हूद · 18/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۚ أُولَٰئِكَ يُعْرَضُونَ عَلَىٰ رَبِّهِمْ وَيَقُولُ الْأَشْهَادُ هَٰؤُلَاءِ الَّذِينَ كَذَبُوا عَلَىٰ رَبِّهِمْ ۚ أَلَا لَعْنَةُ اللَّهِ عَلَى الظَّالِمِينَ ۝١٨
Wa man azlamu mimmanif taraa `alal laahi kazibaa; ulaaa`ika yu`radoona `alaa Rabbihim wa yaqoolul ashhaa duhaaa`ulaaa`il lazeena kazaboo `alaa Rabbihim; alaa la`natul laahi alaz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
और ये जो शख़्श ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधे उससे ज्यादा ज़ालिम कौन होगा ऐसे लोग अपने परवरदिगार के हुज़ूर में पेश किए जाएंगें और गवाह इज़हार करेगें कि यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार पर झूट (बोहतान) बाँधा था सुन रखो कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की फिटकार है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • افْتَرَى: झूठ गढ़ना, मनगढ़ंत बात बनाना।
  • الأَشْهَادُ: गवाह, जिनमें फ़रिश्ते, नबी और अन्य साक्षी शामिल हैं।
  • لَعْنَةُ: अभिशाप, अल्लाह की रहमत से दूर करना।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उस व्यक्ति से बढ़कर ज़ालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ बोले, उसके लिए साझीदार या संतान होने का दावा करे, या उसके नाम पर मनगढ़ंत बातें गढ़े? ऐसे लोगों से बढ़कर कोई ज़ालिम नहीं, क्योंकि वे अल्लाह की महानता और पवित्रता पर हमला करते हैं और लोगों को सच्चे रास्ते से भटकाते हैं।

क़यामत के दिन ऐसे सभी झूठ बोलने वालों को उनके रब के सामने पेश किया जाएगा, और वहाँ फ़रिश्ते, नबी और अन्य गवाह गवाही देंगे कि ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने रब पर झूठ बोला था। उस समय उनके चेहरे पर रुसवाई और शर्मिंदगी साफ़ दिखेगी। फिर अल्लाह की ओर से एलान किया जाएगा कि ऐसे ज़ालिमों पर अल्लाह की लानत है, यानी वे उसकी रहमत से हमेशा के लिए दूर कर दिए गए।

यह लानत उनके ज़ुल्म का स्वाभाविक परिणाम है, क्योंकि उन्होंने जानबूझकर सच को छिपाया और अल्लाह के बारे में झूठ फैलाया। यह उनके लिए सिर्फ़ एक सज़ा नहीं, बल्कि उनके दिलों की गंदगी का इज़हार है।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह पर झूठ बोलना सबसे बड़ा ज़ुल्म है, चाहे वह उसके नाम पर झूठी बातें फैलाना हो या उसकी सिफ़ात में कमी करना हो। इससे बचना चाहिए।
  2. क़यामत के दिन हर बात सामने आ जाएगी, और गवाह हमारे खिलाफ़ गवाही देंगे। इसलिए हमें अपने अमल को सुधारना चाहिए।
  3. अल्लाह की रहमत उन्हीं के लिए है जो सच्चाई पर चलते हैं, और जो लोग झूठ और ज़ुल्म पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम अल्लाह की लानत और रुसवाई है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने ज़बान से हमेशा सच बोलें और अल्लाह के बारे में ऐसी बातें न करें जिनका कोई सबूत न हो, ताकि हम ज़ालिमों में शामिल न हों।
🎧 सुनें

📜 आयत 16-20 — हूद

16أُولَٰئِكَ الَّذِينَ لَيْسَ لَهُمْ فِي الْآخِرَةِ إِلَّا النَّارُ ۖ وَحَبِطَ مَا صَنَعُوا فِيهَا وَبَاطِلٌ مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
मगर (हाँ) ये वह लोग हैं जिनके लिए आख़िरत में (जहन्नुम की) आग के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ दुनिया में उन लोगों ने किया धरा था सब अकारत (बर्बाद) हो गया और जो कुछ ये लोग करते थे सब मिटियामेट हो गया
17أَفَمَن كَانَ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّهِ وَيَتْلُوهُ شَاهِدٌ مِّنْهُ وَمِن قَبْلِهِ كِتَابُ مُوسَىٰ إِمَامًا وَرَحْمَةً ۚ أُولَٰئِكَ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۚ وَمَن يَكْفُرْ بِهِ مِنَ الْأَحْزَابِ فَالنَّارُ مَوْعِدُهُ ۚ فَلَا تَكُ فِي مِرْيَةٍ مِّنْهُ ۚ إِنَّهُ الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
तो क्या जो शख़्श अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन दलील पर हो और उसके पीछे ही पीछे उनका एक गवाह हो और उसके क़बल मूसा की किताब (तौरैत) जो (लोगों के लिए) पेशवा और रहमत थी (उसकी तसदीक़ करती हो वह बेहतर है या कोई दूसरा) यही लोग सच्चे ईमान लाने वाले और तमाम फिरक़ों में से जो शख़्श भी उसका इन्कार करे तो उसका ठिकाना बस आतिश (जहन्नुम) है तो फिर तुम कहीं उसकी तरफ से शक़ में न पड़े रहना, बेशक ये क़ुरान तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से बरहक़ है मगर बहुतेरे लोग ईमान नही लाते
18وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۚ أُولَٰئِكَ يُعْرَضُونَ عَلَىٰ رَبِّهِمْ وَيَقُولُ الْأَشْهَادُ هَٰؤُلَاءِ الَّذِينَ كَذَبُوا عَلَىٰ رَبِّهِمْ ۚ أَلَا لَعْنَةُ اللَّهِ عَلَى الظَّالِمِينَ
और ये जो शख़्श ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधे उससे ज्यादा ज़ालिम कौन होगा ऐसे लोग अपने परवरदिगार के हुज़ूर में पेश किए जाएंगें और गवाह इज़हार करेगें कि यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार पर झूट (बोहतान) बाँधा था सुन रखो कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की फिटकार है
19الَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ
जो ख़ुदा के रास्ते से लोगों को रोकते हैं और उसमें कज़ी (टेढ़ा पन) निकालना चाहते हैं और यही लोग आख़िरत के भी मुन्किर है
20أُولَٰئِكَ لَمْ يَكُونُوا مُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَمَا كَانَ لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِنْ أَوْلِيَاءَ ۘ يُضَاعَفُ لَهُمُ الْعَذَابُ ۚ مَا كَانُوا يَسْتَطِيعُونَ السَّمْعَ وَمَا كَانُوا يُبْصِرُونَ
ये लोग रुए ज़मीन में न ख़ुदा को हरा सकते है और न ख़ुदा के सिवा उनका कोई सरपरस्त होगा उनका अज़ाब दूना कर दिया जाएगा ये लोग (हसद के मारे) न तो (हक़ बात) सुन सकते थे न देख सकते थे
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अनुवाद — हूद 18

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Tuesday, August 18, 2026

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