Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَلْقِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ: आकाशों और धरती की रचना (बिना किसी पूर्व नमूने के, शून्य से पैदा करना)।
- اخْتِلَافِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ: रात और दिन का एक-दूसरे के पीछे आना-जाना, और उनका लंबा-छोटा होना।
- لَآيَاتٍ: बड़े निशान और प्रमाण।
- لِأُولِي الْأَلْبَابِ: उन लोगों के लिए जो बुद्धि और समझ रखते हैं (स्वस्थ दिमाग वाले)।
विस्तृत व्याख्या:
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और एकता की ओर संकेत करते हुए कहता है कि आकाशों और धरती की रचना — जो बिना किसी सांचे या पूर्व नमूने के शून्य से की गई है, और रात तथा दिन का बारी-बारी से आना, उनका लंबा और छोटा होना, कभी रात बड़ी होना और दिन छोटा, तो कभी इसका उलट — ये सब चीज़ें उन लोगों के लिए स्पष्ट प्रमाण और निशानियाँ हैं जिनके पास सही अक्ल और समझ है। ये निशानियाँ उन्हें इस बात की ओर मार्गदर्शन करती हैं कि इस कायनात का कोई ख़ालिक़ (रचयिता) है, जो अकेला है, जिसकी शक्ति असीमित है, और वही इबादत (पूजा) के योग्य है। जो व्यक्ति इन प्राकृतिक घटनाओं पर गहराई से विचार करता है, वह अपनी बुद्धि से यह निष्कर्ष निकालता है कि यह सब कुछ अपने आप नहीं बना, बल्कि एक सर्वशक्तिमान रचयिता की कृति है।
इस आयत से मिलने वाले लाभ:
- ईमान की मज़बूती: यह आयत हमें सिखाती है कि कायनात की हर चीज़ अल्लाह की वजूद (अस्तित्व) और उसकी एकता की गवाह है। जब हम आसमान, ज़मीन, रात और दिन के बदलाव को देखते हैं, तो हमारा ईमान और पुख्ता होता है।
- चिंतन और विचार की प्रेरणा: अल्लाह ने इंसान को अक्ल दी है ताकि वह इन निशानियों पर ग़ौर करे। यह आयत हमें बताती है कि सच्चा ज्ञान और समझ वही है जो इंसान को अल्लाह की ओर ले जाए।
- इबादत में एकाग्रता: जब इंसान इन अद्भुत रचनाओं को देखता है, तो उसका दिल अल्लाह की इबादत की ओर झुकता है और वह अपने रब के सामने नम्र होता है।
- जीवन में उद्देश्य की समझ: यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया बेकार नहीं बनाई गई, बल्कि इसके पीछे एक बुद्धिमानी भरा उद्देश्य है — अल्लाह को पहचानना और उसकी इबादत करना।
- विज्ञान और धर्म का सामंजस्य: यह आयत बताती है कि जो लोग ब्रह्मांड की संरचना और प्राकृतिक नियमों का अध्ययन करते हैं, वे जितना गहराई में जाते हैं, उतना ही अल्लाह की महानता के करीब पहुँचते हैं। इस्लाम ज्ञान और विज्ञान को प्रोत्साहित करता है, बशर्ते वह अल्लाह की पहचान की ओर ले जाए।
📜 आयत 188-192 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 190
सूरा आल-इमरान आयत 190 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें तो शक ही नहीं कि आसमानों और ज़मीन की…सूरा आयत 190/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 188–192. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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