सूरा अल-क़ियामा अरबी और हिंदी
सूरा अल-क़ियामा को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (40 आयत — مكية). अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf.सूरा अल-क़ियामा पढ़ें और सुनें
🎧 आयत
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Mishary Rashid Alafasy
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Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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Maher Al Muaiqly
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x1
وَلَا أُقْسِمُ بِالنَّفْسِ اللَّوَّامَةِ ٢
📖 अनुवाद
आयत 2
(और बुराई से) मलामत करने वाले जी की क़सम खाता हूँ (कि तुम सब दोबारा) ज़रूर ज़िन्दा किए जाओगे
أَيَحْسَبُ الْإِنسَانُ أَلَّن نَّجْمَعَ عِظَامَهُ ٣
📖 अनुवाद
आयत 3
क्या इन्सान ये ख्याल करता है (कि हम उसकी हड्डियों को बोसीदा होने के बाद) जमा न करेंगे हाँ (ज़रूर करेंगें)
بَلَىٰ قَادِرِينَ عَلَىٰ أَن نُّسَوِّيَ بَنَانَهُ ٤
📖 अनुवाद
आयत 4
हम इस पर क़ादिर हैं कि हम उसकी पोर पोर दुरूस्त करें
بَلْ يُرِيدُ الْإِنسَانُ لِيَفْجُرَ أَمَامَهُ ٥
📖 अनुवाद
आयत 5
मगर इन्सान तो ये जानता है कि अपने आगे भी (हमेशा) बुराई करता जाए
يَقُولُ الْإِنسَانُ يَوْمَئِذٍ أَيْنَ الْمَفَرُّ ١٠
📖 अनुवाद
आयत 10
तो इन्सान कहेगा आज कहाँ भाग कर जाऊँ
إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمُسْتَقَرُّ ١٢
📖 अनुवाद
आयत 12
उस रोज़ तुम्हारे परवरदिगार ही के पास ठिकाना है
يُنَبَّأُ الْإِنسَانُ يَوْمَئِذٍ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ ١٣
📖 अनुवाद
आयत 13
उस दिन आदमी को जो कुछ उसके आगे पीछे किया है बता दिया जाएगा
وَلَوْ أَلْقَىٰ مَعَاذِيرَهُ ١٥
📖 अनुवाद
आयत 15
अगरचे वह अपने गुनाहों की उज्र व ज़रूर माज़ेरत पढ़ा करता रहे
لَا تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ ١٦
📖 अनुवाद
आयत 16
(ऐ रसूल) वही के जल्दी याद करने वास्ते अपनी ज़बान को हरकत न दो
إِنَّ عَلَيْنَا جَمْعَهُ وَقُرْآنَهُ ١٧
📖 अनुवाद
आयत 17
उसका जमा कर देना और पढ़वा देना तो यक़ीनी हमारे ज़िम्मे है
فَإِذَا قَرَأْنَاهُ فَاتَّبِعْ قُرْآنَهُ ١٨
📖 अनुवाद
आयत 18
तो जब हम उसको (जिबरील की ज़बानी) पढ़ें तो तुम भी (पूरा) सुनने के बाद इसी तरह पढ़ा करो
ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا بَيَانَهُ ١٩
📖 अनुवाद
आयत 19
फिर उस (के मुश्किलात का समझा देना भी हमारे ज़िम्में है)
كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ الْعَاجِلَةَ ٢٠
📖 अनुवाद
आयत 20
मगर (लोगों) हक़ तो ये है कि तुम लोग दुनिया को दोस्त रखते हो
تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌ ٢٥
📖 अनुवाद
आयत 25
समझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है कि कमर तोड़ देगी
كَلَّا إِذَا بَلَغَتِ التَّرَاقِيَ ٢٦
📖 अनुवाद
आयत 26
सुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी
وَالْتَفَّتِ السَّاقُ بِالسَّاقِ ٢٩
📖 अनुवाद
आयत 29
और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी
إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمَسَاقُ ٣٠
📖 अनुवाद
आयत 30
उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है
فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ ٣١
📖 अनुवाद
आयत 31
तो उसने (ग़फलत में) न (कलामे ख़ुदा की) तसदीक़ की न नमाज़ पढ़ी
أَيَحْسَبُ الْإِنسَانُ أَن يُتْرَكَ سُدًى ٣٦
📖 अनुवाद
आयत 36
क्या इन्सान ये समझता है कि वह यूँ ही छोड़ दिया जाएगा
أَلَمْ يَكُ نُطْفَةً مِّن مَّنِيٍّ يُمْنَىٰ ٣٧
📖 अनुवाद
आयत 37
क्या वह (इब्तेदन) मनी का एक क़तरा न था जो रहम में डाली जाती है
فَجَعَلَ مِنْهُ الزَّوْجَيْنِ الذَّكَرَ وَالْأُنثَىٰ ٣٩
📖 अनुवाद
आयत 39
फिर उसे दुरूस्त किया फिर उसकी दो किस्में बनायीं (एक) मर्द और (एक) औरत
أَلَيْسَ ذَٰلِكَ بِقَادِرٍ عَلَىٰ أَن يُحْيِيَ الْمَوْتَىٰ ٤٠
📖 अनुवाद
आयत 40
क्या इस पर क़ादिर नहीं कि (क़यामत में) मुर्दों को ज़िन्दा कर दे
पढ़ें सूरा अल-क़ियामा हिंदी अनुवाद – अरबी पाठ और ऑडियो
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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