Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- क़िसास: बदला लेना, बराबरी का दंड देना, यानी जैसा जुर्म किया गया हो वैसा ही उसके साथ किया जाए।
- क़त्ला: मारे गए लोग (हत्या के मामले)।
- उफ़िया लहू: जिसे माफ कर दिया जाए (क़िसास माफ कर दिया जाए)।
- दिया: खून बहा (धनराशि जो हत्यारे की ओर से मृतक के उत्तराधिकारियों को दी जाए)।
- इत्तिबा: पालन करना, अनुसरण करना।
- मारूफ: अच्छे तरीके से, नेकी के साथ।
- एहसान: भलाई, सुंदर तरीके से अदा करना।
- इ'तिदा: हद से बढ़ना, ज़ुल्म करना।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालो! अल्लाह ने तुम पर क़िसास (बराबरी का बदला) फ़र्ज़ किया है, ताकि हत्या के मामले में इंसाफ़ क़ायम हो और खून का बदला खून से लिया जा सके। यह क़ानून जानबूझकर की गई हत्या के लिए है, और इसमें बराबरी की शर्त है: आज़ाद (स्वतंत्र) व्यक्ति के बदले आज़ाद, ग़ुलाम के बदले ग़ुलाम, और औरत के बदले औरत को क़त्ल किया जाएगा। यानी किसी पर ज़ुल्म न हो और हद से तजावुज़ न किया जाए।
लेकिन अल्लाह ने अपनी रहमत से यह सुविधा दी है कि अगर मृतक का वली (उत्तराधिकारी) क़िसास माफ कर दे और दिया (खून बहा) लेने पर राज़ी हो जाए, तो यह बहुत बड़ी नेकी है। ऐसी सूरत में दोनों पक्षों पर ज़िम्मेदारी है: जिसने माफ किया है उसे चाहिए कि वह अच्छे तरीके से दिया का तक़ाज़ा करे, न ज़्यादा माँगे, न सख्ती करे, और न ही माफ़ी का एहसान जताए। और हत्यारे पर फ़र्ज़ है कि वह दिया को अच्छी तरह से, बिना किसी देरी या कमी के, खुशी से अदा करे। यही अल्लाह को पसंद है।
यह क़िसास का क़ानून और माफ़ी की गुंजाइश तुम्हारे रब की तरफ से एक आसानी और रहमत है। पहले की उम्मतों पर सख्ती थी—कुछ पर सिर्फ़ क़िसास लाज़िम था और दिया लेना जायज़ नहीं था, तो कुछ पर सिर्फ़ दिया लाज़िम था और क़िसास नहीं। लेकिन इस उम्मत को अल्लाह ने दोनों में से चुनने की इजाज़त दी, जो उसकी बड़ी मेहरबानी है।
अब जो शख्स इन हदों के बाद भी ज़ुल्म करे—यानी माफ़ी और दिया क़बूल करने के बाद हत्यारे को क़त्ल कर डाले, या किसी और पर हमला करे—तो उसके लिए दर्दनाक अज़ाब है। दुनिया में उसे क़िसास के तौर पर सज़ा दी जाएगी, और आख़िरत में अल्लाह की तरफ से सख्त सज़ा उसका इंतज़ार कर रही है।
याद रखो, इस्लाम का क़ानून इंसाफ़ और रहमत दोनों पर आधारित है। अल्लाह ने हमें सिखाया है कि ग़ुस्से और इंतक़ाम की आग में जलने के बजाय माफ़ी और नेकी का रास्ता अपनाओ, क्योंकि माफ़ी अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खोलती है। जो लोग माफ़ करते हैं और सुधार करते हैं, उनका अज्र अल्लाह के पास है। इसलिए इस आसानी को ग़नीमत समझो और अल्लाह के हुक्म पर चलकर अपने दिलों को साफ़ रखो, क्योंकि अल्लाह नेकी करने वालों से मुहब्बत करता है।
📜 आयत 176-180 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 178
सूरा अल-बकरा आयत 178 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ मोमिनों जो लोग (नाहक़) मार डाले जाएँ उनके बदले…सूरा आयत 178/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 176–180. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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