अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَبِأَيِّ حَدِيثٍ – तो किस बात/वचन पर
- بَعْدَهُ – इस (क़ुरआन) के बाद
- يُؤْمِنُونَ – वे ईमान लाएँगे
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों से पूछ रहे हैं जो क़ुरआन को झुठलाते हैं और उस पर ईमान नहीं लाते। जब यह क़ुरआन — जो हर चीज़ को स्पष्ट करने वाला है, जिसके हुक्म, अहकाम और ख़बरें बिल्कुल वाज़ेह हैं, और जिसके अल्फ़ाज़ और मआनी दोनों में ए'जाज़ (चमत्कार) है — उनके सामने मौजूद है, तो क्या वे इसके अलावा किसी और किताब या कलाम पर ईमान लाएँगे?
यानी अगर यह क़ुरआन — जो अल्लाह का आख़िरी और सबसे कामिल पैग़ाम है — उन्हें मान्य नहीं, तो फिर कौन सा ऐसा कलाम है जो उन्हें हिदायत दे सके? क्या कोई और किताब उन्हें सच्चाई तक पहुँचा सकती है? हरगिज़ नहीं! क्योंकि क़ुरआन के बाद कोई नई किताब नहीं आई और न आएगी। यह आख़िरी और पूरी किताब है।
यह आयत एक गहरे अंदाज़ में उन लोगों को चुनौती देती है और उनके दिलों को जगाती है कि अगर सच्चाई की तलाश है, तो वह इसी किताब में है। अगर वे इस पर ईमान नहीं लाते, तो उनका ईमान किस पर होगा? क्या वे किसी और बात पर ईमान लाएँगे जो उन्हें अल्लाह की राह से दूर कर दे?
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे पास अल्लाह का आख़िरी पैग़ाम है — क़ुरआन। यह वह किताब है जिसमें कोई कमी नहीं, कोई झोल नहीं। इसमें दुनिया और आख़िरत की हर भलाई का रास्ता बताया गया है। जो इसे पकड़ ले, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।
आओ, हम इस नेमत की क़द्र करें, इसे पढ़ें, समझें और अपनी ज़िंदगी में लागू करें। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है। अल्लाह हमें क़ुरआन पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 48-50 — अल-मुरसलात
अनुवाद — अल-मुरसलात 50
सूरा अल-मुरसलात आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अब इसके बाद ये किस बात पर ईमान लाएँगेसूरा आयत 50/50 — अल-मुरसलात المرسلات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुरसलात सुनें, अल-मुरसलात अनुवाद, अल-मुरसलात mp3, अल-मुरसलात pdf. आयत 48–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








