Ulaaa`ikal lazeena laisa lahum fil Aakhirati illan Naaru wa habita maa sana`oo feehaa wa baatilum maa kaanoo ya`maloon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
मगर (हाँ) ये वह लोग हैं जिनके लिए आख़िरत में (जहन्नुम की) आग के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ दुनिया में उन लोगों ने किया धरा था सब अकारत (बर्बाद) हो गया और जो कुछ ये लोग करते थे सब मिटियामेट हो गया
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
یہ وہ لوگ ہیں جن کے لیے آخرت میں آتش (جہنم) کے سوا کوئی چیز نہیں اور جو عمل انہوں نے دنیا میں کئے سب برباد اور جو کچھ وہ کرتے رہے، سب ضائع
मगर (हाँ) ये वह लोग हैं जिनके लिए आख़िरत में (जहन्नुम की) आग के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ दुनिया में उन लोगों ने किया धरा था सब अकारत (बर्बाद) हो गया और जो कुछ ये लोग करते थे सब मिटियामेट हो गया
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
حَبِطَ (हबिता): नष्ट हो गया, बेकार हो गया, अकारण चला गया।
صَنَعُوا (सनउ): उन्होंने किया, उन्होंने बनाया।
بَاطِلٌ (बातिल): झूठा, व्यर्थ, जिसका कोई फल न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये वे लोग हैं जिन्होंने दुनिया की ज़िंदगी में केवल दिखावे के लिए या सांसारिक लाभ के लिए अच्छे काम किए, लेकिन उनके दिलों में ईमान नहीं था और न ही उन्होंने अल्लाह की रज़ा और आख़िरत के सवाब की नीयत से काम किया। ऐसे लोगों के लिए आख़िरत में नरक की आग के अलावा कुछ भी नहीं है। उन्होंने दुनिया में जो कुछ भी अच्छा किया — जैसे दान, मदद, या कोई नेक काम — वह सब आख़िरत में बेकार हो जाएगा, क्योंकि उनके काम ईमान और सही नीयत पर आधारित नहीं थे। उनके सारे कर्म व्यर्थ और झूठे साबित होंगे, क्योंकि वे अल्लाह के लिए नहीं थे, बल्कि दुनिया दिखाने और लोगों की तारीफ पाने के लिए थे। इसलिए उन्हें उन कर्मों का कोई बदला नहीं मिलेगा, और न ही वे उनसे कोई लाभ उठा सकेंगे।
फ़ायदे (सीख):
यह आयत हमें सिखाती है कि अच्छे कामों की क़ीमत उनकी नीयत पर निर्भर करती है। अगर नीयत खराब है या केवल दिखावे के लिए है, तो वे काम आख़िरत में बेकार हो जाएंगे।
ईमान और अल्लाह की रज़ा के बिना कोई भी अच्छा काम आख़िरत में काम नहीं आएगा। इसलिए हर काम में सबसे पहले नीयत को सही करना चाहिए।
दुनिया की कामयाबी और तारीफ़ पाने के लिए किए गए काम इंसान को आख़िरत में नुकसान पहुंचाते हैं, क्योंकि वे उसे नरक की ओर ले जाते हैं।
यह आयत हमें याद दिलाती है कि आख़िरत की सफलता के लिए दुनिया में ईमान और अच्छे कर्मों का सही संयोजन ज़रूरी है। जो लोग केवल दुनिया के लिए जीते हैं, वे आख़िरत में सब कुछ खो देंगे।
मुसलमान को चाहिए कि वह हर अच्छे काम को अल्लाह की रज़ा के लिए करे, ताकि वह आख़िरत में उसका बदला पा सके और नरक से बच सके।
और ख़ुदा के सिवा जिस जिस के तुम्हे बुलाते बन पड़े मदद के वास्ते बुला लो उस पर अगर वह तुम्हारी न सुने तो समझ ले कि (ये क़ुरान) सिर्फ ख़ुदा के इल्म से नाज़िल किया गया है और ये कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो क्या तुम अब भी इस्लाम लाओगे (या नहीं)
नेकी करने वालों में से जो शख़्श दुनिया की ज़िन्दगी और उसके रिज़क़ का तालिब हो तो हम उन्हें उनकी कारगुज़ारियों का बदला दुनिया ही में पूरा पूरा भर देते हैं और ये लोग दुनिया में घाटे में नहीं रहेगें
मगर (हाँ) ये वह लोग हैं जिनके लिए आख़िरत में (जहन्नुम की) आग के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ दुनिया में उन लोगों ने किया धरा था सब अकारत (बर्बाद) हो गया और जो कुछ ये लोग करते थे सब मिटियामेट हो गया
तो क्या जो शख़्श अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन दलील पर हो और उसके पीछे ही पीछे उनका एक गवाह हो और उसके क़बल मूसा की किताब (तौरैत) जो (लोगों के लिए) पेशवा और रहमत थी (उसकी तसदीक़ करती हो वह बेहतर है या कोई दूसरा) यही लोग सच्चे ईमान लाने वाले और तमाम फिरक़ों में से जो शख़्श भी उसका इन्कार करे तो उसका ठिकाना बस आतिश (जहन्नुम) है तो फिर तुम कहीं उसकी तरफ से शक़ में न पड़े रहना, बेशक ये क़ुरान तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से बरहक़ है मगर बहुतेरे लोग ईमान नही लाते
और ये जो शख़्श ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधे उससे ज्यादा ज़ालिम कौन होगा ऐसे लोग अपने परवरदिगार के हुज़ूर में पेश किए जाएंगें और गवाह इज़हार करेगें कि यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार पर झूट (बोहतान) बाँधा था सुन रखो कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की फिटकार है
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