अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُمْسِكُ: थामे रखता है, काबू में रखता है।
- أَنْ تَزُولَا: इस बात से कि वे टल जाएँ या अपनी जगह से हट जाएँ।
- وَلَئِنْ زَالَتَا: और अगर (फ़रज़न) वे टल जाएँ।
- إِنْ أَمْسَكَهُمَا: कोई नहीं है जो उन्हें थाम सके।
- حَلِيمًا: बहुत सहनशील, जल्दी सज़ा देने वाला नहीं।
- غَفُورًا: बहुत क्षमा करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह तआला की उस असीम शक्ति और कुदरत का बयान करती है जो उसने इस विशाल ब्रह्मांड को संभाल रखी है। अल्लाह ही वह ज़ात है जो आसमानों और ज़मीन को अपनी ताक़त से थामे हुए है, ताकि वे अपनी जगह से न हटें और न टलें। यह कोई साधारण बात नहीं है — ये अरबों-खरबों तारे, ग्रह, आकाशगंगाएँ और यह विशाल धरती, सब उसी की पकड़ में हैं। अगर अल्लाह चाहे तो एक पल में यह सब व्यवस्था तहस-नहस हो जाए, लेकिन वह अपनी रहमत और हिकमत से इसे क़ायम रखे हुए है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: अगर फ़रज़न ये आसमान और ज़मीन अपनी जगह से हट जाएँ या टल जाएँ, तो अल्लाह के बाद कोई और नहीं है जो उन्हें थाम सके या उन्हें वापस ला सके। यानी अल्लाह के सिवा कोई मददगार नहीं, कोई क़ाबू रखने वाला नहीं, कोई संभालने वाला नहीं। यह बात हमें यक़ीन दिलाती है कि इस कायनात का मालिक सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह है। हमारी साँसें, हमारा दिल, हमारा दिमाग़, हमारी ज़िंदगी और मौत — सब कुछ उसी के हाथ में है।
आयत के अंत में अल्लाह अपने दो खूबसूरत नामों का ज़िक्र करता है: हलीम (बहुत सहनशील) और ग़फूर (बहुत क्षमा करने वाला)। यानी अल्लाह इतना सहनशील है कि बंदों के गुनाहों के बावजूद उन पर जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, उन्हें मौका देता है, तौबा का दरवाज़ा खुला रखता है। और वह इतना क्षमा करने वाला है कि जो भी अपने गुनाहों से तौबा करके उसकी तरफ़ लौटता है, वह उसके सारे गुनाह माफ़ कर देता है।
यह आयत हमें कई सबक़ सिखाती है:
- अल्लाह की कुदरत पर भरोसा रखें — वही इस दुनिया को संभाल रहा है।
- हमें अल्लाह के सामने अपनी कमज़ोरी का एहसास करना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए।
- अल्लाह की सहनशीलता और क्षमा से हमें उम्मीद नहीं खोनी चाहिए — चाहे कितने ही गुनाह क्यों न हों, तौबा का दरवाज़ा खुला है।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी कायनात को थाम रखा है, वह हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों को भी पूरा कर सकता है — बस ज़रूरत है उस पर भरोसा करने की और उसकी इबादत में जुड़े रहने की।
याद रखिए! जिस अल्लाह ने आसमान और ज़मीन को थाम रखा है, वह आपकी मदद के लिए हर पल हाज़िर है। उसकी रहमत से निराश न हों, उसकी क्षमा की ओर लौटते रहें। वही सबसे बड़ा सहारा है, वही सबसे बड़ा क्षमा करने वाला है।
📜 आयत 39-43 — फातिर
अनुवाद — फातिर 41
सूरा फातिर आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक खुदा ही सारे आसमान और ज़मीन अपनी जगह से…सूरा आयत 41/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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