आल-इमरान · 191/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
الَّذِينَ يَذْكُرُونَ اللَّهَ قِيَامًا وَقُعُودًا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ فِي خَلْقِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَاطِلًا سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ ۝١٩١
Allazeena yazkuroonal laaha qiyaamaiw-wa qu`oodanw-wa `alaa juno obihim wa yatafakkaroona fee khalqis samaawaati wal ardi Rabbanaa maa khalaqta haaza baatilan Subhaanak faqinaa `azaaban Naar
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग उठते बैठते करवट लेते (अलगरज़ हर हाल में) ख़ुदा का ज़िक्र करते हैं और आसमानों और ज़मीन की बनावट में ग़ौर व फ़िक्र करते हैं और (बेसाख्ता) कह उठते हैं कि ख़ुदावन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़क के अज़ाब से बचा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قِيَامًا وَقُعُودًا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمْ: खड़े होकर, बैठकर और करवटों के बल लेटे हुए — यानी हर हालत में।
  • يَتَفَكَّرُونَ: गहराई से सोचते-विचारते हैं, चिंतन-मनन करते हैं।
  • بَاطِلًا: बेकार, व्यर्थ, बिना किसी उद्देश्य के।
  • سُبْحَانَكَ: आप पाक-पवित्र हैं, हर ऐब और कमी से मुक्त हैं।
  • فَقِنَا: हमें बचा लीजिए, हिफ़ाज़त फ़रमा दीजिए।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन नेक बंदों का वर्णन करती है जिन्हें अल्लाह ने अपनी रहमत से नवाज़ा है। ये वे लोग हैं जो अल्लाह को हर हालत में याद करते हैं — चाहे वे खड़े हों, बैठे हों या लेटे हुए हों। उनका दिल, उनकी ज़ुबान और उनका पूरा वजूद अल्लाह के ज़िक्र में डूबा रहता है। वे सिर्फ़ ज़ुबान से ही नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों से अल्लाह को याद करते हैं, और यही उनकी पहचान है।

इन बंदों की एक और खूबी यह है कि वे अल्लाह की बनाई हुई इस कायनात पर गहराई से सोचते-विचारते हैं। जब वे आसमानों की बुलंदियों, सितारों की रौशनी, ज़मीन की फ़राग़त, पहाड़ों की मज़बूती, समंदरों की गहराई और हर चीज़ में छिपी हिकमत को देखते हैं, तो उनका दिल ख़ुद-ब-ख़ुद अल्लाह की अज़मत के सामने झुक जाता है। वे इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि यह सब कुछ यूँ ही नहीं बनाया गया — इसके पीछे एक बड़ी हिकमत और एक अज़ीम मक़सद है।

फिर वे दुआ करते हैं: "ऐ हमारे रब! तूने यह सब कुछ बेकार और व्यर्थ नहीं बनाया। तू हर ऐब से पाक है, तू बिल्कुल हक़ीम (बुद्धिमान) है। हम तेरी पाकी बयान करते हैं और तुझसे दुआ करते हैं कि हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचा ले।"

यह दुआ उनके ईमान की गहराई को दिखाती है — वे सिर्फ़ अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर ही नहीं करते, बल्कि उसके अज़ाब से भी डरते हैं और उसकी रहमत की तरफ़ दौड़ते हैं। वे जानते हैं कि यह दुनिया आख़िरत की खेती है, और वे अपने रब से जहन्नुम की आग से निजात की भीख माँगते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की याद किसी एक हालत तक महदूद नहीं है — हमें हर वक़्त, हर जगह, हर हालत में अल्लाह को याद रखना चाहिए। चाहे हम काम कर रहे हों, चल रहे हों, बैठे हों या लेटे हों — हमारा दिल अल्लाह की याद से जुड़ा रहे। यही वो रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत के क़रीब ले जाता है और हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचाता है।

साथ ही, यह आयत हमें प्रकृति और कायनात पर चिंतन-मनन की तरफ़ बुलाती है। जो लोग इस कायनात को ग़ौर से देखते हैं, वे कभी अल्लाह को भूल नहीं सकते। हर पत्ता, हर तारा, हर लहर — सब कुछ अल्लाह की कुदरत की निशानी है। यह चिंतन हमारे ईमान को मज़बूत करता है और हमें अल्लाह के क़रीब लाता है।

आइए हम भी इन नेक बंदों की तरह बनें — अल्लाह को हर हालत में याद करें, उसकी कायनात पर ग़ौर करें, और उससे जहन्नुम के अज़ाब से बचने की दुआ करें। यही वो रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह हमें इस तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 189-193 — आल-इमरान

189وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और आसमान व ज़मीन सब ख़ुदा ही का मुल्क है और ख़ुदा ही हर चीज़ पर क़ादिर है
190إِنَّ فِي خَلْقِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَاخْتِلَافِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ لَآيَاتٍ لِّأُولِي الْأَلْبَابِ
इसमें तो शक ही नहीं कि आसमानों और ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के फेर बदल में अक्लमन्दों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियॉ हैं
191الَّذِينَ يَذْكُرُونَ اللَّهَ قِيَامًا وَقُعُودًا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ فِي خَلْقِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَاطِلًا سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
जो लोग उठते बैठते करवट लेते (अलगरज़ हर हाल में) ख़ुदा का ज़िक्र करते हैं और आसमानों और ज़मीन की बनावट में ग़ौर व फ़िक्र करते हैं और (बेसाख्ता) कह उठते हैं कि ख़ुदावन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़क के अज़ाब से बचा
192رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं
193رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلْإِيمَانِ أَنْ آمِنُوا بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا ۚ رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْأَبْرَارِ
ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए पस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले
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अनुवाद — आल-इमरान 191

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सूरा आयत 191/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 189–193. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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