आल-इमरान · 192/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ ۝١٩٢
Rabbanaaa innaka man tudkhilin Naara faqad akhzai tahoo wa maa lizzaalimeena min ansaar
📖 हिंदी अर्थ
ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تُدْخِلِ النَّارَ: जिसे तू आग में डाल दे।
  • أَخْزَيْتَهُ: तूने उसे अपमानित और रुसवा कर दिया।
  • الظَّالِمِينَ: अत्याचारियों से अभिप्राय यहाँ उन लोगों से है जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किया, अर्थात् कुफ्र और गुनाहों से अपने आपको आग का हक़दार बनाया।
  • أَنصَارٍ: सहायक, मददगार।

तफ़सीर:

यह दुआ उन पुण्यात्माओं की है जो अपने रब से आग से नजात की फ़रियाद कर रहे हैं। वे कहते हैं: "ऐ हमारे रब! जिसे तूने आग में डाल दिया, उसे तूने सचमुच अपमानित और रुसवा कर दिया।" यानी आग में डालना सबसे बड़ी रुसवाई और ज़िल्लत है, क्योंकि वहाँ कोई इज़्ज़त, कोई ओहदा और कोई रिश्ता काम नहीं आता।

फिर वे कहते हैं: "और अत्याचारियों का कोई सहायक नहीं होता।" यानी जो लोग अपने ऊपर ज़ुल्म करके कुफ्र और गुनाहों का रास्ता अपनाते हैं, उनके लिए क़ियामत के दिन कोई मददगार नहीं होगा जो उन्हें अल्लाह की पकड़ से बचा सके। न कोई सिफ़ारिशी, न कोई भाई, न कोई रिश्तेदार — सब उनसे बेज़ार होंगे। यह उनके लिए सबसे बड़ी निराशा और हार का दिन होगा।


फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि दुआ में आग से बचने की फ़रियाद करना बहुत बड़ी नेमत है, और यही पैग़म्बरों और नेक लोगों की सुन्नत रही है।
  2. हमें यह समझाती है कि आग का अज़ाब सिर्फ़ शारीरिक तकलीफ़ नहीं, बल्कि रुसवाई और अपमान भी है — यानी वहाँ इंसान की इज़्ज़त छीन ली जाती है।
  3. यह आयत हमें ज़ुल्म से बचने की तरग़ीब देती है — चाहे वह ज़ुल्म किसी और पर हो या ख़ुद अपनी जान पर (गुनाह करके)।
  4. यह बताती है कि क़ियामत के दिन कोई भी इंसानी रिश्ता, कोई भी दुनियावी ताक़त काम नहीं आएगी; सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसकी मर्ज़ी ही बचा सकती है।
  5. इससे मोमिन के दिल में ख़ौफ़ पैदा होता है और वह अपने अमल को सुधारने की कोशिश करता है, ताकि आग से बच सके और जन्नत का हक़दार बन सके।
🎧 सुनें

📜 आयत 190-194 — आल-इमरान

190إِنَّ فِي خَلْقِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَاخْتِلَافِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ لَآيَاتٍ لِّأُولِي الْأَلْبَابِ
इसमें तो शक ही नहीं कि आसमानों और ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के फेर बदल में अक्लमन्दों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियॉ हैं
191الَّذِينَ يَذْكُرُونَ اللَّهَ قِيَامًا وَقُعُودًا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ فِي خَلْقِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَاطِلًا سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
जो लोग उठते बैठते करवट लेते (अलगरज़ हर हाल में) ख़ुदा का ज़िक्र करते हैं और आसमानों और ज़मीन की बनावट में ग़ौर व फ़िक्र करते हैं और (बेसाख्ता) कह उठते हैं कि ख़ुदावन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़क के अज़ाब से बचा
192رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं
193رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلْإِيمَانِ أَنْ آمِنُوا بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا ۚ رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْأَبْرَارِ
ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए पस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले
194رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ
और ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
192आयत

अनुवाद — आल-इमरान 192

सूरा आल-इमरान आयत 192 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो…

सूरा आयत 192/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 190–194. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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