अन-नूर · 1/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
سُورَةٌ أَنزَلْنَاهَا وَفَرَضْنَاهَا وَأَنزَلْنَا فِيهَا آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ لَّعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ ۝١
Sooratun anzalnaahaa wa faradnaahaa wa anzalnaa feehaaa Aayaatim baiyinaatil la`allakum tazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
(ये) एक सूरा है जिसे हमने नाज़िल किया है और उस (के एहक़ाम) को फर्ज क़र दिया है और इसमें हमने वाज़ेए व रौशन आयतें नाज़िल की हैं ताकि तुम (ग़ौर करके) नसीहत हासिल करो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سُورَةٌ أَنْزَلْنَاهَا – यह एक महान सूरह है जिसे हमने उतारा।
  • وَفَرَضْنَاهَا – और हमने इसके आदेशों को अनिवार्य (फ़र्ज़) किया।
  • آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ – स्पष्ट और प्रत्यक्ष निशानियाँ (आयतें)।
  • لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ – ताकि तुम शिक्षा ग्रहण करो और याद रखो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह पवित्र आयत हमें बताती है कि यह सूरह (सूरह अन-नूर) अल्लाह तआला की ओर से उतारी गई एक महान सूरह है। अल्लाह ने इस सूरह को इसलिए उतारा ताकि मुसलमानों के जीवन को रोशनी मिले, क्योंकि "नूर" का अर्थ ही प्रकाश है। इस सूरह में अल्लाह ने कई अनिवार्य आदेश दिए हैं, जैसे पवित्रता, शुद्धता, गवाही, पर्दा (हिजाब), और सामाजिक नियम — ये सब फ़र्ज़ (अनिवार्य) हैं, यानी हर मुसलमान पर इन्हें मानना लाज़िमी है।

अल्लाह ने इस सूरह में स्पष्ट आयतें उतारीं जो सत्य और असत्य के बीच अंतर साफ़ करती हैं। ये आयतें न केवल मार्गदर्शन देती हैं बल्कि इंसान को बुराई से बचाने और अच्छाई की ओर ले जाने का ज़रिया हैं। अल्लाह का उद्देश्य यह है कि हम इन आयतों पर गहराई से विचार करें, उनसे सबक़ सीखें, और अपने जीवन को इनके अनुसार ढालें।

यह आयत हमें याद दिलाती है कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने के लिए उतारा गया है। जब हम इस सूरह के आदेशों को अपनाते हैं, तो हमारा जीवन पवित्र, सुरक्षित और अल्लाह की रहमत से भर जाता है। अल्लाह ने जो आदेश दिए हैं, वे हमारी भलाई के लिए हैं — वह हमें अंधेरे से निकालकर रोशनी की ओर ले जाना चाहता है।

इसलिए, हमें चाहिए कि इस सूरह को पढ़ें, समझें, और इसकी शिक्षाओं पर अमल करें। यही अल्लाह की राह है, और यही हमारी कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह तआला हम सबको इस सूरह की बरकत से अपने करीब लाए और हमें सच्चे मुसलमान बनाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-3 — अन-नूर

1سُورَةٌ أَنزَلْنَاهَا وَفَرَضْنَاهَا وَأَنزَلْنَا فِيهَا آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ لَّعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
(ये) एक सूरा है जिसे हमने नाज़िल किया है और उस (के एहक़ाम) को फर्ज क़र दिया है और इसमें हमने वाज़ेए व रौशन आयतें नाज़िल की हैं ताकि तुम (ग़ौर करके) नसीहत हासिल करो
2الزَّانِيَةُ وَالزَّانِي فَاجْلِدُوا كُلَّ وَاحِدٍ مِّنْهُمَا مِائَةَ جَلْدَةٍ ۖ وَلَا تَأْخُذْكُم بِهِمَا رَأْفَةٌ فِي دِينِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ تُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ ۖ وَلْيَشْهَدْ عَذَابَهُمَا طَائِفَةٌ مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ
़ज़िना करने वाली औरत और ज़िना करने वाले मर्द इन दोनों में से हर एक को सौ (सौ) कोडे मारो और अगर तुम ख़ुदा और रोजे अाख़िरत पर ईमान रखते हो तो हुक्मे खुदा के नाफिज़ करने में तुमको उनके बारे में किसी तरह की तरस का लिहाज़ न होने पाए और उन दोनों की सज़ा के वक्त मोमिन की एक जमाअत को मौजूद रहना चाहिए
3الزَّانِي لَا يَنكِحُ إِلَّا زَانِيَةً أَوْ مُشْرِكَةً وَالزَّانِيَةُ لَا يَنكِحُهَا إِلَّا زَانٍ أَوْ مُشْرِكٌ ۚ وَحُرِّمَ ذَٰلِكَ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ
ज़िना करने वाला मर्द तो ज़िना करने वाली औरत या मुशरिका से निकाह करेगा और ज़िना करने वाली औरत भी बस ज़िना करने वाले ही मर्द या मुशरिक से निकाह करेगी और सच्चे ईमानदारों पर तो इस क़िस्म के ताल्लुक़ात हराम हैं
अन-नूरकुरान सूची
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अनुवाद — अन-नूर 1

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Tuesday, August 18, 2026

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