हूद · 16/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
أُولَٰئِكَ الَّذِينَ لَيْسَ لَهُمْ فِي الْآخِرَةِ إِلَّا النَّارُ ۖ وَحَبِطَ مَا صَنَعُوا فِيهَا وَبَاطِلٌ مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝١٦
Ulaaa`ikal lazeena laisa lahum fil Aakhirati illan Naaru wa habita maa sana`oo feehaa wa baatilum maa kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
मगर (हाँ) ये वह लोग हैं जिनके लिए आख़िरत में (जहन्नुम की) आग के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ दुनिया में उन लोगों ने किया धरा था सब अकारत (बर्बाद) हो गया और जो कुछ ये लोग करते थे सब मिटियामेट हो गया
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَبِطَ (हबिता): नष्ट हो गया, बेकार हो गया, अकारण चला गया।
  • صَنَعُوا (सनउ): उन्होंने किया, उन्होंने बनाया।
  • بَاطِلٌ (बातिल): झूठा, व्यर्थ, जिसका कोई फल न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये वे लोग हैं जिन्होंने दुनिया की ज़िंदगी में केवल दिखावे के लिए या सांसारिक लाभ के लिए अच्छे काम किए, लेकिन उनके दिलों में ईमान नहीं था और न ही उन्होंने अल्लाह की रज़ा और आख़िरत के सवाब की नीयत से काम किया। ऐसे लोगों के लिए आख़िरत में नरक की आग के अलावा कुछ भी नहीं है। उन्होंने दुनिया में जो कुछ भी अच्छा किया — जैसे दान, मदद, या कोई नेक काम — वह सब आख़िरत में बेकार हो जाएगा, क्योंकि उनके काम ईमान और सही नीयत पर आधारित नहीं थे। उनके सारे कर्म व्यर्थ और झूठे साबित होंगे, क्योंकि वे अल्लाह के लिए नहीं थे, बल्कि दुनिया दिखाने और लोगों की तारीफ पाने के लिए थे। इसलिए उन्हें उन कर्मों का कोई बदला नहीं मिलेगा, और न ही वे उनसे कोई लाभ उठा सकेंगे।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अच्छे कामों की क़ीमत उनकी नीयत पर निर्भर करती है। अगर नीयत खराब है या केवल दिखावे के लिए है, तो वे काम आख़िरत में बेकार हो जाएंगे।
  2. ईमान और अल्लाह की रज़ा के बिना कोई भी अच्छा काम आख़िरत में काम नहीं आएगा। इसलिए हर काम में सबसे पहले नीयत को सही करना चाहिए।
  3. दुनिया की कामयाबी और तारीफ़ पाने के लिए किए गए काम इंसान को आख़िरत में नुकसान पहुंचाते हैं, क्योंकि वे उसे नरक की ओर ले जाते हैं।
  4. यह आयत हमें याद दिलाती है कि आख़िरत की सफलता के लिए दुनिया में ईमान और अच्छे कर्मों का सही संयोजन ज़रूरी है। जो लोग केवल दुनिया के लिए जीते हैं, वे आख़िरत में सब कुछ खो देंगे।
  5. मुसलमान को चाहिए कि वह हर अच्छे काम को अल्लाह की रज़ा के लिए करे, ताकि वह आख़िरत में उसका बदला पा सके और नरक से बच सके।
🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — हूद

14فَإِلَّمْ يَسْتَجِيبُوا لَكُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّمَا أُنزِلَ بِعِلْمِ اللَّهِ وَأَن لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ
और ख़ुदा के सिवा जिस जिस के तुम्हे बुलाते बन पड़े मदद के वास्ते बुला लो उस पर अगर वह तुम्हारी न सुने तो समझ ले कि (ये क़ुरान) सिर्फ ख़ुदा के इल्म से नाज़िल किया गया है और ये कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो क्या तुम अब भी इस्लाम लाओगे (या नहीं)
15مَن كَانَ يُرِيدُ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا نُوَفِّ إِلَيْهِمْ أَعْمَالَهُمْ فِيهَا وَهُمْ فِيهَا لَا يُبْخَسُونَ
नेकी करने वालों में से जो शख़्श दुनिया की ज़िन्दगी और उसके रिज़क़ का तालिब हो तो हम उन्हें उनकी कारगुज़ारियों का बदला दुनिया ही में पूरा पूरा भर देते हैं और ये लोग दुनिया में घाटे में नहीं रहेगें
16أُولَٰئِكَ الَّذِينَ لَيْسَ لَهُمْ فِي الْآخِرَةِ إِلَّا النَّارُ ۖ وَحَبِطَ مَا صَنَعُوا فِيهَا وَبَاطِلٌ مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
मगर (हाँ) ये वह लोग हैं जिनके लिए आख़िरत में (जहन्नुम की) आग के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ दुनिया में उन लोगों ने किया धरा था सब अकारत (बर्बाद) हो गया और जो कुछ ये लोग करते थे सब मिटियामेट हो गया
17أَفَمَن كَانَ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّهِ وَيَتْلُوهُ شَاهِدٌ مِّنْهُ وَمِن قَبْلِهِ كِتَابُ مُوسَىٰ إِمَامًا وَرَحْمَةً ۚ أُولَٰئِكَ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۚ وَمَن يَكْفُرْ بِهِ مِنَ الْأَحْزَابِ فَالنَّارُ مَوْعِدُهُ ۚ فَلَا تَكُ فِي مِرْيَةٍ مِّنْهُ ۚ إِنَّهُ الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
तो क्या जो शख़्श अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन दलील पर हो और उसके पीछे ही पीछे उनका एक गवाह हो और उसके क़बल मूसा की किताब (तौरैत) जो (लोगों के लिए) पेशवा और रहमत थी (उसकी तसदीक़ करती हो वह बेहतर है या कोई दूसरा) यही लोग सच्चे ईमान लाने वाले और तमाम फिरक़ों में से जो शख़्श भी उसका इन्कार करे तो उसका ठिकाना बस आतिश (जहन्नुम) है तो फिर तुम कहीं उसकी तरफ से शक़ में न पड़े रहना, बेशक ये क़ुरान तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से बरहक़ है मगर बहुतेरे लोग ईमान नही लाते
18وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۚ أُولَٰئِكَ يُعْرَضُونَ عَلَىٰ رَبِّهِمْ وَيَقُولُ الْأَشْهَادُ هَٰؤُلَاءِ الَّذِينَ كَذَبُوا عَلَىٰ رَبِّهِمْ ۚ أَلَا لَعْنَةُ اللَّهِ عَلَى الظَّالِمِينَ
और ये जो शख़्श ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधे उससे ज्यादा ज़ालिम कौन होगा ऐसे लोग अपने परवरदिगार के हुज़ूर में पेश किए जाएंगें और गवाह इज़हार करेगें कि यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार पर झूट (बोहतान) बाँधा था सुन रखो कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की फिटकार है
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Tuesday, August 18, 2026

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