सूरा अल-क़ियामा
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40 आयत मक्की PDF
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सूरा अल-क़ियामा pdf — डाउनलोड (हिन्दी)

सूरा अल-क़ियामा pdf हिन्दी — डाउनलोड सूरा अल-क़ियामा अनुवाद. अल-क़ियामा (मक्की) 40 आयत.



सूरा अल-क़ियामा
40 आयत · मक्की · हिन्दी
bismillah
ﮊﮋﮌﮍﮎ
मैं रोजे क़यामत की क़सम खाता हूँ
ﮏﮐﮑﮒﮓ
(और बुराई से) मलामत करने वाले जी की क़सम खाता हूँ (कि तुम सब दोबारा) ज़रूर ज़िन्दा किए जाओगे
ﮔﮕﮖﮗﮘﮙ
क्या इन्सान ये ख्याल करता है (कि हम उसकी हड्डियों को बोसीदा होने के बाद) जमा न करेंगे हाँ (ज़रूर करेंगें)
ﮚﮛﮜﮝﮞﮟﮠ
हम इस पर क़ादिर हैं कि हम उसकी पोर पोर दुरूस्त करें
ﮡﮢﮣﮤﮥﮦ
मगर इन्सान तो ये जानता है कि अपने आगे भी (हमेशा) बुराई करता जाए
ﮧﮨﮩﮪﮫ
पूछता है कि क़यामत का दिन कब होगा
ﮬﮭﮮﮯ
तो जब ऑंखे चकाचौन्ध में आ जाएँगी
ﮰﮱﯓ
और चाँद गहन में लग जाएगा
ﯔﯕﯖﯗ
और सूरज और चाँद इकट्ठा कर दिए जाएँगे
ﯘﯙﯚﯛﯜﯝ
तो इन्सान कहेगा आज कहाँ भाग कर जाऊँ
ﯞﯟﯠﯡ
यक़ीन जानों कहीं पनाह नहीं
ﯢﯣﯤﯥﯦ
उस रोज़ तुम्हारे परवरदिगार ही के पास ठिकाना है
ﯧﯨﯩﯪﯫﯬﯭ
उस दिन आदमी को जो कुछ उसके आगे पीछे किया है बता दिया जाएगा
ﯮﯯﯰﯱﯲﯳ
बल्कि इन्सान तो अपने ऊपर आप गवाह है
ﯴﯵﯶﯷ
अगरचे वह अपने गुनाहों की उज्र व ज़रूर माज़ेरत पढ़ा करता रहे
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(ऐ रसूल) वही के जल्दी याद करने वास्ते अपनी ज़बान को हरकत न दो
ﯿﰀﰁﰂﰃ
उसका जमा कर देना और पढ़वा देना तो यक़ीनी हमारे ज़िम्मे है
ﰄﰅﰆﰇﰈ
तो जब हम उसको (जिबरील की ज़बानी) पढ़ें तो तुम भी (पूरा) सुनने के बाद इसी तरह पढ़ा करो
ﰉﰊﰋﰌﰍ
फिर उस (के मुश्किलात का समझा देना भी हमारे ज़िम्में है)
ﭑﭒﭓﭔﭕ
मगर (लोगों) हक़ तो ये है कि तुम लोग दुनिया को दोस्त रखते हो
ﭖﭗﭘ
और आख़ेरत को छोड़े बैठे हो
ﭙﭚﭛﭜ
उस रोज़ बहुत से चेहरे तो तरो ताज़ा बशबाब होंगे
ﭝﭞﭟﭠ
(और) अपने परवरदिगार (की नेअमत) को देख रहे होंगे
ﭡﭢﭣﭤ
और बहुतेरे मुँह उस दिन उदास होंगे
ﭥﭦﭧﭨﭩﭪ
समझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है कि कमर तोड़ देगी
ﭫﭬﭭﭮﭯ
सुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी
ﭰﭱﭲﭳﭴ
और कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने वाला है
ﭵﭶﭷﭸ
और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है
ﭹﭺﭻﭼ
और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी
ﭽﭾﭿﮀﮁ
उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है
ﮂﮃﮄﮅﮆ
तो उसने (ग़फलत में) न (कलामे ख़ुदा की) तसदीक़ की न नमाज़ पढ़ी
ﮇﮈﮉﮊ
मगर झुठलाया और (ईमान से) मुँह फेरा
ﮋﮌﮍﮎﮏﮐ
अपने घर की तरफ इतराता हुआ चला
ﮑﮒﮓﮔ
अफसोस है तुझ पर फिर अफसोस है फिर तुफ़ है
ﮕﮖﮗﮘﮙ
तुझ पर फिर तुफ़ है
ﮚﮛﮜﮝﮞﮟ
क्या इन्सान ये समझता है कि वह यूँ ही छोड़ दिया जाएगा
ﮠﮡﮢﮣﮤﮥﮦ
क्या वह (इब्तेदन) मनी का एक क़तरा न था जो रहम में डाली जाती है
ﮧﮨﮩﮪﮫﮬ
फिर लोथड़ा हुआ फिर ख़ुदा ने उसे बनाया
ﮭﮮﮯﮰﮱﯓ
फिर उसे दुरूस्त किया फिर उसकी दो किस्में बनायीं (एक) मर्द और (एक) औरत
ﯔﯕﯖﯗﯘﯙﯚﯛ
क्या इस पर क़ादिर नहीं कि (क़यामत में) मुर्दों को ज़िन्दा कर दे

पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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