ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
تُدْخِلِ النَّارَ: जिसे तू आग में डाल दे।
أَخْزَيْتَهُ: तूने उसे अपमानित और रुसवा कर दिया।
الظَّالِمِينَ: अत्याचारियों से अभिप्राय यहाँ उन लोगों से है जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किया, अर्थात् कुफ्र और गुनाहों से अपने आपको आग का हक़दार बनाया।
أَنصَارٍ: सहायक, मददगार।
तफ़सीर:
यह दुआ उन पुण्यात्माओं की है जो अपने रब से आग से नजात की फ़रियाद कर रहे हैं। वे कहते हैं: "ऐ हमारे रब! जिसे तूने आग में डाल दिया, उसे तूने सचमुच अपमानित और रुसवा कर दिया।" यानी आग में डालना सबसे बड़ी रुसवाई और ज़िल्लत है, क्योंकि वहाँ कोई इज़्ज़त, कोई ओहदा और कोई रिश्ता काम नहीं आता।
फिर वे कहते हैं: "और अत्याचारियों का कोई सहायक नहीं होता।" यानी जो लोग अपने ऊपर ज़ुल्म करके कुफ्र और गुनाहों का रास्ता अपनाते हैं, उनके लिए क़ियामत के दिन कोई मददगार नहीं होगा जो उन्हें अल्लाह की पकड़ से बचा सके। न कोई सिफ़ारिशी, न कोई भाई, न कोई रिश्तेदार — सब उनसे बेज़ार होंगे। यह उनके लिए सबसे बड़ी निराशा और हार का दिन होगा।
फ़ायदे:
यह आयत हमें सिखाती है कि दुआ में आग से बचने की फ़रियाद करना बहुत बड़ी नेमत है, और यही पैग़म्बरों और नेक लोगों की सुन्नत रही है।
हमें यह समझाती है कि आग का अज़ाब सिर्फ़ शारीरिक तकलीफ़ नहीं, बल्कि रुसवाई और अपमान भी है — यानी वहाँ इंसान की इज़्ज़त छीन ली जाती है।
यह आयत हमें ज़ुल्म से बचने की तरग़ीब देती है — चाहे वह ज़ुल्म किसी और पर हो या ख़ुद अपनी जान पर (गुनाह करके)।
यह बताती है कि क़ियामत के दिन कोई भी इंसानी रिश्ता, कोई भी दुनियावी ताक़त काम नहीं आएगी; सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसकी मर्ज़ी ही बचा सकती है।
इससे मोमिन के दिल में ख़ौफ़ पैदा होता है और वह अपने अमल को सुधारने की कोशिश करता है, ताकि आग से बच सके और जन्नत का हक़दार बन सके।
जो लोग उठते बैठते करवट लेते (अलगरज़ हर हाल में) ख़ुदा का ज़िक्र करते हैं और आसमानों और ज़मीन की बनावट में ग़ौर व फ़िक्र करते हैं और (बेसाख्ता) कह उठते हैं कि ख़ुदावन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़क के अज़ाब से बचा
ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए पस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले
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