अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَلَائِفَ: (ख़लाइफ़) — यह 'خَلِيفَة' का बहुवचन है, अर्थात उत्तराधिकारी, पीढ़ी दर पीढ़ी एक दूसरे के स्थान पर आने वाले।
- مِن بَعْدِهِمْ: उन (पिछली उम्मतों) के बाद।
- لِنَنظُرَ: ताकि हम देखें — यहाँ 'देखना' का अर्थ परीक्षा लेना और जानना है, क्योंकि अल्लाह तो सब कुछ पहले से ही जानता है, लेकिन यह परीक्षा इसलिए है ताकि उसका फल और दंड न्याय पर आधारित हो।
- كَيْفَ تَعْمَلُونَ: तुम कैसा कर्म करते हो — अच्छा या बुरा।
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में मानव जाति को उसकी ज़िम्मेदारी का एहसास करा रहा है। पिछली उम्मतें — जैसे आद, समूद, नूह की क़ौम और फ़िरऔन के लोग — जब अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और ज़मीन पर फ़साद फैलाया, तो अल्लाह ने उन्हें हलाक कर दिया। अब उनके बाद तुम्हें (ऐ लोगों!) ज़मीन का उत्तराधिकारी बनाया गया है। यह केवल एक सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी परीक्षा है। अल्लाह तुम्हें देख रहा है कि तुम उस शक्ति और अधिकार का उपयोग किस प्रकार करते हो — क्या तुम उसी रास्ते पर चलते हो जिस पर चलकर पिछले लोग हलाक हुए, या तुम अल्लाह की आज्ञा का पालन करके अच्छे कर्म करते हो?
यह आयत एक चेतावनी भी है और एक प्रोत्साहन भी। चेतावनी इस बात की कि जिस प्रकार अल्लाह ने पिछले लोगों को उनके बुरे कर्मों की वजह से पकड़ा, उसी प्रकार वह तुम्हें भी पकड़ सकता है। प्रोत्साहन इस बात का कि यदि तुम अच्छे कर्म करोगे, तो अल्लाह तुम्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में अच्छा बदला देगा। अल्लाह ने तुम्हें ज़मीन पर इसलिए बसाया है, ताकि वह तुम्हारे कर्मों के अनुसार तुम्हारे साथ व्यवहार करे — अच्छे कर्मों पर अच्छा बदला और बुरे कर्मों पर बुरा दंड।
शिक्षाएँ और लाभ:
- ज़िम्मेदारी का एहसास: यह आयत हमें सिखाती है कि ज़मीन पर हमारी मौजूदगी कोई खेल नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर ज़िम्मेदारी है। हमें याद रखना चाहिए कि हमारे हर कर्म पर अल्लाह की नज़र है।
- इतिहास से सबक: पिछली उम्मतों का विनाश हमारे लिए सबक है। हमें उनकी गलतियों से सीखना चाहिए और उन रास्तों से बचना चाहिए जिन पर चलकर वे हलाक हुए।
- परीक्षा की सच्चाई: दुनिया की ज़िंदगी एक परीक्षा है। अल्लाह हमें देख रहा है कि हम अपनी शक्ति, धन, ज्ञान और अधिकार का उपयोग कैसे करते हैं — अच्छाई के लिए या बुराई के लिए।
- न्याय का सिद्धांत: अल्लाह का फैसला पूरी तरह न्याय पर आधारित है। वह हमारे कर्मों के अनुसार ही हमें बदला देगा — कोई अच्छा कर्म बेकार नहीं जाएगा और कोई बुरा कर्म बिना सज़ा के नहीं रहेगा।
- उम्मीद और डर: यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की उम्मीद भी देती है और उसके अज़ाब का डर भी। यही दोनों चीज़ें इंसान को सीधे रास्ते पर चलने में मदद करती हैं।
- उत्तराधिकार की अमानत: ज़मीन पर हमारा उत्तराधिकार अल्लाह की ओर से एक अमानत है। हमें इस अमानत को संभालकर रखना चाहिए और इसमें अल्लाह की मर्ज़ी के अनुसार ही काम करना चाहिए।
📜 आयत 12-16 — यूनुस
अनुवाद — यूनुस 14
सूरा यूनुस आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमने उनके बाद तुमको ज़मीन में (उनका) जानशीन बनाया…सूरा आयत 14/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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