Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بَيِّنَةٍ: स्पष्ट प्रमाण, खुला हुआ सबूत।
- رَحْمَةً: यहाँ अर्थ है नबुव्वत (पैग़म्बरी) और रिसालत (सन्देश)।
- فَعُمِّيَتْ عَلَيْكُمْ: वह चीज़ तुम पर छिपी रह गई, यानी तुम उसे समझ न सके।
- أَنُلْزِمُكُمُوهَا: क्या हम उसे तुम पर ज़बरदस्ती थोप दें?
- كَارِهُونَ: नापसन्द करने वाले, विरोधी।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को सम्बोधित करते हुए कहा: "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! ज़रा मुझे बताओ—अगर मैं अपने रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण (बय्यिना) पर हूँ, जो मेरे दावे की सच्चाई की गवाही देता है, और उसने मुझे अपनी ओर से रहमत (नबुव्वत और रिसालत) प्रदान की है, लेकिन यह रहमत तुम्हारी समझ से ओझल रह गई है—तो क्या यह उचित है कि हम इस (सत्य) को तुम पर ज़बरदस्ती थोप दें, जबकि तुम इसे नापसन्द करते हो?"
यह एक अर्थपूर्ण प्रश्न है जो इन्कार (नकारात्मक उत्तर) के लिए है। यानी नूह (अलैहिस्सलाम) यह समझा रहे हैं कि ईमान और हिदायत कोई ज़बरदस्ती की चीज़ नहीं है। हमारा काम केवल सत्य को स्पष्ट रूप से पहुँचाना है। जिसे अल्लाह हिदायत देना चाहेगा, वही इसे क़बूल करेगा। हम तुम्हें ज़बरदस्ती मुसलमान नहीं बना सकते, क्योंकि ईमान दिल का मामला है, और दिल को ज़बरदस्ती नहीं बदला जा सकता। हमारा काम केवल सच्चाई को बयान करना है, और फ़ैसला अल्लाह के हाथ में है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- दावत में नर्मी और हिकमत: इस आयत से सीख मिलती है कि सत्य की ओर बुलाने का तरीक़ा नर्मी, समझाने-बुझाने और तर्क पर आधारित होना चाहिए, न कि ज़बरदस्ती पर। इस्लाम में ईमान ज़बरदस्ती से नहीं लाया जाता।
- स्पष्ट प्रमाण की अहमियत: एक दावा करने वाले के पास स्पष्ट प्रमाण होना चाहिए। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) के पास अपने रब की ओर से स्पष्ट बय्यिना थी, और यही उनकी ताक़त थी।
- अल्लाह की रहमत की क़द्र: नबुव्वत और रिसालत अल्लाह की बहुत बड़ी रहमत है। जो लोग इस रहमत को नहीं पहचानते, वे वास्तव में बड़े घाटे में हैं।
- ज़बरदस्ती से ईमान नहीं आता: ईमान दिल की गहराई से निकलने वाली चीज़ है। इसे ज़बरदस्ती नहीं थोपा जा सकता। यह अल्लाह की तौफ़ीक़ से ही आता है।
- अल्लाह पर भरोसा: दावत देने वाले को अपने काम से फ़ारिग़ होकर अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है, हमारा काम केवल पहुँचाना है।
📜 आयत 26-30 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 28
सूरा हूद आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (नूह ने) कहा ऐ मेरी क़ौम क्या तुमने ये समझा…सूरा आयत 28/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


