Wa aqsamoo billaahi jahda aymaanihim la`in jaaa`ahum nazeerul layakoonunna ahdaa min ihdal umami falam maa jaaa`ahum nazeerum maa zaadahum illaa nufooraa
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग तो खुदा की बड़ी-बड़ी सख्त क़समें खा (कर कहते) थे कि बेशक अगर उनके पास कोई डराने वाला (पैग़म्बर) आएगा तो वह ज़रूर हर एक उम्मत से ज्यादा रूबसह होंगे फिर जब उनके पास डराने वाला (रसूल) आ पहुँचा तो (उन लोगों को) रूए ज़मीन में सरकशी और बुरी-बुरी तद्बीरें करने की वजह से
🌐 Additional reference in اردو
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اور یہ خدا کی سخت سخت قسمیں کھاتے ہیں کہ اگر ان کے پاس کوئی ہدایت کرنے والا آئے تو ہر ایک اُمت سے بڑھ کر ہدایت پر ہوں۔ مگر جب ان کے پاس ہدایت کرنے والا آیا تو اس سے ان کو نفرت ہی بڑھی
جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ: अपनी क़समों में पूरी कोशिश और सख्ती करना, यानी बड़ी मज़बूत क़समें खाना।
نَذِير: डराने वाला, सचेत करने वाला (यहाँ अर्थ: अल्लाह का रसूल)।
أَهْدَى: ज़्यादा सीधे रास्ते पर, ज़्यादा हिदायत पाने वाला।
نُفُورًا: दूर भागना, किनारा करना, सच्चाई से मुँह मोड़ना।
तफ़सीर (व्याख्या):
मक्का के काफ़िरों ने अल्लाह की क़समें खाकर बड़ी दृढ़ता से कहा था कि अगर उनके पास कोई डराने वाला (नबी) आया, तो वे यहूदियों और ईसाइयों से भी ज़्यादा सीधे रास्ते पर चलेंगे और हक़ को ज़्यादा क़बूल करेंगे। उन्होंने यह दावा बड़े गर्व और भरोसे के साथ किया था कि वे किसी भी पिछली उम्मत से बेहतर होंगे। मगर जब अल्लाह की तरफ़ से मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उनके पास नबी बनकर आए, और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, तो उनका यह वादा पूरा नहीं हुआ। इसके विपरीत, उनके आने से उनकी सच्चाई से दूरी और नफ़रत और बढ़ गई। वे हिदायत के और करीब नहीं आए, बल्कि उससे और दूर भागते गए। यह उनकी झूठी क़समों और अहंकार का नतीजा था कि उन्होंने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की दावत को ठुकरा दिया और अपने बुतों और बुरे रास्ते पर ही अड़े रहे।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें सिखाती है कि सिर्फ़ ज़ुबान से दावे करना काफ़ी नहीं, बल्कि अल्लाह से सच्चा वादा और अमल ज़रूरी है। कई लोग कहते हैं कि अगर हमारे पास हिदायत आए तो हम सबसे अच्छे बन जाएँगे, मगर जब हिदायत आती है तो वे उससे मुँह मोड़ लेते हैं। हमें चाहिए कि जब अल्लाह की तरफ़ से कोई पैग़ाम, कोई नेक बात, या कोई सच्चा रहनुमा हमारे पास आए, तो हम उसे खुशी से क़बूल करें और अपनी ज़िंदगी को उसके मुताबिक ढालें। अल्लाह का क़ुरआन और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत हमारे लिए सबसे बड़ी हिदायत है — आओ, हम इसे अपनाएँ और उन लोगों की तरह न बनें जो सच्चाई के सामने आकर भी उससे दूर भागते हैं। अल्लाह हमें सच्चे दिल से हिदायत क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
और ये लोग तो खुदा की बड़ी-बड़ी सख्त क़समें खा (कर कहते) थे कि बेशक अगर उनके पास कोई डराने वाला (पैग़म्बर) आएगा तो वह ज़रूर हर एक उम्मत से ज्यादा रूबसह होंगे फिर जब उनके पास डराने वाला (रसूल) आ पहुँचा तो (उन लोगों को) रूए ज़मीन में सरकशी और बुरी-बुरी तद्बीरें करने की वजह से
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) पूछो तो कि खुदा के सिवा अपने जिन शरीकों की तुम क़यादत करते थे क्या तुमने उन्हें (कुछ) देखा भी मुझे भी ज़रा दिखाओ तो कि उन्होंने ज़मीन (की चीज़ों) से कौन सी चीज़ पैदा की या आसमानों में कुछ उनका आधा साझा है या हमने खुद उन्हें कोई किताब दी है कि वह उसकी दलील रखते हैं (ये सब तो कुछ नहीं) बल्कि ये ज़ालिम एक दूसरे से (धोखे और) फरेब ही का वायदा करते हैं
बेशक खुदा ही सारे आसमान और ज़मीन अपनी जगह से हट जाने से रोके हुए है और अगर (फर्ज़ करे कि) ये अपनी जगह से हट जाए तो फिर तो उसके सिवा उन्हें कोई रोक नहीं सकता बेशक वह बड़ा बुर्दबर (और) बड़ा बख्शने वाला है
और ये लोग तो खुदा की बड़ी-बड़ी सख्त क़समें खा (कर कहते) थे कि बेशक अगर उनके पास कोई डराने वाला (पैग़म्बर) आएगा तो वह ज़रूर हर एक उम्मत से ज्यादा रूबसह होंगे फिर जब उनके पास डराने वाला (रसूल) आ पहुँचा तो (उन लोगों को) रूए ज़मीन में सरकशी और बुरी-बुरी तद्बीरें करने की वजह से
(उसके आने से) उनकी नफरत को तरक्की ही होती गयी और बुदी तद्बीर (की बुराई) तो बुरी तद्बीर करने वाले ही पर पड़ती है तो (हो न हो) ये लोग बस अगले ही लोगों के बरताव के मुन्तज़िर हैं तो (बेहतर) तुम खुदा के दसतूर में कभी तब्दीली न पाओगे और खुदा की आदत में हरगिज़ कोई तग़य्युर न पाओगे
तो क्या उन लोगों ने रूए ज़मीन पर चल फिर कर नहीं देखा कि जो लोग उनके पहले थे और उनसे ज़ोर व कूवत में भी कहीं बढ़-चढ़ के थे फिर उनका (नाफ़रमानी की वजह से) क्या (ख़राब) अन्जाम हुआ और खुदा ऐसा (गया गुज़रा) नहीं है कि उसे कोई चीज़ आजिज़ कर सके (न इतने) आसमानों में और न ज़मीन में बेशक वह बड़ा ख़बरदार (और) बड़ी (क़ाबू) कुदरत वाला है
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