यूनुस · 13/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَلَقَدْ أَهْلَكْنَا الْقُرُونَ مِن قَبْلِكُمْ لَمَّا ظَلَمُوا ۙ وَجَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ وَمَا كَانُوا لِيُؤْمِنُوا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْقَوْمَ الْمُجْرِمِينَ ۝١٣
Wa laqad ahlaknal quroona min qablikum lammaa zalamoo wa jaaa`at hum Rusuluhum bil baiyinaati wa maa kaanoo liyu`minoo; kazaalika najzil qawmal mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
और तुमसे पहली उम्मत वालों को जब उन्होंने शरारत की तो हम ने उन्हें ज़रुर हलाक कर डाला हालॉकि उनके (वक्त क़े) रसूल वाजेए व रौशन मोज़िज़ात लेकर आ चुके थे और वह लोग ईमान (न लाना था) न लाए हम गुनेहगार लोगों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْقُرُونَ: वे पीढ़ियाँ और समुदाय जो पहले गुज़र चुके हैं।
  • ظَلَمُوا: उन्होंने अत्याचार किया, अर्थात शिर्क किया और अल्लाह की आज्ञा का उल्लंघन किया।
  • بِالْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट प्रमाणों, चमत्कारों और तर्कों के साथ जो रसूलों की सच्चाई को सिद्ध करते थे।
  • الْمُجْرِمِينَ: वे लोग जो हद से आगे बढ़ गए, पाप में डूबे और अल्लाह की नाफ़रमानी पर अड़े रहे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मक्का के मुशरिको! अल्लाह तआला ने तुमसे पहले की उन उम्मतों को हलाक कर दिया, जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया और ज़ुल्म (शिर्क और नाफ़रमानी) पर क़ायम रहीं। जब उनके पास अल्लाह के रसूल स्पष्ट निशानियाँ, चमत्कार और ऐसे प्रमाण लेकर आए जो उनकी सच्चाई पर गवाही देते थे, तो भी वे ईमान लाने वाले नहीं बने। उनका दिल सच्चाई को क़बूल करने के लिए तैयार नहीं था, इसलिए अल्लाह ने उन्हें हिदायत की तौफ़ीक़ नहीं दी और वे अपनी सरकशी में ही डूबे रहे। अल्लाह ने उन्हें उनके कुकर्मों की सज़ा दी और हलाक कर दिया। यही अल्लाह की सुन्नत (रीति) है — जो लोग जुर्म और सरकशी में हद से गुज़र जाएँ, उन्हें वैसे ही सज़ा दी जाती है, चाहे वे किसी भी ज़माने में हों। यह एक चेतावनी है कि जो लोग आज मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को झुठलाते हैं, वे भी उसी अंजाम से डरें।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की सज़ा उसी वक़्त आती है जब इंसान के पास हुज्जत (प्रमाण) पूरी हो जाती है — यानी रसूलों का भेजा जाना और स्पष्ट निशानियों का दिखाया जाना। इससे पता चलता है कि अल्लाह कभी बग़ैर सबूत के किसी को सज़ा नहीं देता।
  2. ईमान एक दिल की बात है; जब इंसान हक़ को देखकर भी उससे मुँह मोड़ता है, तो अल्लाह उसे हिदायत से महरूम कर देता है। इसलिए हमें दिल की सफ़ाई और अच्छे इरादों का ख़याल रखना चाहिए।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के रसूलों के साथ अच्छा सुलूक करना और उनकी बात मानना ही नजात (मुक्ति) का ज़रिया है। जो लोग रसूलों की नाफ़रमानी करते हैं, उनका अंजाम बुरा होता है।
  4. इस आयत में उन लोगों के लिए डर की तालीम है जो आज भी हक़ को ठुकराते हैं — कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह ज़ालिमों को कभी बख़्शता नहीं।
  5. मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह की रहमत और उसकी पकड़ दोनों पर ईमान रखे — रहमत की उम्मीद भी करे और अज़ाब से डरता भी रहे, ताकि उसका अमल दुरुस्त रहे।


📜 आयत 11-15 — यूनुस

11۞ وَلَوْ يُعَجِّلُ اللَّهُ لِلنَّاسِ الشَّرَّ اسْتِعْجَالَهُم بِالْخَيْرِ لَقُضِيَ إِلَيْهِمْ أَجَلُهُمْ ۖ فَنَذَرُ الَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ
और जिस तरह लोग अपनी भलाई के लिए जल्दी कर बैठे हैं उसी तरह अगर ख़ुदा उनकी शरारतों की सज़ा में बुराई में जल्दी कर बैठता है तो उनकी मौत उनके पास कब की आ चुकी होती मगर हम तो उन लोगों को जिन्हें (मरने के बाद) हमारी हुज़ूरी का खटका नहीं छोड़ देते हैं कि वह अपनी सरकशी में आप सरग़िरदा रहें
12وَإِذَا مَسَّ الْإِنسَانَ الضُّرُّ دَعَانَا لِجَنبِهِ أَوْ قَاعِدًا أَوْ قَائِمًا فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُ ضُرَّهُ مَرَّ كَأَن لَّمْ يَدْعُنَا إِلَىٰ ضُرٍّ مَّسَّهُ ۚ كَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِلْمُسْرِفِينَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और इन्सान को जब कोई नुकसान छू भी गया तो अपने पहलू पर (लेटा हो) या बैठा हो या ख़ड़ा (गरज़ हर हालत में) हम को पुकारता है फिर जब हम उससे उसकी तकलीफ को दूर कर देते है तो ऐसा खिसक जाता है जैसे उसने तकलीफ के (दफा करने के) लिए जो उसको पहुँचती थी हमको पुकारा ही न था जो लोग ज्यादती करते हैं उनकी कारस्तानियाँ यूँ ही उन्हें अच्छी कर दिखाई गई हैं
13وَلَقَدْ أَهْلَكْنَا الْقُرُونَ مِن قَبْلِكُمْ لَمَّا ظَلَمُوا ۙ وَجَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ وَمَا كَانُوا لِيُؤْمِنُوا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْقَوْمَ الْمُجْرِمِينَ
और तुमसे पहली उम्मत वालों को जब उन्होंने शरारत की तो हम ने उन्हें ज़रुर हलाक कर डाला हालॉकि उनके (वक्त क़े) रसूल वाजेए व रौशन मोज़िज़ात लेकर आ चुके थे और वह लोग ईमान (न लाना था) न लाए हम गुनेहगार लोगों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं
14ثُمَّ جَعَلْنَاكُمْ خَلَائِفَ فِي الْأَرْضِ مِن بَعْدِهِمْ لِنَنظُرَ كَيْفَ تَعْمَلُونَ
फिर हमने उनके बाद तुमको ज़मीन में (उनका) जानशीन बनाया ताकि हम (भी) देखें कि तुम किस तरह काम करते हो
15وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ ۙ قَالَ الَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا ائْتِ بِقُرْآنٍ غَيْرِ هَٰذَا أَوْ بَدِّلْهُ ۚ قُلْ مَا يَكُونُ لِي أَنْ أُبَدِّلَهُ مِن تِلْقَاءِ نَفْسِي ۖ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ ۖ إِنِّي أَخَافُ إِنْ عَصَيْتُ رَبِّي عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
और जब उन लोगों के सामने हमारी रौशन आयते पढ़ीं जाती हैं तो जिन लोगों को (मरने के बाद) हमारी हुजूरी का खटका नहीं है वह कहते है कि हमारे सामने इसके अलावा कोई दूसरा (कुरान लाओ या उसका रद्दो बदल कर डालो (ऐ रसूल तुम कह दो कि मुझे ये एख्तेयार नहीं कि मै उसे अपने जी से बदल डालूँ मै तो बस उसी का पाबन्द हूँ जो मेरी तरफ वही की गई है मै तो अगर अपने परवरदिगार की नाफरमानी करु तो बड़े (कठिन) दिन के अज़ाब से डरता हूँ
यूनुसकुरान सूची
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मक्कीRevelation
13आयत

अनुवाद — यूनुस 13

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सूरा आयत 13/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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