख्स रोज़े की हक़ीक़त को समझकर रोज़ा रखता है, वह दुनिया में भी इज़्ज़त पाता है और आख़िरत में भी कामयाब होता है। अल्लाह ने यह इबादत इसलिए फ़र्ज़ की ताकि तुम उसके करीब आओ, उसकी रहमत के साये में जीओ, और उसकी तरफ से मिलने वाली हिदायत और बरकत से नवाज़े जाओ।
📜 आयत 181-185 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 183
सूरा अल-बकरा आयत 183 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों रोज़ा रखना जिस तरह तुम से पहले के…सूरा आयत 183/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 181–185. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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