अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- طَائِفَةٌ – एक समूह, एक गिरोह
- أَسْلِحَتَهُمْ – अपने हथियार
- حِذْرَهُمْ – अपनी सावधानी और सुरक्षा का सामान (जैसे कवच, ढाल आदि)
- فَيَمِيلُونَ عَلَيْكُم – वे तुम पर टूट पड़ें (एक साथ हमला कर दें)
- جُنَاح – पाप, दोष, गुनाह
- أَذًى – कष्ट, तकलीफ़
- مُهِينًا – अपमानित करने वाला, ज़लील करने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस समय की स्थिति के बारे में है जब मुसलमान युद्ध के मैदान में होते हैं और नमाज़ का समय आ जाता है। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को सिखा रहे हैं कि जब आप मुजाहिदीन के बीच हों और उन्हें नमाज़ पढ़ाना चाहें, तो उन्हें दो समूहों में बाँट लें। एक समूह आपके साथ नमाज़ के लिए खड़ा हो, और वे अपने हथियार भी साथ रखें। जब यह पहला समूह सजदे में जाए, तो दूसरा समूह जो पहले से मोर्चे पर तैनात था, वह आगे आकर आपके साथ नमाज़ पूरी करे। इस तरह नमाज़ भी अदा हो जाएगी और दुश्मन से सुरक्षा भी बनी रहेगी।
अल्लाह तआला ने यह भी बताया कि काफ़िर चाहते हैं कि तुम अपने हथियारों और सामान से ग़ाफ़िल हो जाओ, ताकि वे एक साथ मिलकर तुम पर अचानक हमला कर दें। इसलिए हर वक़्त चौकन्ना रहना ज़रूरी है। हाँ, अगर बारिश की वजह से तकलीफ़ हो या कोई बीमारी हो, तो हथियार रखने में कोई गुनाह नहीं, लेकिन फिर भी सावधानी नहीं छोड़नी चाहिए। अल्लाह ने काफ़िरों के लिए अपमानजनक अज़ाब तैयार कर रखा है।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में नमाज़ की कितनी अहमियत है — यहाँ तक कि युद्ध के मैदान में भी नमाज़ नहीं छोड़ी जाती, बल्कि उसका एक ख़ास तरीक़ा सिखाया गया है जिसे "सलातुल-ख़ौफ़" (भय की नमाज़) कहते हैं। साथ ही, यह भी सबक़ मिलता है कि मुसलमान को हर हाल में होशियार और चौकस रहना चाहिए, क्योंकि दुश्मन हमेशा मौक़े की तलाश में रहता है। यह आयत मुसलमानों को एकजुटता, अनुशासन और अल्लाह पर भरोसे का पाठ पढ़ाती है — कि अल्लाह की इबादत और दुश्मन से सुरक्षा दोनों एक साथ मुमकिन हैं, और अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है।
📜 आयत 100-104 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 102
सूरा अन-निसा आयत 102 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम मुसलमानों में मौजूद हो और (लड़ाई…सूरा आयत 102/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 100–104. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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