अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- افْتَرَى: झूठ गढ़ना, मनगढ़ंत बात बनाना।
- الأَشْهَادُ: गवाह, जिनमें फ़रिश्ते, नबी और अन्य साक्षी शामिल हैं।
- لَعْنَةُ: अभिशाप, अल्लाह की रहमत से दूर करना।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उस व्यक्ति से बढ़कर ज़ालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ बोले, उसके लिए साझीदार या संतान होने का दावा करे, या उसके नाम पर मनगढ़ंत बातें गढ़े? ऐसे लोगों से बढ़कर कोई ज़ालिम नहीं, क्योंकि वे अल्लाह की महानता और पवित्रता पर हमला करते हैं और लोगों को सच्चे रास्ते से भटकाते हैं।
क़यामत के दिन ऐसे सभी झूठ बोलने वालों को उनके रब के सामने पेश किया जाएगा, और वहाँ फ़रिश्ते, नबी और अन्य गवाह गवाही देंगे कि ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने रब पर झूठ बोला था। उस समय उनके चेहरे पर रुसवाई और शर्मिंदगी साफ़ दिखेगी। फिर अल्लाह की ओर से एलान किया जाएगा कि ऐसे ज़ालिमों पर अल्लाह की लानत है, यानी वे उसकी रहमत से हमेशा के लिए दूर कर दिए गए।
यह लानत उनके ज़ुल्म का स्वाभाविक परिणाम है, क्योंकि उन्होंने जानबूझकर सच को छिपाया और अल्लाह के बारे में झूठ फैलाया। यह उनके लिए सिर्फ़ एक सज़ा नहीं, बल्कि उनके दिलों की गंदगी का इज़हार है।
फ़ायदे:
- अल्लाह पर झूठ बोलना सबसे बड़ा ज़ुल्म है, चाहे वह उसके नाम पर झूठी बातें फैलाना हो या उसकी सिफ़ात में कमी करना हो। इससे बचना चाहिए।
- क़यामत के दिन हर बात सामने आ जाएगी, और गवाह हमारे खिलाफ़ गवाही देंगे। इसलिए हमें अपने अमल को सुधारना चाहिए।
- अल्लाह की रहमत उन्हीं के लिए है जो सच्चाई पर चलते हैं, और जो लोग झूठ और ज़ुल्म पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम अल्लाह की लानत और रुसवाई है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने ज़बान से हमेशा सच बोलें और अल्लाह के बारे में ऐसी बातें न करें जिनका कोई सबूत न हो, ताकि हम ज़ालिमों में शामिल न हों।
📜 आयत 16-20 — हूद
अनुवाद — हूद 18
सूरा हूद आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये जो शख़्श ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधे…सूरा आयत 18/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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