अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَيِّنَةٍ: स्पष्ट प्रमाण, दलील और हिदायत।
- يَتْلُوهُ: उसके पीछे-पीछे आता है, उसका अनुसरण करता है।
- شَاهِدٌ: गवाह, प्रमाण।
- إِمَامًا: नेता, अनुसरण किया जाने वाला आदर्श।
- مِرْيَةٍ: संदेह, शक।
- الأَحْزَابِ: विभिन्न समूह, जो नबी के विरुद्ध एकजुट हुए।
विस्तृत व्याख्या:
क्या वह व्यक्ति जो अपने रब की ओर से स्पष्ट प्रमाण (बैय्यना) पर हो — अर्थात उसके पास हिदायत, ज्ञान और सत्य का स्पष्ट दलील हो — उस व्यक्ति के समान हो सकता है जो अंधा होकर कुफ्र और गुमराही में डूबा हो? हरगिज़ नहीं! यहाँ अल्लाह तआला अपने नबी मुहम्मद ﷺ का ज़िक्र कर रहे हैं, जो स्पष्ट प्रमाण (क़ुरआन) पर हैं, और उस प्रमाण के साथ एक और गवाह है जो उसकी तस्दीक़ करता है — और वह है जिब्रील अमीन, जो इसे अल्लाह की ओर से लेकर आए। इसके अलावा, इससे पहले भी एक गवाह मौजूद है — हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की किताब (तौरात), जो एक इमाम (नेता) और रहमत थी। तौरात ने उस नबी की आने की ख़बर दी थी और उसकी सच्चाई की गवाही दी थी। ये तीनों प्रमाण मिलकर सत्य को स्पष्ट कर देते हैं।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि ये लोग (जो इन प्रमाणों पर ईमान लाए) सचमुच उस (क़ुरआन और नबी ﷺ) पर ईमान लाते हैं। और जो विभिन्न समूहों (अहज़ाब) में से इसका इन्कार करे — चाहे वह मक्का के काफ़िर हों या अन्य समूह — तो उनका वादा आग (जहन्नम) है, जहाँ वे जाएँगे।
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हुए फ़रमाता है: "ऐ नबी! तुम इस (वादे और क़ुरआन) के बारे में किसी संदेह में मत पड़ो। यह तुम्हारे रब की ओर से सत्य है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन अधिकतर लोग — अपनी कम समझी, अहमियत और ग़लत सोच की वजह से — ईमान नहीं लाते।"
फ़ायदे और सबक़:
- सत्य की पहचान के लिए प्रमाण काफ़ी हैं: अल्लाह ने अपने नबी को स्पष्ट प्रमाण, गवाह (जिब्रील) और पिछली किताबों की गवाही — तीनों चीज़ें दीं। यह दर्शाता है कि सत्य अपने साथ अपने प्रमाण रखता है, और जो सच्चाई की तलाश करे, उसे रास्ता मिल जाता है।
- ईमान की बरकत: जो लोग इन प्रमाणों को देखकर ईमान लाते हैं, वे सच्चे मोमिन हैं। उनका दिल सत्य के साथ जुड़ जाता है और उन्हें अल्लाह की ओर से सुकून और हिदायत मिलती है।
- इन्कार का अंजाम: जो लोग सत्य को जानने के बाद भी उसका इन्कार करते हैं, उनका अंजाम आग है। यह अल्लाह का न्याय है — जो सत्य को ठुकराए, उसे अपने किए की सज़ा मिलेगी।
- नबी ﷺ की तसल्ली: अल्लाह अपने नबी को संदेह से बचाता है और बताता है कि यह क़ुरआन और वादा सत्य है। इससे हमें सीख मिलती है कि सत्य पर चलते हुए हमें किसी के इन्कार से घबराना नहीं चाहिए — सत्य हमेशा सत्य रहता है, चाहे लोग मानें या न मानें।
- अधिकतर लोगों की हालत: अधिकतर लोग सोच-विचार और दिल से सत्य को नहीं अपनाते, बल्कि अपनी आदतों, अहंकार और दुनियावी मोह में लिप्त रहते हैं। यह हमें सचेत करता है कि हम उन अधिकतर लोगों में से न हों, बल्कि उन लोगों में से हों जो सत्य को पहचानें और उस पर अमल करें।
📜 आयत 15-19 — हूद
अनुवाद — हूद 17
सूरा हूद आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या जो शख़्श अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन…सूरा आयत 17/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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