फातिर · 41/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
۞ إِنَّ اللَّهَ يُمْسِكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ أَن تَزُولَا ۚ وَلَئِن زَالَتَا إِنْ أَمْسَكَهُمَا مِنْ أَحَدٍ مِّن بَعْدِهِ ۚ إِنَّهُ كَانَ حَلِيمًا غَفُورًا ۝٤١
Innal laaha yumsikus samaawaati wal arda an tazoolaaa; wa la`in zaalataaa in amsa kahumaa min ahadim mim ba`dih; innahoo kaana Haleeman Ghafooraa
📖 हिंदी अर्थ
बेशक खुदा ही सारे आसमान और ज़मीन अपनी जगह से हट जाने से रोके हुए है और अगर (फर्ज़ करे कि) ये अपनी जगह से हट जाए तो फिर तो उसके सिवा उन्हें कोई रोक नहीं सकता बेशक वह बड़ा बुर्दबर (और) बड़ा बख्शने वाला है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُمْسِكُ: थामे रखता है, काबू में रखता है।
  • أَنْ تَزُولَا: इस बात से कि वे टल जाएँ या अपनी जगह से हट जाएँ।
  • وَلَئِنْ زَالَتَا: और अगर (फ़रज़न) वे टल जाएँ।
  • إِنْ أَمْسَكَهُمَا: कोई नहीं है जो उन्हें थाम सके।
  • حَلِيمًا: बहुत सहनशील, जल्दी सज़ा देने वाला नहीं।
  • غَفُورًا: बहुत क्षमा करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की उस असीम शक्ति और कुदरत का बयान करती है जो उसने इस विशाल ब्रह्मांड को संभाल रखी है। अल्लाह ही वह ज़ात है जो आसमानों और ज़मीन को अपनी ताक़त से थामे हुए है, ताकि वे अपनी जगह से न हटें और न टलें। यह कोई साधारण बात नहीं है — ये अरबों-खरबों तारे, ग्रह, आकाशगंगाएँ और यह विशाल धरती, सब उसी की पकड़ में हैं। अगर अल्लाह चाहे तो एक पल में यह सब व्यवस्था तहस-नहस हो जाए, लेकिन वह अपनी रहमत और हिकमत से इसे क़ायम रखे हुए है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: अगर फ़रज़न ये आसमान और ज़मीन अपनी जगह से हट जाएँ या टल जाएँ, तो अल्लाह के बाद कोई और नहीं है जो उन्हें थाम सके या उन्हें वापस ला सके। यानी अल्लाह के सिवा कोई मददगार नहीं, कोई क़ाबू रखने वाला नहीं, कोई संभालने वाला नहीं। यह बात हमें यक़ीन दिलाती है कि इस कायनात का मालिक सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह है। हमारी साँसें, हमारा दिल, हमारा दिमाग़, हमारी ज़िंदगी और मौत — सब कुछ उसी के हाथ में है।

आयत के अंत में अल्लाह अपने दो खूबसूरत नामों का ज़िक्र करता है: हलीम (बहुत सहनशील) और ग़फूर (बहुत क्षमा करने वाला)। यानी अल्लाह इतना सहनशील है कि बंदों के गुनाहों के बावजूद उन पर जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, उन्हें मौका देता है, तौबा का दरवाज़ा खुला रखता है। और वह इतना क्षमा करने वाला है कि जो भी अपने गुनाहों से तौबा करके उसकी तरफ़ लौटता है, वह उसके सारे गुनाह माफ़ कर देता है।

यह आयत हमें कई सबक़ सिखाती है:

  1. अल्लाह की कुदरत पर भरोसा रखें — वही इस दुनिया को संभाल रहा है।
  2. हमें अल्लाह के सामने अपनी कमज़ोरी का एहसास करना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए।
  3. अल्लाह की सहनशीलता और क्षमा से हमें उम्मीद नहीं खोनी चाहिए — चाहे कितने ही गुनाह क्यों न हों, तौबा का दरवाज़ा खुला है।
  4. यह आयत हमें यह भी बताती है कि जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी कायनात को थाम रखा है, वह हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों को भी पूरा कर सकता है — बस ज़रूरत है उस पर भरोसा करने की और उसकी इबादत में जुड़े रहने की।

याद रखिए! जिस अल्लाह ने आसमान और ज़मीन को थाम रखा है, वह आपकी मदद के लिए हर पल हाज़िर है। उसकी रहमत से निराश न हों, उसकी क्षमा की ओर लौटते रहें। वही सबसे बड़ा सहारा है, वही सबसे बड़ा क्षमा करने वाला है।

🎧 सुनें

📜 आयत 39-43 — फातिर

39هُوَ الَّذِي جَعَلَكُمْ خَلَائِفَ فِي الْأَرْضِ ۚ فَمَن كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُ ۖ وَلَا يَزِيدُ الْكَافِرِينَ كُفْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ إِلَّا مَقْتًا ۖ وَلَا يَزِيدُ الْكَافِرِينَ كُفْرُهُمْ إِلَّا خَسَارًا
वह वही खुदा है जिसने रूए ज़मीन में तुम लोगों को (अगलों का) जानशीन बनाया फिर जो शख्स काफ़िर होगा तो उसके कुफ़्र का वबाल उसी पर पड़ेगा और काफ़िरों को उनका कुफ्र उनके परवरदिगार की बारगाह में ग़ज़ब के सिवा कुछ बढ़ाएगा नहीं और कुफ्फ़ार को उनका कुफ़्र घाटे के सिवा कुछ नफ़ा न देगा
40قُلْ أَرَأَيْتُمْ شُرَكَاءَكُمُ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ أَرُونِي مَاذَا خَلَقُوا مِنَ الْأَرْضِ أَمْ لَهُمْ شِرْكٌ فِي السَّمَاوَاتِ أَمْ آتَيْنَاهُمْ كِتَابًا فَهُمْ عَلَىٰ بَيِّنَتٍ مِّنْهُ ۚ بَلْ إِن يَعِدُ الظَّالِمُونَ بَعْضُهُم بَعْضًا إِلَّا غُرُورًا
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) पूछो तो कि खुदा के सिवा अपने जिन शरीकों की तुम क़यादत करते थे क्या तुमने उन्हें (कुछ) देखा भी मुझे भी ज़रा दिखाओ तो कि उन्होंने ज़मीन (की चीज़ों) से कौन सी चीज़ पैदा की या आसमानों में कुछ उनका आधा साझा है या हमने खुद उन्हें कोई किताब दी है कि वह उसकी दलील रखते हैं (ये सब तो कुछ नहीं) बल्कि ये ज़ालिम एक दूसरे से (धोखे और) फरेब ही का वायदा करते हैं
41۞ إِنَّ اللَّهَ يُمْسِكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ أَن تَزُولَا ۚ وَلَئِن زَالَتَا إِنْ أَمْسَكَهُمَا مِنْ أَحَدٍ مِّن بَعْدِهِ ۚ إِنَّهُ كَانَ حَلِيمًا غَفُورًا
बेशक खुदा ही सारे आसमान और ज़मीन अपनी जगह से हट जाने से रोके हुए है और अगर (फर्ज़ करे कि) ये अपनी जगह से हट जाए तो फिर तो उसके सिवा उन्हें कोई रोक नहीं सकता बेशक वह बड़ा बुर्दबर (और) बड़ा बख्शने वाला है
42وَأَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ لَئِن جَاءَهُمْ نَذِيرٌ لَّيَكُونُنَّ أَهْدَىٰ مِنْ إِحْدَى الْأُمَمِ ۖ فَلَمَّا جَاءَهُمْ نَذِيرٌ مَّا زَادَهُمْ إِلَّا نُفُورًا
और ये लोग तो खुदा की बड़ी-बड़ी सख्त क़समें खा (कर कहते) थे कि बेशक अगर उनके पास कोई डराने वाला (पैग़म्बर) आएगा तो वह ज़रूर हर एक उम्मत से ज्यादा रूबसह होंगे फिर जब उनके पास डराने वाला (रसूल) आ पहुँचा तो (उन लोगों को) रूए ज़मीन में सरकशी और बुरी-बुरी तद्बीरें करने की वजह से
43اسْتِكْبَارًا فِي الْأَرْضِ وَمَكْرَ السَّيِّئِ ۚ وَلَا يَحِيقُ الْمَكْرُ السَّيِّئُ إِلَّا بِأَهْلِهِ ۚ فَهَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا سُنَّتَ الْأَوَّلِينَ ۚ فَلَن تَجِدَ لِسُنَّتِ اللَّهِ تَبْدِيلًا ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّتِ اللَّهِ تَحْوِيلًا
(उसके आने से) उनकी नफरत को तरक्की ही होती गयी और बुदी तद्बीर (की बुराई) तो बुरी तद्बीर करने वाले ही पर पड़ती है तो (हो न हो) ये लोग बस अगले ही लोगों के बरताव के मुन्तज़िर हैं तो (बेहतर) तुम खुदा के दसतूर में कभी तब्दीली न पाओगे और खुदा की आदत में हरगिज़ कोई तग़य्युर न पाओगे
फातिरकुरान सूची
45आयत
मक्कीRevelation
41आयत

अनुवाद — फातिर 41

सूरा फातिर आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक खुदा ही सारे आसमान और ज़मीन अपनी जगह से…

सूरा आयत 41/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए