अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُتَوَفَّوْنَ – जिनकी मृत्यु हो जाए।
- يَذَرُونَ – छोड़ जाएं।
- أَزْوَاجًا – पत्नियाँ।
- وَصِيَّةً – वसीयत (नसीहत/आदेश)।
- مَّتَاعًا – भरण-पोषण और सुख-सुविधा का सामान।
- إِلَى الْحَوْلِ – एक वर्ष तक।
- غَيْرَ إِخْرَاجٍ – बिना निकाले (घर से न निकाला जाए)।
- جُنَاحٌ – पाप, दोष, गुनाह।
- مَّعْرُوفٍ – उचित, शरई तरीके से जायज़ काम।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो मर जाते हैं और अपने पीछे पत्नियाँ छोड़ जाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे मृतकों पर यह हक़ था कि वे अपनी पत्नियों के लिए वसीयत कर जाएं कि उन्हें एक साल तक घर में रहने और गुज़ारे (खर्च) का अधिकार दिया जाए, और उन्हें घर से न निकाला जाए। यह विधान उस समय था जब इस्लाम के शुरुआती दौर में विधवा स्त्री की इद्दत (अवधि) एक साल तक थी। इसका मक़सद विधवा के दिल को तसल्ली देना और मृतक के साथ भलाई करना था।
लेकिन अगर ये औरतें खुद अपनी मर्ज़ी से एक साल पूरा होने से पहले घर से निकल जाएं, या अपने लिए कोई जायज़ काम करें (जैसे शादी करना या सजना-संवरना), तो मृतक के वारिसों पर कोई गुनाह नहीं है, और न ही उन औरतों पर कोई पाप है, बशर्ते वह काम शरई तरीके से और उचित हो। अल्लाह तआला अपनी ताक़त में ज़बरदस्त है और अपने हुक्म में हिकमत वाला है।
यह ध्यान रखना चाहिए कि इस आयत का हुक्म बाद में सूरह अल-बकरा की आयत 234 (जिसमें चार महीने दस दिन की इद्दत का ज़िक्र है) से मंसूख (रद्द) हो गया। यानी विधवा की इद्दत अब एक साल नहीं, बल्कि चार महीने और दस दिन है, और विरासत का हक़ अलग से क़ुरआन में बयान किया गया है।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से पता चलता है कि इस्लाम में औरतों के साथ भलाई और उनके हक़ों की रक्षा का कितना ख़याल रखा गया है। मरने के बाद भी पत्नी के लिए गुज़ारे और रहने का इंतज़ाम करने की ताकीद की गई।
- इस्लामी क़ानून में धीरे-धीरे सुधार और नरमी की राह अपनाई गई, ताकि लोगों पर मुश्किल न हो। यह हिकमत भरी तरतीब है।
- औरत को अपने जायज़ मामलों में इख़्तियार दिया गया है, बशर्ते वह शरई हदों के अंदर रहे। इससे औरत की इज़्ज़त और उसकी मर्ज़ी का एहतिराम ज़ाहिर होता है।
- अल्लाह तआला की सिफ़ात (गुण) "अज़ीज़" और "हकीम" हमें सिखाती हैं कि उसका हर हुक्म उसकी क़ुदरत और हिकमत पर आधारित है, इसलिए हमें उसके फ़ैसलों पर दिल से राज़ी रहना चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत के वक़्त (जैसे पति की मौत) में औरत को सब्र और इज़्ज़त के साथ रहना चाहिए, और समाज को भी उसका ख़याल रखना चाहिए।
📜 आयत 238-242 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 240
सूरा अल-बकरा आयत 240 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसी तरह ख़ुदा को याद करो और तुम में से…सूरा आयत 240/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 238–242. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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