अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قِيَامًا وَقُعُودًا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمْ: खड़े होकर, बैठकर और करवटों के बल लेटे हुए — यानी हर हालत में।
- يَتَفَكَّرُونَ: गहराई से सोचते-विचारते हैं, चिंतन-मनन करते हैं।
- بَاطِلًا: बेकार, व्यर्थ, बिना किसी उद्देश्य के।
- سُبْحَانَكَ: आप पाक-पवित्र हैं, हर ऐब और कमी से मुक्त हैं।
- فَقِنَا: हमें बचा लीजिए, हिफ़ाज़त फ़रमा दीजिए।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन नेक बंदों का वर्णन करती है जिन्हें अल्लाह ने अपनी रहमत से नवाज़ा है। ये वे लोग हैं जो अल्लाह को हर हालत में याद करते हैं — चाहे वे खड़े हों, बैठे हों या लेटे हुए हों। उनका दिल, उनकी ज़ुबान और उनका पूरा वजूद अल्लाह के ज़िक्र में डूबा रहता है। वे सिर्फ़ ज़ुबान से ही नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों से अल्लाह को याद करते हैं, और यही उनकी पहचान है।
इन बंदों की एक और खूबी यह है कि वे अल्लाह की बनाई हुई इस कायनात पर गहराई से सोचते-विचारते हैं। जब वे आसमानों की बुलंदियों, सितारों की रौशनी, ज़मीन की फ़राग़त, पहाड़ों की मज़बूती, समंदरों की गहराई और हर चीज़ में छिपी हिकमत को देखते हैं, तो उनका दिल ख़ुद-ब-ख़ुद अल्लाह की अज़मत के सामने झुक जाता है। वे इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि यह सब कुछ यूँ ही नहीं बनाया गया — इसके पीछे एक बड़ी हिकमत और एक अज़ीम मक़सद है।
फिर वे दुआ करते हैं: "ऐ हमारे रब! तूने यह सब कुछ बेकार और व्यर्थ नहीं बनाया। तू हर ऐब से पाक है, तू बिल्कुल हक़ीम (बुद्धिमान) है। हम तेरी पाकी बयान करते हैं और तुझसे दुआ करते हैं कि हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचा ले।"
यह दुआ उनके ईमान की गहराई को दिखाती है — वे सिर्फ़ अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर ही नहीं करते, बल्कि उसके अज़ाब से भी डरते हैं और उसकी रहमत की तरफ़ दौड़ते हैं। वे जानते हैं कि यह दुनिया आख़िरत की खेती है, और वे अपने रब से जहन्नुम की आग से निजात की भीख माँगते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की याद किसी एक हालत तक महदूद नहीं है — हमें हर वक़्त, हर जगह, हर हालत में अल्लाह को याद रखना चाहिए। चाहे हम काम कर रहे हों, चल रहे हों, बैठे हों या लेटे हों — हमारा दिल अल्लाह की याद से जुड़ा रहे। यही वो रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत के क़रीब ले जाता है और हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचाता है।
साथ ही, यह आयत हमें प्रकृति और कायनात पर चिंतन-मनन की तरफ़ बुलाती है। जो लोग इस कायनात को ग़ौर से देखते हैं, वे कभी अल्लाह को भूल नहीं सकते। हर पत्ता, हर तारा, हर लहर — सब कुछ अल्लाह की कुदरत की निशानी है। यह चिंतन हमारे ईमान को मज़बूत करता है और हमें अल्लाह के क़रीब लाता है।
आइए हम भी इन नेक बंदों की तरह बनें — अल्लाह को हर हालत में याद करें, उसकी कायनात पर ग़ौर करें, और उससे जहन्नुम के अज़ाब से बचने की दुआ करें। यही वो रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह हमें इस तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 189-193 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 191
सूरा आल-इमरान आयत 191 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो लोग उठते बैठते करवट लेते (अलगरज़ हर हाल में)…सूरा आयत 191/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 189–193. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








