अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- طَوْعًا: स्वेच्छा से, अपनी इच्छा और खुशी से।
- كَرْهًا: विवश होकर, अनिच्छा से, मजबूरी में।
- ظِلَالُهُم: उनकी परछाइयाँ (जो हर चीज़ की होती हैं)।
- الْغُدُوِّ: सुबह का समय, प्रातःकाल।
- الْآصَالِ: शाम का समय, सूर्यास्त से पहले का वक्त (अस्र के बाद से सूर्यास्त तक)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह तआला की महानता और उसकी सर्वोच्च सत्ता का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है। अल्लाह ही वह हस्ती है जिसके आगे आसमानों और ज़मीन में मौजूद हर चीज़ सजदा करती है—चाहे वह कोई भी हो। यह सजदा दो तरह का है:
पहला, स्वेच्छा से (तौअन) — यह मोमिनों का सजदा है, जो अल्लाह की इबादत को अपनी खुशी, मुहब्बत और पूरे दिल से करते हैं। उनका सजदा उनके ईमान, शुक्र और अल्लाह के प्रति प्रेम का इज़हार होता है।
दूसरा, विवशता से (करहन) — यह काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों का हाल है। वे भले ही ज़बान से इनकार करें, लेकिन उनकी फ़ितरत (स्वभाव) और उनका अस्तित्व अल्लाह के आगे झुका हुआ है। उनकी रूह, उनका दिल और उनकी पूरी कायनात अल्लाह की कुदरत के सामने विवश है। वे चाहें जितना भी घमंड करें, उनकी पैदाइश, उनकी साँसें, उनका जीवन—सब कुछ अल्लाह के इशारे पर चल रहा है। यहाँ तक कि उनकी परछाइयाँ भी सुबह और शाम अल्लाह के हुक्म से झुकती और फैलती हैं, जो उनके विवश होने की गवाही देती हैं।
तीसरा, परछाइयों का सजदा — यह एक अद्भुत दृश्य है। हर मख़लूक़ (प्राणी) की परछाई—चाहे वह पहाड़ हो, पेड़ हो, जानवर हो या इंसान—सुबह और शाम के समय अल्लाह के हुक्म से झुकती है। यह परछाइयों का सजदा अल्लाह की कुदरत का एक स्पष्ट प्रमाण है कि पूरी कायनात अपने रब के आगे नतमस्तक है।
दावती पहलू (शिक्षाप्रद संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि इस विशाल ब्रह्मांड की हर चीज़—चाहे वह आसमान हो, ज़मीन हो, पहाड़ हों, पेड़ हों या हमारी अपनी परछाइयाँ—अल्लाह की महानता के सामने झुकी हुई हैं। फिर हम इंसान, जिन्हें अल्लाह ने अक्ल और समझ दी है, उसे क्यों नहीं सजदा करते? अगर हमारी परछाई भी अल्लाह के हुक्म से झुकती है, तो हमें अपने रब के आगे सिर झुकाने में क्या हिचकिचाहट होनी चाहिए?
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की इबादत करना कोई बोझ नहीं, बल्कि एक सौभाग्य है। जो लोग स्वेच्छा से अल्लाह के आगे झुकते हैं, वे सच्ची शांति और सुकून पाते हैं। और जो लोग घमंड करते हैं, वे अंततः विवश होकर उसी के आगे झुकेंगे—चाहे दुनिया में नहीं, तो आख़िरत में ज़रूर। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने रब के आगे प्यार और इख़लास (शुद्ध नियत) के साथ सजदा करें, क्योंकि यही हमारी फ़ितरत है और यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 13-17 — अर-राद
अनुवाद — अर-राद 15
सूरा अर-राद आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और आसमानों और ज़मीन में (मख़लूक़ात से) जो कोई भी…सूरा आयत 15/43 — अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-राद सुनें, अर-राद अनुवाद, अर-राद mp3, अर-राद pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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